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  • INDIAN WOMEN MARRIED TO NEPALESE MEN WILL WAIT FOR SEVEN YEARS FOR NEPAL CITIZENSHIP MRJ

भारत के इलाकों को अपना बताने के बाद अब कौन सा नया झटका देने की तैयारी में नेपाल?

नेपाल पहुंची भारतीय बहू को अब नागरिकता के लिए 7 साल इंतजार करना पड़ सकता है. (Photo-pixabay)

नेपाल में ब्याही गई भारतीय महिला (Indian women married to Nepalese men) को अब नागरिकता (citizenship of Nepal) के लिए 7 साल इंतजार करना पड़ सकता है. नेपाल की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी (Nepal Communist Party) का कहना है कि भारत में भी नेपाली लड़कियों के साथ यही होता है.

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    भारत-नेपाल सीमा विवाद (India-Nepal border dispute) लगातार गहरा रहा है. भारत के तीन हिस्सों को अपने राजनैतिक नक्शे में दिखाने के बाद अब नेपाल एक नया कदम उठाने जा रहा है, जो दोनों देशों के बीच संबंध खराब कर सकता है. दरअसल यहां एक नया कानून बनाने की तैयारी है, जिसके तहत नेपाल के नागरिक से शादी करके नेपाल पहुंची महिला को नेपाली नागरिकता पाने के लिए 7 सालों तक इंतजार करना होगा. इन 7 सालों के दौरान वो नेपाल में किसी भी तरह का राजनीतिक अधिकार नहीं पा सकेगी. सामाजिक पहचान के लिए नेपाल में ब्याही गई महिला को बस एक वैवाहिक परिचय पत्र दे दिया जाएगा. ये कदम हाल ही में जनता समाजवादी पार्टी की सांसद सरिता गिरि (Sarita Giri) के उस कदम के खिलाफ उठाया गया, जिन्होंने नेपाल के भारतीय क्षेत्रों पर दावा करने की कोशिश का विरोध किया था.

    नेपाल में नया राजनीतिक नक्शा (Nepal is drawing its new official map) जारी करने के लिए विधेयक लागू चुका है. इसके तहत लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाल अपना हिस्सा मान रहा है. यहां तक कि नेपाल की राष्‍ट्रपति ने भी व‍िवादित नक्‍शे को अपनी मंजूरी दे दी है. इलाके भारत के लिए सामरिक तौर पर काफी अहम इलाके रहे हैं.

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    इन्हीं इलाकों पर भारतीय मूल की नेपाली सांसद सरिता गिरि ने आपत्ति जताई थी. उनका कहना था कि कालापानी भारत का ही हिस्सा है. इसके बाद से इस हिंदू सांसद को लेकर कोहराम मचा हुआ है.



    नेपाल के नए नक्शे पर विरोध के बाद से सांसद सरिता गिरि को लेकर कोहराम मचा हुआ है


    विरोधियों ने उनके घर पर काला झंडा लगाते हुए उन्हें देशनिकाला की मांग तक कर डाली. इधर इसी के साथ नेपाल अब एक नए नियम की तैयारी में जुटा है. इसके तहत शादी करके नेपाल आने वाली भारतीय महिला को तुरंत नेपाल की नागरिकता नहीं मिलेगी, बल्कि 7 सालों तक इंतजार करना होगा. शनिवार को नेपाल की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की बैठक में नागरिकता नियमों में बदलाव का निर्णय लिया गया है

    माना जा रहा है अगर ये नियम कानून बन जाए तो इसका काफी खराब असर भारत-नेपाल के रिश्ते पर पड़ सकता है. अब तक भारत और नेपाल के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता माना जाता रहा है. यानी दोनों ही देशों के दोनों एक से दूसरे क्षेत्र में बिना किसी वीजा-पासपोर्ट के आ-जा सकते हैं. साथ ही शादी-ब्याह भी होते आए हैं. खासकर सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों में एक से दूसरे देश में रिश्ते जोड़ना आम है. साल 1950 में हुई में भारत-नेपाल मैत्री संधि के तहत भी रिश्ते और गाढ़े हुए.

