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नौसेना दिवस: जब इंदिरा गांधी ने कहा था- इफ देअर इज वॉर, देअर इज वॉर

News18Hindi
Updated: December 4, 2019, 9:37 AM IST
नौसेना दिवस: जब इंदिरा गांधी ने कहा था- इफ देअर इज वॉर, देअर इज वॉर
4 दिसंबर 1971 को भारतीय नौसेना ने कराची बंदरगाह पर हमला बोला था

1971 में भारत पाकिस्तान (India Pakistan) के बीच तनाव चरम पर था. इसी दौरान अक्टूबर 1971 में भारतीय नौसेना (Indian Navy) के तत्कालीन अध्यक्ष एडमिरल एसएम नंदा ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) से मुलाकात की.

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  • Last Updated: December 4, 2019, 9:37 AM IST
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आज नौसेना दिवस (Navy Day) है. आज के दिन हर साल नौसेना के वीर जवानों को याद करते हुए नौसेना दिवस मनाया जाता है. भारतीय नौसेना (Indian Navy) समुद्री सीमा की रक्षा करते हुए अपनी जान न्यौछावर करने वाले वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देती है.

नौसेना दिवस मनाने की शुरुआत 1971 के बाद से पड़ी. जब भारत ने पाकिस्तान के साथ युद्ध में विजय पाई. इसके बाद इस जीत का जश्न मनाने के लिए हर साल 4 दिसंबर को नौसेना दिवस मनाने की शुरुआत हुई. 1971 के भारत पाक युद्ध में भारत ने ऑपरेशन ट्राइडेंट चलाया था. भारत ने 4 दिसंबर को पाकिस्तान के कराची में उसके नेवल हेडक्वॉर्टर पर हमला बोला था.

इस हमले में पहली बार एंटी शिप मिसाइल का प्रयोग हुआ था. भारतीय नौसेना ने कराची के बंदरगाह को तबाह कर दिया था. कराची बंदरगाह पर इतनी भयावह आग लगी थी कि वो लगातार 7 दिनों तक जलती रही थी. ऑपरेशन ट्राइडेंट के जरिए भारतीय नौसेना के जवानों ने अदम्य साहस का परिचय दिया था. इसी को याद करते हुए हर साल 4 दिसंबर को नौसेना दिवस मनाया जाता है.

जब नौसेना अध्यक्ष ने मांगी कराची पर हमले की इजाजत

1971 में भारत पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर था. इसी दौरान अक्टूबर 1971 में भारतीय नौसेना के तत्कालीन अध्यक्ष एडमिरल एसएम नंदा ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मुलाकात की. नौसेना अध्यक्ष प्रधानमंत्री को नौसेना की तैयारियों के बारे में जानकारी देने गए थे. ये भारत पाकिस्तान युद्ध के 2 महीने पहले की बात है.

indian navy day india pakistan war operation trident 1971 karachi port destroyed
हर साल 4 दिसंबर को नौसेना दिवस मनाया जाता है


इसी दौरान एडमिरल एसएम नंदा ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से पूछा कि क्या भारतीय नौसेना कराची पर हमला कर सकती है? इससे सरकार को राजनीतिक तौर पर कोई आपत्ति तो नहीं होगी? इंदिरा गांधी ने हां या ना में जवाब नहीं दिया. उलटे एसएम नंदा से पूछा कि वो ऐसा क्यों पूछ रहे हैं.
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जवाब में नंदा बोले कि 1965 की लड़ाई में नौसेना को खास तौर पर निर्देश दिया गया था कि वो भारतीय समुद्री सीमा के बाहर कोई कार्रवाई नहीं करे. ऐसा करने पर मुश्किल स्थिति पैदा हो सकती है. एडमिरल एसएम नंदा के इस जवाब पर इंदिरा गांधी थोड़ी देर के लिए सोच में पड़ गईं. कुछ देर बाद वो बोलीं कि- वेल एडमिरल, इफ देयर इज अ वॉर, देअर इज अ वॉर. मतलब अगर लड़ाई है तो लड़ाई है. इसपर एडमिरल नंदा मुस्कुराते हुए बोले कि मैडम मेरा जवाब मुझे मिल गया.

भारतीय नौसेना ने बनाई थी कराची हमले की पुख्ता योजना

इसी के बाद भारतीय नौसेना ने कराची के बंदरगाह पर हमले की योजना बनाई. 1 दिसंबर को भारतीय नौसेना ने अपने सभी बंदरगाहों को कराची बंदरगाह पर हमले की योजना के बारे में जानकारी दे दी. ये जानकारी सीलबंद लिफाफे में दी गई थी. इसके साथ ही निर्देश दिया गया था कि युद्ध शुरू होने के बाद ही सीलबंद लिफाफे को खोला जाए. 2 दिसंबर को भारतीय नौसेना का पूरा वेस्टर्न फ्लीट मुंबई से कराची के लिए कूच कर गया.

भारतीय नौसेना की योजना थी कि सेना अंधेरा होने के बाद कराची बंदरगाह पर हमला करेगी और सुबह होने से पहले ऑपरेशन को अंजाम देकर वापस लौट आएगी. भारतीय नौसेना ने पाकिस्तान की कार्रवाई से कम से कम नुकसान होने की योजना बनाई थी.

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भारतीय सेना ने 1971 के युद्ध में पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी थी


भारतीय नौसेना ने इस ऑपरेशन में 3 मिसाइल बोट, 2 एंटी सबमरीन और एक टैंकर का इस्तेमाल किया. भारतीय सेना ने समझबूझ कर रात में हमले की योजना बनाई थी. पाकिस्तान के पास रात में हमला करने वाले विमान नहीं थे. इसलिए पाकिस्तानी सेना चाहकर भी कुछ नहीं कर पाई. भारतीय नौसेना का ऑपरेशन ट्राइडेंट कामयाब रहा.

सेना ने कराची बंदरगाह को तबाह कर दिया. इस हमले में भारतीय सेना का एक भी जवान शहीद नहीं हुआ. जबकि पाकिस्तानी नौसेना के 5 सैनिक मारे गए और करीब 700 से अधिक जख्मी हुए. कराची बंदरगाह पर हुए हमले में इतनी भयावह आग लगी और इतना धुंआ उठा कि वहां तीन दिनों तक सूरज की रोशनी नहीं पहुंच सकी.

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First published: December 4, 2019, 9:37 AM IST
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