लोकसभा चुनाव: जब जीतने वाले उम्मीदवार की भी जब्त हो गई थी जमानत

लोकसभा चुनाव: जब जीतने वाले उम्मीदवार की भी जब्त हो गई थी जमानत
प्रतीकात्मक तस्वीर

किसी भी प्रत्याशी को अपनी जमानत बचाने के लिए कुल पड़े वोटों का छठा हिस्सा पाना जरूरी होता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 11, 2019, 12:22 PM IST
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चुनावों में किसी उम्मीदवार के हारने के बाद उसकी जमानत जब्त होने की बात आपने सुनी होगी, लेकिन यह नहीं सुना होगा कि जीतने वाले उम्मीदवार की भी जमानत जब्त हो गई हो. लेकिन यह सच है. ऐसा हुआ था यूपी की हाईप्रोफाइल हो चुकी आजमगढ़ सीट पर. आजमगढ़ सीट से इस बार सपा प्रमुख अखिलेश यादव के सामने बीजेपी की तरफ से दिनेश लाल यादव निरहुआ खड़े हुए हैं. वहीं पिछली बार इस सीट पर मुलायम सिंह यादव चुनाव जीते थे.

आजमगढ़ की ही एक सीट है सगड़ी पूर्व. 1952 में आजमगढ़ की इस विधानसभा सीट पर यह घटना हुई थी. उस समय इस सीट पर 83,438 वोटर रजिस्टर्ड थे. इनमें से 32,378 वोटर्स ने वोट डाले थे.

इन चुनावों में कांग्रेस ने बलदेव उर्फ सत्यानंद को निर्दलीय उम्मीदवार शंभूनारायण पर जीत मिली थी. दोनों को क्रमश: 4969 और 4348 वोट मिले थे. बलदेव चुनाव तो जीत गए लेकिन उनकी जमानत जब्त हो गई. जमानत जब्त होने का कारण था, उन्हें नियम के हिसाब से कुल पड़े मतों के 1/6 वोट नहीं मिले थे.



क्या होती है जमानत?
उम्मीदवारों को चुनाव के लिए नामांकन कराते हुए एक तय राशि जमा करनी होती है. आम चुनावों के लिए आम उम्मीदवार को अब 25,000 रुपये और SC/ST उम्मीदवार के लिए 12,500 रुपये की जमानत राशि देनी होती है. वहीं विधानसभा चुनावों के लिए यह जमानत राशि बढ़ाकर आम उम्मीदवारों के लिए 10,000 रुपये और SC/ST उम्मीदवारों के लिए 5000 रुपये कर दी गई थी.

जितने वोटर किसी सीट पर पड़ते हैं अगर किसी उम्मीदवार को कुल वोटर्स के छठवें हिस्से के बराबर वोट नहीं मिलते हैं तो उसकी जमानत जब्त हो जाती है.

उस समय क्या हुई थी हालत?
जैसा की बताया गया इस सीट पर 32,378 मत पड़े थे. जिनका 1/6वां हिस्सा होता था, 5396. यानि जमानत के लिए किसी प्रत्याशी को 5396 मतों की जरूरत होती. लेकिन जीतने वाले प्रत्याशी बलदेव उर्फ सत्यानंद को 4969 मत मिले. यानी जमानत बचाने के लिए जरूरी मतों से 427 मत. लिहाजा उनकी जमानत जब्त हो गई.

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