जिम और स्विमिंग पूल ही नहीं, अब बेडरूम भी होगा दफ्तरों में, इन जगहों पर हुई शुरुआत

गूगल, गोदरेज, एयरटेल और कोकाकोला- ऐसी ही कुछ कंपनियां हैं जहां कर्मचारियों को काम के बीच थोड़ी देर सोने की छूट है. यहां बाकायदा नैप रूम भी बना हुआ है.

News18Hindi
Updated: August 24, 2019, 9:02 AM IST
जिम और स्विमिंग पूल ही नहीं, अब बेडरूम भी होगा दफ्तरों में, इन जगहों पर हुई शुरुआत
86 प्रतिशत भारतीय ऑफिस में एक nap room यानी हल्की-फुल्की नींद लेने के लिए एक कमरा चाहते हैं (प्रतीकात्मक फोटो)
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Updated: August 24, 2019, 9:02 AM IST
आपको भी दफ्तर में झपकी लेने की इच्छा होती है तो आप अकेले नहीं. लगभग 86 प्रतिशत भारतीय ऑफिस में एक nap room यानी हल्की-फुल्की नींद लेने के लिए एक कमरा चाहते हैं. इनमें से 40 प्रतिशत वे हैं जो काम के तनाव या दफ्तर से दूरी की वजह से पूरी नींद नहीं ले पाते हैं. ये बात Right to Work Naps के तहत सामने आई.

नींद पर स्टडी करने वाले एक स्टार्टअप ऑनलाइन स्लीप सॉल्यूशन्स वेकफिट कॉर्पोरेशन ने हाल ही में भारतीय की नींद की आदत पर एक स्टडी की. इसके तहत अलग-अलग शहरों के 1500 लोगों से बात की गई. स्टार्टअप के को-फाउंडर चैतन्या रामलिंगगोवडा के अनुसार अलग-अलग कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों पर हुई इस स्टडी से कंपनियों को भी उनकी जरूरतें समझने का मौका मिलेगा और ये उनके लिए ही फायदेमंद रहेगा.

बढ़ती है क्रिएटिविटी
इसमें से लगभग सभी का मानना है कि दफ्तर में थोड़ी-बहुत नींद मिले तो काम और बढ़िया हो सकता है. कई कंपनियां अपने एम्प्लॉजी को नैप यानी झपकी लेने की सुविधा दे भी रही हैं. गूगल, गोदरेज, एयरटेल और कोकाकोला- ऐसी ही कुछ कंपनियां हैं जिनके दफ्तरों में बाकायदा नैप रूम बना हुआ है, जहां दोपहर के खाने या अपनी-अपनी जरूरत के अनुसार एम्प्लॉयीज जाकर छोटी सी नींद ले सकते हैं. कंपनियों का मानना है कि इससे काम करने वालों की प्रोडक्टिविटी बढ़ती है.

दफ्तर में थोड़ी-बहुत नींद मिले तो काम और बढ़िया हो सकता है (प्रतीकात्मक फोटो)


इस वक्त आती है सबसे ज्यादा नींद
स्टडी में शामिल 68 प्रतिशत लोगों ने माना कि दोपहर में 1 बजे से लेकर 4 बजे तक का वक्त सबसे ज्यादा नींद लाने वाला (drowsiest time) होता है. लंच के बाद इस दौरान ज्यादातर लोगों को झपकी लेने की इच्छा होती है. और चूंकि दफ्तर में इस तरह का प्रावधान नहीं है इसलिए कर्मचारी मन मानकर काम करते हैं या फिर नींद भगाने के लिए चाय-कॉफी पीने निकल पड़ते हैं. इससे कई गुना ज्यादा वक्त बर्बाद होता है वहीं झपकी लेने की सहूलियत देने वाले दफ्तरों में ऐसा नहीं है. स्टडी में कई लोगों ने एर्गोनॉमिक्स कुर्सी (Ergonomic chair) के होने पर भी जोर दिया, यानी वो कुर्सी जो खास दफ्तर में बैठकर काम करने वालों के लिए डिजाइन की जाती है. हालांकि तब भी नैप यानी झपकी लेने के लिए अलग कमरा होने की जरूरत खत्म नहीं होती.
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कर्मचारी नींद कैसे भगाते हैं
जब 1 से 4 के बीच लगभग सभी को नींद आती है लेकिन सोना मना है तो ऐसे में कर्मचारी अलग-अलग तरीकों से नींद भगाते हैं. जैसे 34 प्रतिशत लोगों ने माना कि वे इस वक्त पर चाय या कॉफी पीते हैं. लगभग 32 प्रतिशत कर्मचारी वॉक पर निकल जाते हैं. 13 प्रतिशत कर्मचारी इस दौरान बार-बार वॉशरूम जाते और ठंडे पानी से मुंह धोते हैं. 10 प्रतिशत एम्प्लॉजीय वे हैं जो अपनी डेस्क छोड़कर अपने सहकर्मियों से गप्पें मारने निकल पड़ते हैं ताकि नींद भाग सके.

कई लोगों ने एर्गोनॉमिक्स कुर्सी (Ergonomic chair) के होने पर भी जोर दिया (प्रतीकात्मक फोटो)


स्टडी में शामिल 20 प्रतिशत लोग ऐसे भी थे, जो पूरा दिन उबासियां लेते रहते और नींद की कमी की शिकायत करते थे. ये वे लोग हैं जिनके घर से दफ्तर काफी दूरी पर था. नए बने पेरेंट्स भी इनमें से एक थे. बहुत से दफ्तरों में अभी जिमनेजियम और कई तरह के खेलों के रूम तो हैं लेकिन अब नैप रूम का भी बंदोबस्त हो रहा है. कंपनियों का भी मानना है कि 20 से 30 मिनट की नींद लेने से अलग कर्मचारियों की प्रोडक्टिविटी बढ़ती है तो ये कोई बुरा सौदा नहीं.

ज्यादा अलर्ट और क्रिएटिव
कई शोध भी ये बताते हैं कि वर्कप्लेस पर झपकी लेने से काम और बेहतर होता है. नेचर न्यूरोसाइंस में छपी एक रिसर्च के अनुसार नींद की कमी से होने वाली थकान से कई घंटों के काम पर असर होता है, वहीं लगभग आधे घंटे की नींद लेने परफॉर्मेंस सुधरता है. नैपर दूसरे कर्मचारियों की तुलना में ज्यादा अलर्ट और ज्यादा क्रिएटिव होते हैं. जर्मनी की सारलैंड यूनिवर्सिटी (Saarland University in Germany) की रिसर्च बताती है कि कैफीन लेने की बजाए नैप लेने पर याददाश्त और सीखने की क्षमता बढ़ती है.

इसी कड़ी में हार्वर्ड मेडिकल स्कूल और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया ने दफ्तरों में नींद लेने पर मिलकर एक रिसर्च किया. ये बताता है कि झपकी लेने पर मस्तिष्क का दाहिना हिस्सा यानी हाइट हेमिस्फेयर सक्रिय होता है. ये हिस्सा क्रिएटिव कामों से जुड़ा हुआ है. ऐसे में अगर काम पब्लिशिंग, एडविरटाइजिंग या किसी भी तरह से क्रिएटिविटी से जुड़ा हुआ है तो नैप रूम की जरूरत बढ़ जाती है.

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First published: August 24, 2019, 9:02 AM IST
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