मिलिट्री सेटेलाइट के मामले में चीन के सामने अभी बच्चा है भारत

स्पेस में भारत की ताकत लगातार बढ़ी है. भारत के सामने पाकिस्तान कुछ भी नहीं, लेकिन चीन के सामने भारत की क्या स्थिति है जानिए.

News18Hindi
Updated: April 1, 2019, 4:25 PM IST
मिलिट्री सेटेलाइट के मामले में चीन के सामने अभी बच्चा है भारत
स्पेस में भारत की ताकत लगातार बढ़ी है. भारत के सामने पाकिस्तान कुछ भी नहीं, लेकिन चीन के सामने भारत की क्या स्थिति है जानिए.
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Updated: April 1, 2019, 4:25 PM IST
भारत ने पोलर सैटेलाइट लॉन्‍च व्‍हीकल (PSLB) के मिशन के तहत एमीसेट उपग्रह लॉन्च करने की तैयारी में है. भारत की स्पेस में दिन-ब-दिन ताकत बढ़ती जा रही है. इस उपग्रह से भारत दुश्मनों के रडारों का भी अंदाजा लगा लेगा, साथ ही उनकी सही स्थिति का आकलन कर अपने मिशन को सफल बनाने के लिए रडारों को चकमा देने में भी सफल होगा. हालांकि इसके बावजूद चीन के सामने अभी कहीं ठहतरता.

भारत के पास मिलिट्री सेटेलाइट
भारत के पास कुल सात मिलिट्री सेटेलाइट है. इनमें GSAT 7A, GSAT 7 व माइक्रोसैट-आर (Microsat-R) सबसे नवीनतम हैं और आसमान से भारतीय सेना के लिए कई तरह की जानकारियां भेजती हैं.PSLV-38

भारतीय वायुसेना अतंरिक्ष में प्रभावशाली ऑपरेशन को अंजाम दे सकती हैं, बिना किसी को खबर लगे योजनाबद्ध तरीके से हमला कर सकती हैं. यह बात अब किसी से छिपी नहीं है. पर इसमें एक बेहद अहम भूमिका भारतीय अंतरिक्ष शोध संस्‍थान (ISRO) की रही है है. ISRO पाकिस्तान के करीब 87 फीसदी इलाकों के चप्पे-चप्पे की हाई-डेफिनेशन (HD) क्वालिटी की तस्वीरें व विजुअल इंडियन एयरफोर्स को मुहैय्या कर रहा है.

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अब ISRO की सेटेलाइट इतनी उन्नत हैं कि अंतरिक्ष से ही वह पाकिस्तान पर बाज जैसी नजर बनाए हुए है. जानकारी के अनुसार भारतीय सेटेलाइट पाकिस्तान के कुल करीब 8.8 लाख स्‍क्वॉयर मीटर क्षेत्र में से करीबन 7.7 लाख स्‍क्वॉयर मीटर की लगातार मैपिंग कर रहे हैं. साथ ही भारतीय सेना के आला अधिकारियों को लगातार 0.65 मीटर ऊपर से लिए गए एचडी तस्वीरों से रूबरू करा रहा है.

इतना ही इसरो के विश्वस्त सूत्रों के अनुसार भारत के करीब 14 पड़ोसी देशों के 55 लाख स्क्वॉयर मीटर क्षेत्र भारतीय सेटेलाइट्स के कैमरों की जद में है. हालांकि चीन से संबंधित आंकड़े तत्काल मुहैय्या नहीं हो पाते. क्योंकि चीनी क्षेत्र की जानकारियां केवल कुछ खास भारतीय सेटेलाइट ही दे पाती हैं. उसके द्वारा दी गई जानकारियों के बारे में बात करने पर इसरो के लोग कतराते हैं. सूत्र भी इस पर विश्वास योग्य जानकारियां नहीं दे पाते.
पाकिस्तान के पास मिलिट्री सेटेलाइट
पाकिस्तान के पास एक ही मिलिट्री सेटेलाइट है. पाकिस्तान रिमोट सेंसिंग सेटेलाइट (PRSS-1). इसे पाकिस्तान ने पिछले ही साल 9 जुलाई को लॉन्च किया था. इसमें चीन ने पाकिस्तान की मदद की थी. यह चीन की चीन जियुकुआन सेटेलाइट सेंटर से लॉन्च की गई ‌थी. जानकारी के अनुसार पाकिस्तान इसके पीछे दो उद्देश्य बताता है.isro-satellite

