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ये हैं भारतीय राजनीति में शाही परिवार के कुछ असरदार चेहरे

ज्योतिरादित्य ने कांग्रेस छोड़ बीजेपी की सदस्यता ले ली

ज्योतिरादित्य ने कांग्रेस छोड़ बीजेपी की सदस्यता ले ली

देश की सियासत (Indian politics) में कई नाम ऐसे भी हैं, जिनका ताल्लुक शाही घरानों (royal families) से है.

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    देश की राजनीति में कई परिवार काफी रसूखदार माने जाते रहे हैं. कई ऐसे घराने हैं जिनका दबदबा राजनीति में पीढ़ी-दर-पीढ़ी चला आ रहा है. जानते हैं ऐसे ही कुछ परिवारों के बारे में.

    इनमें सबसे पहले जिक्र आता है ग्वालियर के सिंधिया खानदान (Scindia dynasty) का. गत 6 दशकों से देश की राजनीति में इनका वर्चस्व रहा है. इस राजघराने में सबसे पहले राजमाना विजयाराजे सिंधिया ने राजनीति की शुरुआत की थी. साल 1957 में राजमाता ने गुना से लोकसभा सीट जीती थी, इसके बाद से राजनीति में भी इस शाही इस परिवार का दबदबा कायम होने लगा. राजमाता की संतानों में से एक बेटी राजस्थान की सीएम भी रह चुकी हैं. साल 2001 में पिता माधव राव सिंधिया की मौत के बाद उनके पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने कांग्रेस का काम संभाला. अगले ही साल वे गुना के सांसद चुने गए और 2019 से पहले लगातार जीतते रहे. आज 11 मार्च को ज्योतिरादित्य ने कांग्रेस छोड़ बीजेपी की सदस्यता ले ली है.

    महाराजा परिवार के कैप्टन अमरिंदर सिंह को राजनीति का कद्दावर नेता माना जाता है. साल 1942 को पटियाला राजघराने में जन्म लेने वाले कैप्‍टन अमरिंदर सिंह ने साल 1980 में पहला लोकसभा चुनाव लड़ा और जीते. 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के विरोध में उन्होंने लोकसभा और कांग्रेस दोनों की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया.  और शिरोमणि अकाली दल से जुड़ गए. 1992 में उनका अकाली दल से मोहभंग हुआ और उन्होंने शिरोमणि अकाली दल (पी) के नाम से नई पार्टी बना ली, बाद में इसे कांग्रेस से मर्ज कर दिया गया. वर्तमान में कैप्टन सिंह पंजाब के सीएम हैं. इससे पहले भी साल 2002 से 2007 के बीच वे पंजाब के मुख्यमंत्री रह चुके हैं.

    कैप्टन अमरिंदर सिंह को राजनीति का कद्दावर नेता माना जाता है


    जयपुर राजपरिवार का भी सियासत से गहरा नाता रहा है. जयपुर महाराज ब्रिगेडियर भवानी सिंह की बेटी दिया कुमारी भाजपा से स्टेट असेंबली प्रतिनिधि हैं. उनके पिता भवानी सिंह ने भी कांग्रेस की टिकट पर साल 1989 में लोकसभा चुनाव लड़ा था लेकिन हार गए थे. दिया राजमाता गायत्री देवी की पोती हैं और राजनीति में उन्हीं का आकर्षण और रौब लेकर आई हैं.

    अपनी तीखी टीका-टिप्पणियों के लिए मशहूर दिग्विजय सिंह का ताल्लुक भी शाही घराने से है. उनके पिता स्व बालभद्र सिंह गुना जिले की राघवगढ़ रियासत के शासक रहे.  दिग्विजय सिंह वर्तमान में कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी हैं. इससे पहले वे कांग्रेस से ही दो बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं.

    कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह अपने तीखे तेवरों के लिए मशहूर हैं


    वडोदरा के गायकवाड़ शाही घराने का नाम जाना-माना है. इस हिंदुस्तान के सबसे अमीर शाही घरानों में से जाना जाता है. फिलहाल समरजीत सिंह गायकवाड़ बड़ौदा के गायकवाड़ घराने के वर्तमान महाराजा हैं. इस मशहूर क्रिकेट ने साल 2014 में बीजेपी जॉइन कर ली, हालांकि अब तक वे सक्रिय राजनीति में नजर नहीं आए हैं. इनका निवास जिसे लक्ष्मी विलास पैलेस के नाम से जाना जाता है, 600 एकड़ में फैला हुआ है और 187 कमरे हैं. गुजरात के देवस्थलों में आए चढ़ावे का बड़ा हिस्सा भी इनके पास आता है.

    कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अबदुल्ला का शाही खानदान राजनीति में काफी रौबदाब रखता है. उमर के दादा शेख अब्दुल्ला को शेर-ए-कश्मीर के नाम से जाना जाता है. वे कश्मीर के प्रधानमंत्री और फिर मुख्यमंत्री रहे. नेकां की स्थापना इन्होंने ही की. इनके बेटे फारूक अब्दुल्ला 2009 और 2014 में यूपीए 2 सरकार में केंद्रीय मंत्री होने के अलावा राज्यों में कई पदों पर शीर्ष भूमिका में रहे हैं. वहीं उमर अब्दुल्ला ने भी जम्मू-कश्मीर के सीएम बतौर 6 साल तक काम किया.

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