भारत के वो प्रधानमंत्री, जिनके धर्माचार्यों से थे अच्छे रिश्ते और तीर्थयात्राओं से लगाव

भारत के वो प्रधानमंत्री, जिनके धर्माचार्यों से थे अच्छे रिश्ते और तीर्थयात्राओं से लगाव
नरसिंह राव के कार्यकाल में धर्मगुरू और ज्योतिषी भी उनके संपर्क के कारण चर्चा में रहे. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

भारतीय प्रधानमंत्रियों में नरसिंह राव (PV Narsimha Rao) ही सबसे ज्यादा धार्मिक (Religious) थे. उन्हें धर्मगुरुओं, ज्योतिषियों और तीर्थयात्राओं से विशेष लगाव था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 5, 2020, 3:29 PM IST
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आज रामजन्मभूमि (Ram Janmabhoomi) पर राम मंदिर (Ram Mandir) के निर्माण कार्य के लिए भूमिपूजन हो रहा है. इस मौके पर रामजन्मभूमि विवाद से जुड़े लोग और घटनाएं लोगों को याद आ रही हैं. इसमें एक प्रमुख नाम यह भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय नरसिंह राव (P. V. Narasimha Rao) का. यह राव का ही कार्यकाल था जब बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) टूटी थी और रामजन्म जन्मभूमि विवाद तब से हमेशा ही सुर्खियों में रहा. माना जाता है कि राव भारत के एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री थे, जो सबसे ज्यादा धार्मिक यात्रा किया करते थे, उनके शंकराचार्य और अन्य धार्मिक गुरूओं से भी खासा मिलना जुलना था.

अपने धर्म के प्रति झुकाव
ब्राह्मण परिवार में जन्में नरसिंह राव के पूरे जीवन में निजी पूजा पाठ कभी नहीं छूटा. उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत हैदराबाद के निज़ाम के ख़िलाफ़ संघर्ष से शुरू हुई थी जहाँ उन्होंने हिंदू महासभा और आर्यसमाज के साथ कंधे से कंधा मिला कर काम किया था. उनका पूरा जीवन सुबह की पूजा और वार्षिक तीर्थयात्रा के घूमता था.

ज्योतिषियों स्वामियों से नजदीकी
राव की शंकराचार्य सहित कई स्वामियों से नजदीकियां थीं. एनके शर्मा जैसे ज्योतिषी और चंद्रास्वामी जैसे कई तांत्रिक से उनका संपर्क रहा करता था. लेकिन राव का धार्मिक प्रेम को लेकर बाबरी मस्जिद ध्वंस मामले से संबंधित ज्यादा चर्चा में रहता है. यहां तक कहा जाता है कि जब बाबरी मस्जिद ध्वंस हुआ था तब वे पूजा कर रहे थे, लेकिन यह गलत है, कई सूत्रों से स्पष्ट होता है कि राव उस समय पूरे मामले की पल-पल की खबर रहे थे.



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एक कुशल राजनीतिज्ञ
राव एक धार्मिक व्यक्ति जरूर थे, लेकिन उससे कहीं ज्यादा वे चतुर कूटनीतिज्ञ और अंतरराष्ट्रीय मामले के विशेषज्ञ थे. वे राजीव गांधी और इंदिरा गांधी के कार्यकाल में विदेश मंत्री रहे थे. उन्होंने देश का रक्षा मंत्री और गृह मंत्री का भी पदभार संभाला था.

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तो क्या वाकई मस्जिद ढहाने दी राव ने
बहुत से लोगों को मानना है कि राव ने ऐसा होने दिया था. कुछ लोग उनपर संघ का साथ देने के आरोप लगाते हैं तो कुछ का कहना है कि उन्होंने ऐसा इसलिये किया जिससे के लोग भाजपा से दूर हो जाएं और उन्हें हिंदुओं की सहानुभूति भी मिल जाए. राव ने पूरे मामले में इतना जरूर कहा कि उन्होंने उस समय जो कदम उठाए सोच समझ कर उठाए. लेकिन पूरे मामले में उनकी सीधी भूमिका की कभी भी किसी भी तरह से पुष्टि नहीं हुई. बल्कि इसके संकेत तक नहीं मिले.

PV Narsimha Rao
राव हर साल तीर्थयात्रा करते थे, लेकिन उन्होंंने कभी उन्हें चर्चा में नहीं आने दिया.


धर्मगुरूओं से लगाव
राव का धर्म, और ज्योतिष प्रेम किसी से नहीं छिपा है. कहा जाता है कि तांत्रिक चंद्रास्वामी पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के आध्यात्मिक गुरू थे. 1991 में जब पीवी नरसिम्हा राव देश के प्रधानमंत्री बने तो उसके तत्काल बाद चंद्रास्वामी ने दिल्ली में एक आश्रम बनाया. इतना ही नहीं कहा जाता है कि इस आश्रम की जमीन इंदिरा गांधी ने दी थी. राव चंद्रास्वामी के अलावा पुरी के शकंराचार्य के भी संपर्क में रहे थे और उन्होंने राम जन्मभूमि विवाद पर उनसे मदद मांगने की भी भरपूर कोशिश की थी, लेकिन शंकराचार्य साफ इनकार करते रहे.

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तीर्थ यात्राएं भी
इसके अलावा वे हर साल कई जगह तीर्थ यात्रा पर भी जाते रहते थे. यह सिलसिला उनके प्रधानमंत्री काल खत्म होने के बाद भी कई सालों तक जारी रहा, लेकिन राव ने अपनी तीर्थ यात्राओं को कभी चर्चा में आने नहीं दिया.इन यात्राओं के दौरान ही वे कई ज्योतिषियों से भी मिला करते थे.
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