चीन के पास मिलिट्री सेटेलाइट
चीन ने कुल 68 मिलिट्री सेटेलाइट हैं. इनमें 36 मिलिट्री सेटेलाइट याओगन सिरीज अंतरिक्ष में भेजे हुए हैं. चीन की याओगन सिरीज की सेटेलाइट ही उनकी प्रमुख मिलिट्री के लिए अंतरिक्ष से सुरक्षा करती हैं. चीन इसी सिरीज की अब कुल 36 सेटेलाइट अंत‌रिक्ष में भेजी हैं. इसमें सबसे आधुनिक और नीवनतम याओगन 32A, 32B सेटेलाइट है. इसे चीन ने 9 अक्टूबर, 2018 को भेजी थी. इसके अलावा चीन ने एफएसडब्‍ल्यू सिरीज, बीडी सिरीज, एसटी सिरीज की सेटेलाइट भेज रखी है.

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चीन की ओर से अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले सेटाइलटों के प्रमु ख नौ प्रकार हैं. चीन ने संचार, तेजी से चेतावनी, अंतरिक्ष विज्ञान, नेविगेशन, समुद्रों की पड़ताल, जांच-पड़ताल और ऑप्टिकल, रडार आदि के लिए हैं. कुछ और सेटेलाइट जिनकी पहचान नहीं हो पाई है.

हालांकि इसके अलावा भारत के किसी पड़ोसी देश के पास मिलिट्री सेटेलाइट नहीं है. बांग्लादेश, भुटान, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार ये सभी देश यह सुविधा जरूरत पड़ने से अपने मित्र देशों की सेटेलाइट से सुविधाएं मांगते हैं. लेकिन बात पश्चिमी देशों की करें तो वे भारत से इस मामले में काफी आगे हैं.

यूं तो विश्वपटल पर अपने देश के मिलिट्री के लिए अंतरिक्ष में सेटेलाइट भेजने के मामले में भारत छठे स्‍थान पर है. लेकिन पहले स्‍थान पर काबिल यूनाइटेड स्टेट (कुल 123 मिल‌िट्री सेटेलाइट) के सामने भारत (7 मिल‌िट्री सेटेलाइट) अभी काफी पीछे है. एक नजर विश्व के उन प्रमुख देशों की जिन्होंने अपनी मिल‌िट्री के लिए सेटेलाइट पर काम कर रहे हैं. 

