जानिए, सैटेलाइट से आप कैसे पा सकेंगे ट्रेनों की सटीक जानकारी

जानिए, सैटेलाइट से आप कैसे पा सकेंगे ट्रेनों की सटीक जानकारी
भारतीय रेलवे बोर्ड ने कहा है कि वो अब देश की ट्रेनों को सैटेलाइट के जरिए ट्रैक करेगा

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रेल यात्री अब अपनी ट्रेनों की स्थिति आसानी से पता कर सकेंगे. असल में भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने ट्रेन इंजन को इसरो की सैटेलाइट (ISRO satellite) से जोड़ दिया है. सीधा सैटेलाइट से जुड़ा होने के कारण ट्रेनों को ट्रैक करना, उसके आने-जाने का समय पता लगाना काफी आसान हो गया है. साथ ही इससे पक्की जानकारी भी मिलेगी. वैसे रेल को सैटेलाइट से जोड़ने की पहल दूसरे कई देश भी कर चुके हैं. जानिए, किस तरह से सैटेलाइट तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है.

हमारे यहां ये कैसे काम करेगा
रेलवे ने इसरो यानी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) के साथ सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं जिसके तहत ट्रेनों की सैटेलाइट द्वारा निगरानी की जा सकेगी. इसरो का गगन ट्रेन ट्रैकिंग करेगा. ये GPS एडेड GEO ऑगमेंटेड सिस्टम है. शुरुआत में इसे वायु क्षेत्र के लिए डेवलप किया गया था, लेकिन अब यह हर 30 सेकेंड में ट्रेन की स्पीड और लोकेशन की जानकारी शेयर करता है. गगन जियो पोजिशनिंग सिस्टम से इंजन को जोड़ा जाने पर ट्रेन की गति और पोजिशन की एकदम पक्की जानकारी मिलती है.





माना जा रहा है कि दिसंबर 2021 तक पूरे माल और यात्री रेल परिचालन को ISRO की मदद से उपग्रह के माध्यम से ट्रैक किया जा सकेगा.

भारतीय रेलवे ने ट्रेन इंजन को इसरो की सैटेलाइट से जोड़ दिया है- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


ऐसे होगा संचालन
गगन (GPS Aided GEO Augmented Navigation) है, जिसे भारतीय रेलवे के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है. इसरो से जुड़ा ये सिस्टम ट्रेन रनिंग डाटा को बताएगा. इसके लिए एक डिवाइस को रेल इंजन से जोड़ा जाएगा. ये दो हिस्सों में होगा, पहला हिस्सा ट्रेन के भीतर होगा ताकि किसी इमरजेंसी में लोको पायलेट या ड्राइवर इसे दबा सके. इससे सीधे कंट्रोल रूम से कनेक्ट हुआ जा सकेगा. डिवाइस का दूसरा हिस्सा इंजन के बाहर लगा होगा. गगन की मदद से यात्रियों को काफी सुविधा हो जाएगी क्योंकि ये 30 सेकंड पर ट्रेन की स्थित अपडेट करेगा. यहां तक कि अगर ट्रेन को कहीं अनशेड्यूल्ड तरीके से रुकना पड़े तो भी यात्री इसकी जानकारी पा सकेंगे.

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विदेशों में भी सैटेलाइट से रेलवे जुड़ा हुआ
स्पेन भी अपने यहां ये प्रयोग कर चुका है. यूरोपियन स्पेस एजेंसी की तर्ज पर उसने अपने यहां रेलवे को तकनीक से लैस किया. सिस्टम को Elecnor Deimos नाम की कंपनी के इंजीनियरों ने डेवलप किया. ये वही कंपनी है, जो यूरोपियन स्पेस एजेंसी पर भी काम कर चुकी है. इसी के साथ साल 2013 में ही स्पेन के सारे 400 से ज्यादा रेलवे स्टेशन सैटेलाइट पर काम कर रहे हैं.

दिसंबर 2021 तक, पूरे माल और यात्री रेल परिचालन को ISRO की मदद से उपग्रह के माध्यम से ट्रैक किया जा सकेगा


कैसे काम करता है वहां सैटेलाइट सिस्टम
ये यूरोपियन स्पेस एजेंसी के Envisat (Environmental Satellite) पर आधारित है. इस बारे में ईएसए की एक रिपोर्ट में Deimos कंपनी के डायरेक्टर कार्लोस फर्नांडीज कहते हैं कि रेलवे पर नजर रखने के लिए ऐसे सिस्टम की जरूरत थी, जो मजबूत हो, विश्वसनीय हो और चौबीसों घंटे काम कर सके. खासकर जब बात सैटेलाइट की आए तो गलती की कोई जगह नहीं होती है. इसके लिए वैज्ञानिकों ने इसी तरह का सैटेलाइट सिस्टम तैयार किया और उसे नॉन-स्पेस फील्ड से जोड़ दिया. साथ ही कहीं कोई गलती न हो, इसके लिए सैटेलाइट के लोग अदिफ (Adif) से भी संपर्क में रहते हैं. बता दें कि अदिफ वो कंपनी है, जो स्पेन में रेलवे के इंफ्रा और ट्रैफिक पर नजर रखती है.

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दी गईं ये सुविधाएं
अदिफ में बैठे लोगों के लिए उस तरह का कंप्यूटर सिस्टम बनाया गया, जो स्पेस के मॉनिटरिंग और कंट्रोल सिस्टम की तरह होता है. पहली चीज जो की गई, वो थी रियल टाइम में रेलवे ट्रैफिक की जानकारी देना. इसके बाद बाकी सारी जानकारियां थीं, जैसे क्या ट्रेन देर से आएगी. क्या ट्रेन रुकी हुई है. किस प्लेटफॉर्म पर ट्रेन रुकने वाली है या फिर क्या जहां ट्रेन आएगी, उस स्टेशन में किसी भी तरह की समस्या है. इस तरह की सारी बेसिक जानकारी, जो यात्री चाहते हैं, दी जाने लगी.

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इस काम में कई चुनौतियां भी आईं, जैसे रियल टाइम में आ रहे ढेर सारे डाटा में से उन्हें अलग करना, जो काम के हैं. इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ही काम आ सकता था, इसलिए वही किया गया. इस तरह का सॉफ्टवेयर बनाया गया, जो रियल टाइम डाटा को प्रोसेस कर सके. स्पेन के सैकड़ों रेलवे स्टेशनों में ये काम आ रहा है.
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