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हैप्पी बर्थडे@Shiva : वो भारतीय, जिसने सबसे पहले EMAIL बनाकर लिया कॉपीराइट

डॉ. शिवा अय्यदुरई ने लिया था ईमेल का कॉपीराइट.
डॉ. शिवा अय्यदुरई ने लिया था ईमेल का कॉपीराइट.

हाई स्कूल में पढ़ाई (High School Studies) के दौरान तकनीक की दुनिया (Technology) में करिश्मा करने वाले डॉ. शिवा (Dr. Shiva Ayyadurai) को लेकर हालांकि कई विवाद चलते रहे, लेकिन भारतीय मूल के इस अमेरिकी के आविष्कार (Invention of EMAIL) से इनकार नहीं किया जा सकता.

  • News18India
  • Last Updated: December 2, 2020, 9:59 AM IST
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आज यानी 2 दिसंबर वो तारीख है, जिस​ दिन भारतीय मूल (Indian Origin American) के उस शख्स का जन्म हुआ था, जिसने 14 साल की उम्र में ईमेल का आविष्कार (EMAIL Invention) कर दिया था. लेकिन यह कहानी इतनी सीधी नहीं है. जो लोग तकनीक के इतिहास (Tech History) के बारे में जानकारी रखते हैं, उनके मन में ज़रूर सवाल उठेगा कि ईमेल का गॉडफादर तो रे टॉमिल्सन (Ray Tomilson) को कहा जाता है और वो तो भारतीय मूल के नहीं थे? 1970 के दशक में टॉमिल्सन ने एक कमरे में रखे दो कंप्यूटरों के बीच संदेश भेजने का तरीका ईजाद किया था.

जी हां, टॉमिल्सन ने यह काम ज़रूर किया था और खासकर इस प्रणाली में “@” संकेत के इस्तेमाल के लिए उन्हें जाना जाता है, लेकिन इस किस्से की गहराई में कुछ राज़ और भी हैं. आपको जी मार्कोनी की याद होगी! हां, वही रेडियो के आविष्कार के तौर पर जिन्हें श्रेय मिला और जगदीश चंद्र बोस के आविष्कार को तरजीह नहीं दी गई. इसी तरह ईमेल के आविष्कार की कहानी भी रही. आइए इस कहानी और ईमेल के आविष्कारक को जानते हैं.

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कब बना था ईमेल?
मुंबई में पैदा होने वाले वीए शिवा अय्यदुरई ने ईमेल का आविष्कार किया था और जिसकी पुष्टि दुनिया के शीर्ष विद्वानों में शुमार इतिहासकार व लेखक नोआम चॉम्स्की ने भी की थी. दफ्तर के भीतर संवाद के लिए इलेक्ट्रॉनिक वर्जन को हाई स्कूल की उम्र के दौरान 1979 में डेवलप करने वाले शिवा ने इसे "EMAIL" नाम दिया था और 1982 में इसका कॉपीराइट भी हासिल कर लिया था.

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इस तरह के मीम साल 2019 में सोशल मी​डिया पर काफी चर्चित रहे थे.


मार्कोनी के खिलाफ बोस की लड़ाई इसलिए कमज़ोर रही थी क्योंकि पेटेंट मार्कोनी के पास था जबकि उनसे दो साल पहले ही बोस आविष्कार कर चुके थे. इस मामले में शिवा के पास अमेरिका का एक सरकारी दस्तावेज़ होना उनकी लड़ाई में बेहद कारगर हथियार साबित हुआ.

कैसे बना था ईमेल?
उस वक्त जिस तरह मेमो लिखे जाते थे यानी एक कार्बन कॉपी, एक बीसीसी और मूल रूप से जिसे लिखा जाता था, यानी "To", इसी पैटर्न पर ईमेल शुरू हुआ था, जिसे शिवा ने इलेक्ट्रॉनिक मैसेज मैनेजमेंट के तौर पर बनाया. न्यूजर्सी में 1978 में मेडिसिन और ​डेंटिस्टरी कॉलेज में शिवा ने इसे विकसित किया था. 30 अगस्त 1982 को अमेरिकी सरकार ने इस आविष्कार पर शिवा को आधिकारिक कॉपीराइट दिया.

