भारत में आज ही के दिन भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने फेंका था असेंबली में बम

भगत सिंह (Bhagar Singh) और बटुकेश्वर दत्त ने योजनाबद्ध तरीके से असेंबली में बम फेंके थे. (फाइल फोटो)

भगत सिंह (Bhagar Singh) और बटुकेश्वर दत्त ने योजनाबद्ध तरीके से असेंबली में बम फेंके थे. (फाइल फोटो)

8 अप्रैल 1929 को ही भारतीय क्रांतिकारी भगत सिंह (Bhagat Singh) और बटुकेश्वर दत्त (Batukeshwar Dutt) ने दिल्ली की सेंट्रल असेंबली में बम फेंका था और आजादी (Freedom) के नारे लगाते हुए गिरफ्तारी दी थी.

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8 अप्रैल की तारीख भारत के स्वतंत्रता संग्राम (Indian Freedom Movement) के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण है. आज ही के दिन 29 अप्रैल को भारतीय क्रांतिकारियों भगत सिंह (Bhagat Singh)  और बटुकेश्वर दत्त (Batukeshwar Dutt) ने दुनिया के दिखा दिया था कि क्रांतिकारी देश के हिंसक अपराधी नहीं बल्कि बहरी ब्रिटिश हुकूमत को जगाने वाले आजादी के दीवाने थे दोनों क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत को ही हिलाकर नहीं रख दिया था  बल्कि हजारों युवाओं में आजादी की अलख भी जगा दी थी.

नहीं की भागने की कोशिश
इस कवायद की खास बात यह थी कि भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने एक नहीं दो बम फेंके थे लेकिन उन्होंने इस बात का खास ख्याल रखा कि कोई भी हताहत ना हो और ऐसा हुआ भी. बम फेंकने के बाद दोनों ने वहां से फरार होने की बिलकुल कोशिश नहीं की और वहां असेंबली में पर्चे फेंक कर लागातार आजादी के नारे लगाते रहे और अपनी गिरफ्तारी दी.

पर्चे फेंक कर दिया संदेश
बम फेंकने के बाद उन्होंने जो पर्चे फेंके उसका का पहला शब्द था 'नोटिस.' इसके बाद उनमें पहला वाक्य फ्रेंच शहीद अगस्त वैलां का था- बहरों को सुनाने के लिए विस्फोट के बहुत ऊंचे शब्द की आवश्यता होती है. लेकिन जो दोनों क्रांतिकारियों ने नारे लगाए उसमें सबसे प्रमुख था इंकलाब जिंदाबाद.



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यही वह सेंट्रल असेंबली है जहां भगत सिंह (Bhagat Singh) ने बम फेंका जो आज देश की संसद है.


दो विवादित बिल का विरोध
अंग्रेज सरकर दिल्ली की असेंबली में ‘पब्लिक सेफ्टी बिल’ और ‘ट्रेड डिस्प्यूट बिल’ जैसे दमनकारी कानूनों को पास कराकर लागू करने की तैयारी में थी.  'ट्रेड डिस्प्यूट बिल' पास किया जा चुका था जिसमें मजदूरों द्वारा की जाने वाली हर तरह की हड़ताल पर पाबंदी लगा दी गई थी, लेकिन 'पब्लिक सेफ्टी बिल' पर अध्यक्ष विट्ठलभाई पटेल को अपना फैसला सुनाना था. इस बिल में सरकार को संदिग्धों पर बिना मुकदमा चलाए उन्हें हिरासत में लेने का अधिकार दिया जाना था

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दोनों को पता था कि बिल रोका नहीं जा सकता
भगत सिंह और अन्य क्रांतिकारी जानते थे कि ये दोनों बिल पास ना हों ऐसा हो ही नहीं सकता. वे यह भी जानते थे कि उनके बम इन कानूनों को बनने से नहीं रोक पाएंगे. इसकी वजह यह थी कि नेशनल असेंबली में ब्रिटिश सरकार के समर्थकों की कमी नहीं थी. इसके अलावा वायसराय को कानून बनाने के असाधारण अधिकार मिले हुए थे.

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भगत सिंह (Bhagar Singh) ने खुद पर लगे आरोपों पर ऐसी दलील दी कि पूरा देश उनका मुरीद हो गया. (फाइल फोटो)


गिरफ्तारी के बाद
दरअसल बम फेंकने से लेकर गिरफ्तारी तक सब कुछ पूर्वनियोजित था. और पूरा घटनाक्रम योजना के मुताबिक ही पूरा हुआ. गिरफ्तारी से पहले अंग्रेजी सुरक्षा कर्मी दोनों क्रांतिकारियों के पास आने से डर रहे थे. लेकिन दोनों को पास कोई हथियार नहीं था. मजेदार बात यह है कि जब दोनों पर मुकदमा चला तो उस दौरान अंग्रेजों ने कुछ गवाह ऐसा पैदा करने का प्रयास किया जिनके मुताबिक गिरफ्तारी के समय भगत सिंह के पास पिस्तौल थी. इसका भगत सिंह पुरजोर खंडन भी किया था.

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फिर चला भगत सिंह का जादू
कई इतिहासकारों सहित बहुत से लोगों को मानना है कि जिस तरह से भगतसिंह ने अदालत में अपने आरोपों पर जिरह की. उससे देश भर में लोग उनके मुरीद हो गए. उन्होंने खुद पर लगे हर आरोपों पर सफाई दी और अदालत को अपने कार्य का उद्देश्य भी बताया. उन्होंने खुल कर समझाया की वे आम हिंसक अपराधियों से कितने अलग है और उनकी हिंसा किनके खिलाफ. उनकी इन्हीं दलीलों से देशभर में उनके और उनके क्रांतिकारियों के पक्ष में माहौल बना था.
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