  • यूनाइटेड स्टेट, 123 मिलिट्री सेटेलाइट

  • रूस, 74 मिलिट्रीसेटेलाइट

  • चीन, 68 मिलिट्री सेटेलाइट

  • फ्रांस, 8 मिलिट्री सेटेलाइट

  • इजरायल, 8 मिलिट्री सेटेलाइट

  • इंडिया, 7 मिलिट्री सेटेलाइट

  • यूनाइटेड किंगडम, 7 मिलिट्री सेटेलाइट

  • जर्मनी, 7 मिलिट्री सेटेलाइट

  • इटली, 6 मिलिट्री सेटेलाइट

  • जापान, 4 मिलिट्री सेटेलाइट

  • टर्की 2, मिलिट्री सेटेलाइट

  • संयुक्त अरब अमीरात, 2 मिलिट्री सेटेलाइट

  • स्पेन, 2 मिलिट्री सेटेलाइट

  • कनाडा, 1 मिलिट्री सेटेलाइट

  • अल्जारिया, 1 मिलिट्री सेटेलाइट

  • मैक्सिको, 1 मिलिट्री सेटेलाइट

  • ऑस्ट्रेलिया, 1 मिलिट्री सेटेलाइट

  • चीली, 1 मिलिट्री सेटेलाइट

  • पाकिस्तान, 1 मिलिट्री सेटेलाइट


अमेरिका और रूस के मिलिट्री सेटेलाइट करते हैं अंतरिक्ष में राज
स्पेस में सबसे ज्यादा ताकतवर सेटेलाइट अमेरिका और रूस के हैं. अमेरिका के मिलिट्री सेटेलाइट के पहले प्रोजेक्ट का नाम वेपन सिस्टम 117एल था. इसके बाद कोरोना, कैन्योन, एक्वाकेड, ओरिओन, मैगनम और ट्रंपेट जैसे बड़े मिलिट्री सेटेलाइट प्रोजेक्ट लॉन्च किए. यूएस की नवीनतम सेटेलाइट प्रोजेक्ट वाइडबैंड ग्लोबल SATCOM (WGS-9) है. यह अंतरिक्ष में युद्ध करने की क्षमता भी रखता है. इससे संपर्क कर के मिसाइलें भी छोड़ी जा सकती हैं. जरूरत पड़ने पर यह अंतरिक्ष में दुश्मन सेटेलाइट को ध्वस्त भी कर सकती है.

(सांकेतिक तस्वीर)


इसी तरह रूस ने सोवियत संघ के साथ मिलकर 1960 के दशक में ही अपनी अपनी मिल‌िट्री के लिए स्पेस में एक स्टेशन बनाने की प्रकिया शुरू कर दी थी. इनके पहले प्रोजेक्ट का नाम अल्माज था. साल 1973 से 1976 के बीच रूस ने अंतरिक्ष में सैल्यूट 2,3 और 5 नाम से मिलिट्री के लिए खास स्पेस स्टेशन स्‍थापित कर दिए थे. रूस की हालिया सेटेलाइट कस्मोस 2524 व अन्य इतनी ताकतवर हैं कि यह देश को मिसाइल के द्वारा होने वाले हमलों के बारे में समय रहते सूचित कर देती है.

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क्या होती है मिलिट्री सेटेलाइट, पहला मिलिट्री सेटेलाइट कहां आया?
मिलिट्री सेटेलाइट आमतौर पर आर्टिफीशियल सेटेलाइट की तरह होती हैं, लेकिन इसका इस्तेमाल खासतौर मिलिट्री के लिए किया जाता है. किसी भी सैन्य मिशन में सबसे अहम भूमिका खुफिया जानकारी, नेविगेशन और सैन्य संचार का होता है. अब ये सभी काम सीधे सेटेलाइट के जरिए किए जाते हैं. पर लगातार ऐसा देखा जाता था कि दूसरे कामों के लिए भेजे गए सेटेलाइट सेना की जरूरतों पर खरे नहीं उतरते ‌थे. इसलिए दुनियाभर की सरकारों ने अपने सेनाओं के लिए खासतौर सेटेलाइट भेजने का दौर चला.

इसके अलावा सेटेलाइट का एक अहम इस्तेमाल खूफिया निगरानी के लिए किया जाता है. मिल‌िट्री सेटेलाइट आमतौर पर पड़ोसी व अन्य परस्पर देशों व जिनसे खतरा होता है उनके रक्षा उपकरणों व मिलिट्री कैंपों पर नजर लगाए रहते हैं.

इसमें सबसे नये तरीके के सेटेलाइट पूर्व-चेतावनी (early warning) देने वाले होते हैं. यह दुश्मन देश में युद्ध की तैयारियों की जानकारी उपलब्‍ध करा देते हैं. हालांकि अमेरिका इस मामले में 1960 से ही सक्रिय हो गया था. अमेरिका ने 1950 के दशक में ही अपने नेवी को नेविगेशन की सुविधा देने के लिए पहला सेटेलाइट लॉन्च कर दिया था. पिछले साल आई एक रिपोर्ट के मुताबिक अंतरिक्ष में अभी तक 320 मिल‌िट्री सेटेलाइट भेज जा चुके हैं. चीन भी इसी रास्ते को इख्तियार करते हुए याओगन सिरीज की 30डी, 30ई और 30एफ को इतना ताकतवर बना दिया है कि यह दुश्मनों के ठिकानों की महीन जानकारियां भी जुटा लेती हैं.
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