'एनाकोंडा' के बाद भारतीय रेल ने अब चलाई सबसे लंबी ट्रेन 'शेषनाग'

'एनाकोंडा' के बाद भारतीय रेल ने अब चलाई सबसे लंबी ट्रेन 'शेषनाग'
देश की अब तक की सबसे लंबी शेषनाग ट्रेन

भारतीय रेल (Indian Railways) ने पिछले महीने की आखिर में ही सुपर एनाकोंडा (Super Anaconda) नाम की सबसे लंबी ट्रेन चलाई थी, लेकिन अब उसने उससे भी लंबी शेषनाग (Sheshnaag) नाम की ट्रेन चलाई है.

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ऐसा लगता है कि भारतीय रेल (Indian Railways) इन दिनों लंबी ट्रेन के नए-नए रिकॉर्ड बनाने की धुन में है. हाल ही में उसने दो किलोमीटर लंबी सुपर एनाकोंडा (Super Anaconda) ट्रेन चलाई थी. अब उसने अपने ही इस रिकॉर्ड को तोड़ दिया है और 2.8 किलोमीटर लंबी शेषनाग (Sheshnaag) नाम की ट्रेन चलायी है.

अब तक की सबसे लंबी ट्रेन
रेलवे ने गुरुवार को शेषनाग नाम की यह 2.8 किमी लंबी ट्रेन चलाई है जिसमें चार मालगाड़ी ट्रेन के खाली डिब्बे लगे गए थे. इसके लिए चार इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव सेट का उपयोग किया गया. शेषनाग भारतीय रेल द्वारा अब तक चलाई गई सबसे लंबी ट्रेन है. इसमें कुल नौ इंजन और चार गार्ड वैन लगी हैं. दक्षिण पूर्व सेंट्रल रेलवे (SECR) की इस ट्रेन में 251 डिब्बे हैं.

इससे पहले सुपरएनाकोंडा सफलतापूर्वक चला चुकी है भारतीय रेल
गौरतलब है कि इससे पहले रेलवे ने सुपर एनाकोंडा नाम की ट्रेन चलाई थी. जो 2 किलोमीटर लंबी थी. इस ट्रेन में 177 डिब्बे लगाए गए थे और इसके लिए तीन लोकोमोटिव का उपयोग किया गया था जिसमें से एक लोकोमोटिव बीच में लगाया था.



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पूरी क्षमता से ट्रेनें नहीं चल रही हैं भारत में
इस समय भारतीय रेल अपनी सारी ट्रेन नहीं चला रहा है. कोरोना वायरस के कारण ज्यादातर यात्री गाड़ियां रद्द हैं और इसी वजह से कई रूट व्यस्त रूट की श्रेणी से हट गए हैं. शेषनाग और एनाकोंडा ट्रेन चलाने में सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि उन्हें बीच में किसी दूसरी ट्रेन को क्रॉस करवाने के लिए रोका नहीं जा सकता है क्योंकि रास्ते में कोई भी लूप या प्लेटफार्म की ओर का ट्रैक इन ट्रेनों से लंबा नहीं होता है. व्यस्त यात्री गाड़ियों वाले रूट पर इस तरह की ट्रेन नहीं चलाई जा सकती है.



लॉकडाउन का मौके तौर पर इस्तेमाल
इन दिनों भारतीय रेल इस तरह के लंबी ट्रेनों को चलाने की कोशिश कर रही है. इससे न केवल वह इन ट्रेनों की क्षमता का परीक्षण कर पा रही है, बल्कि वह उन ट्रैक का भी परीक्षण कर पा रही है जिन पर ये गाड़ियां चल रही है. किसी ट्रेन के परीक्षण में इंजन का ही नहीं बल्कि उस ट्रैक भी परीक्षण जरूरी है जिस पर उसे चलना होता है. इसके अलावा भारतीय रेल एक साथ कई मालगाड़ियों को मिलाकर चलाने से बड़ी बचत भी कर रही है.

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सुपर एनाकोंडा ट्रेन पहली बार इलेक्ट्रिक ट्रैक पर चलाई गई है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


और एक उपलब्धि यह भी रही भारतीय रेल के नाम
भारतीय रेल के इतिहास में पहली बार ऐसा कोई दिन आया है जिसमें सारी की सारी ट्रेनें अपने गंतव्य स्थान पर समय पर पहुंच गई हैं. 1 जुलाई को भारतीय रेल की सभी ट्रेनें अपने गंतव्य पर समय पर पहुंचीं और यह उपलब्धि हासिल की. इससे पहले का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 99.54 प्रतिशत था जो रेलवे ने पिछले महीने की 23 तारीख को हासिल किया था इस दिन केवल एक ही ट्रेन अपने गंतव्य पर देर से पहुंची थी.

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भारतीय रेल इस समय एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है. इसकी कुल ट्रैक लंबाई 115,000 किमी है. भारतीय रेल में 7,421 मालगाड़ियां चलती हैं जो 30 लाख टन माल रोज ढोती हैं. इसके पास 239,281 मालगाड़ी के डिब्बे, 59,713 यात्री डिब्बे और 9,549 लोकोमोटिव्स हैं. यह 12,617 यात्री गाड़ियां चलाती है जिसमें 2.3 करोड़ यात्री रोजाना सफर करते हैं.
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