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उस वक्त कंप्यूटर सॉफ्टवेयरों और कोड पर अमेरिका में पेटेंट नहीं मिला करता था इसलिए कॉपीराइट मिला. और यह तो सभी जानते हैं कि 80 के दशक के बाद ईमेल किस तरह दुनिया भर में पॉपुलर हुआ. विकसित होने के बाद ईमेल के बेसिक फीचर वही रहे, जो 1978 में थे. बस @ का संकेत यूनिवर्सल हुआ, जिसका श्रेय टॉमिल्सन को जाता है.

ईमेल के बारे में एक थ्योरी यह कहती है कि यह 1960 के दशक में भी एकदम शुरूआती रूप में था और इसका कभी आविष्कार हुआ ही नहीं, बल्कि यह समय के साथ विकसित हुआ. शिवा के बारे में और जानने से पहले ईमेल के बारे में कुछ बेहतरीन फैक्ट्स भी जानिए.

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* दुनिया में हर सेकंड करीब 28 लाख ईमेल भेजे जाते हैं. 2019 में करीब 294 अरब ईमेल भेजे गए.
* एक दिन में लोग औसतन ​15 बार अपना ईमेल चेक करते हैं.
* दुनिया के 86% प्रोफेशनल ईमेल को अपना पसंदीदा संवाद बता चुके हैं.
* दफ्तर में काम करने वाले एक प्रोफेशनल को दिन में औसतन करीब 122 ईमेल मिलते हैं और वो करीब 40 ईमेल भेजता है.
* अमेरिका में 2019 में 66% ईमेल मोबाइल फोन पर पढ़े जा रहे थे.
* दुनिया में 2019 में 60% फीसदी ईमेल स्पैम माने गए.
* दुनिया भर में एक व्यक्ति के पास औसतन 1.8 यानी करीब दो ईमेल अकाउंट हैं.

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डॉ. शिवा ने कई संस्थाओं पर मानहानि के मुकदमे किए.


कौन हैं शिवा और कितने मशहूर हैं?
अमेरिका के प्रसिद्ध मैसैचुसेट्स के टेक्नोलॉजी इंस्टिट्यूट (MIT) से पीएचडी समेत चार डिग्रियां हासिल करने वाले शिवा के बारे में मिश्रित धारणाएं और प्रति​क्रियाएं रहीं. एक तरफ, अमेरिका में 'ईमेल के आविष्कारक' के तौर पर उन पर काफी कुछ लिखा गया, तो दूसरी तरफ, ऐसे लोग भी कम नहीं रहे, जो शिवा को जालसाज़ बताकर यह कहते रहे कि किसी ने 'ईमेल' के नाम पर कुछ सामान्य सी चीज़ रजिस्टर करवा ली तो उसे आविष्कार नहीं माना जा सकता.

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वहीं, शिवा ने खुद कई संस्थाओं और व्यक्तियों के खिलाफ मानहानि के मुकदमे इसलिए किए क्योंकि उन्होंने शिवा के आविष्कार के खिलाफ लिखा या प्रोपैगैंडा किया. बहरहाल, इस विवाद में बड़ी जीत शिवा को तब मिली थी, जब चॉम्स्की ने एमआईटी में शिवा के समर्थन में कहा था कि '1978 में जो ईमेल बनाया गया, उसके बारे में फैक्ट्स विवादास्पद नहीं हैं और बुनियादी तौर पर ईमेल की परिकल्पना वही रही.'

मिलेनियम साइबरनेटिक्स कंपनी शुरू करने वाले शिवा अपने लंबे करियर में भारत की सबसे बड़ी साइंस एजेंसी सीएसआईआर के लिए भी काम कर चुके हैं और जेनेटिकली फूड प्रोग्राम के लिए भी चर्चित रहे हैं. इसके अलावा, शिवा ने अमेरिका में चुनाव भी लड़ा. पहले रिपब्लिकन पार्टी और फिर स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में बहुत कामयाबी शिवा को नहीं मिली, लेकिन एक टेक एक्सपर्ट के तौर पर शिवा पहचान रखते हैं.
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