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    संधि के तहत दोनों देशों के नागरिकों को दोनों ही देशों में बसने, जमीन खरीदने जैसी छूटें मिली हुई हैं. इसी के तहत नेपाल में ब्याहकर गई महिला को हाथ के हाथ नेपाल की सिटिजनशिप मिल जाती है. भारत में भी नेपाल से आई महिलाओं के लिए यही नियम है. हालांकि अब नेपाल और भारत के तनाव के बीच नेपाल की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने तय किया है कि भारत से आने वाली महिलाओं को सात साल तक स्थायी तौर पर नेपाल में रहने के बाद भी वहां का नागरिक माना जाएगा. इस बीच सांस्कृतिक और आर्थिक अधिकारों के लिए एक आवासीय प्रमाण पत्र दे दिया जाएगा. सात सालों बाद उसे पिछली नागरिकता छोड़नी होगी और इससे जुड़ा प्रमाण पत्र भी दिखाना होगा, तभी नेपाल की नागरिकता मिलेगी.

    अब तक भारत और नेपाल के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता माना जाता रहा है (Photo-pixabay)


    ऐसा भारत के नेपाल नक्शे पर विरोध के प्रतीक के तौर पर हो रहा है. इसके साथ ही एक बड़ी वजह इसमें सांसद सरिता गिरि का नक्शे पर विरोध भी है. जैसा कि कम्युनिस्ट पार्टी के नेता भीम रावल ने कहा कि हमारे यहां की औरतें जब शादी करके भारत जाती हैं तो उन्हें सालों का इंतजार करना होता है. वहीं नेपाल आने पर उन्हें तुरंत ही यहां की नागरिकता मिल जाती है और कई-कई बार तो मंत्री पद भी दे दिया जाता है. ये बात कटाक्ष के तौर पर सांसद गिरि के संदर्भ में कही मानी जा रही है. अगर ये नियम कानून का रूप ले लेगा तो इससे दोनों देशों के बीच राजनैतिक के साथ-साथ सामाजिक संबंध भी बुरी तरह से प्रभावित हो सकते हैं.

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    इस संबंध में नेपाल के होम मिनिस्टर राम बहादुर थापा ने ये दलील दी कि भारत में भी शादी करके गई नेपाली महिलाओं के साथ यही होता है. हालांकि ये बात सच नहीं है. इंडिया टुडे में आई रिपोर्ट के मुताबिक ये नियम दूसरे देशों से आई महिलाओं पर लागू होता है. इसके बाद भी नेपाल में कम्युनिस्ट पार्टी सालों से यही बात कहती आई है. यहां तक कि पार्टी के नेता टीवी इंटरव्यूज में भी ये बात बोलते रहे हैं ताकि नेपाल की जनता के मन में ये बातें बैठ जाएं. पहले भी पार्टी इसे संविधान का रूप देने चाहती थी लेकिन मधेशी समुदाय के कारण ऐसा मुमकिन नहीं हो सका.

    नेपाल की तराई में बसे मधेशी समुदाय का भारत से गहरा संबंध है


    मालूम हो कि नेपाल की तराई में बसे इस इलाके का भारत से गहरा संबंध है. नेपाल में मधेशियों की संख्या सवा करोड़ से अधिक है. इनकी बोली मैथिली है, साथ ही ये ये हिंदी और नेपाली भी बोलते हैं. भारत के साथ इनका काफी पुराना रोटी-बेटी का संबंध है. अब चीन के उकसावे में आकर नेपाल नए-नए नियम बनाने की सोच रहा है. यहां तक कि अब वहां सरहद पार होने वाले रिश्तों पर रोक लगाने की बात भी उठने लगी है. सत्तासीन पार्टी की एक सांसद पम्फा भुसाल ने हाल ही में ऐसा एक प्रस्ताव भी दिया है.

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    वैसे लगभग 70 साल पुरानी जिस संधि के कारण भारत नेपाल के साथ रियायत बरतता आया है, उसी संधि पर जब-तब सवाल भी उठते आए. जैसे एक अहम कारण सुरक्षा है. नेपाल से भारत आना आसान होने के कारण पाकिस्तान या दूसरे कई चरमपंथी देशों से लोग आकर नेपाली नागरिकता ले सकते हैं और फिर नेपाल की सीमा से होते हुए भारत आ सकते हैं. इससे देश की सुरक्षा पर बड़ा खतरा हो सकता है. नेपाल से जाली मुद्रा आने के मामले भी कई बार आ चुके हैं.
    Published by:Mridulika Jha
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