इसरो का ये सैटेलाइट घर-घर में कैसे तेज करेगा इंटरनेट की स्पीड?

इसरो ने मंगलवार-बुधवार रात अब तक का सबसे भारी उपग्रह जीसैट-11 अंतरिक्ष में भेजा है.

News18Hindi
Updated: December 5, 2018, 5:42 PM IST
इसरो का ये सैटेलाइट घर-घर में कैसे तेज करेगा इंटरनेट की स्पीड?
इसरो ने मंगलवार-बुधवार रात अब तक का सबसे भारी उपग्रह जीसैट-11 अंतरिक्ष में भेजा है.
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Updated: December 5, 2018, 5:42 PM IST
भारत में इंटरनेट की स्पीड बढ़ाने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) ने अब तक के सबसे भारी उपग्रह जीसैट-11 को अंतरिक्ष में भेज दिया गया है. दक्षिणी अमेरिका के फ्रेंच गुयाना स्पेस सेंटर से फ्रांस के एरियन-5 रॉकेट की मदद से इसे लॉन्च किया गया. अगर यह 5,845 किग्रा वजनी उपग्रह सही सलामत पृथ्वी की कक्षा में स्थापित हो जाता है तो यह देश के टेलिकॉम सेक्टर खासकर ग्रामीण भारत के लिए बहुत बड़ा वरदान साबित होगा.

पढ़ें आखिर इस सैटेलाइट में ऐसा खास क्या है कि यह भारत के लिए स्पेस में बड़ी छलांग माना जा रहा है?

इस भारी-भरकम सैटेलाइट से तेज हो जाएगा इंटरनेट, बहुत तेज
करीब 5,845 किग्रा भारी इस जियोस्टेशनरी सैटेलाइट को पृथ्वी के धरातल से करीब 36,000 किमी. ऊपर स्थापित किया जाना है. यह सैटेलाइट इतनी बड़ी है कि केवल इसके सोलर पैनेल ही चार मीटर लंबे हैं. यह अपने साथ 40 ku बैंड और Ka बैंड फ्रीक्वेंसी के ट्रांसपॉन्डर लेकर जा रही है. ये दोनों ज्यादा बैंडविड्थ की इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने में योगदान देंगे. इसरो की दी गई जानकारी के अनुसार यह 14 गीगाबाइट/ सेकेंड की स्पीड से डाटा ट्रांसफर करने में सक्षम होगी.

मजबूत सिग्नल के लिए पतली किरणें
जीसैट-11 एक हाई थ्रोपुट कम्युनिकेशन सैटेलाइट है. इसका मतलब हुआ कि यह कई सारे क्षेत्रों में किरणों (बीम) के जरिए तरंगे पहुंचाएगा. यह तरंगे केवल भारतीय उपमहाद्वीप को ही नहीं बल्कि आसपास के द्वीपों को भी कवर करेंगीं. इसका मतलब यह है कि यह बीम के जरिए कम्युनिकेशन करेगा. जिसमें बहुत ज्यादा फ्रीक्वेंसी पर चलने वाले विशेष तरीके के ट्रांसपॉन्डर की तर्ज पर यह काम करेगा.

इससे न सिर्फ इंटरनेट की कनेक्टिविटी ज्यादा हिस्सों में होगी बल्कि उसकी स्पीड भी बढ़ेगी. एक स्पॉट बीम एक सैटेलाइट सिग्नल होता है जो कि तेजी से किसी क्षेत्र विशेष में ज्यादा फ्रीक्वेंसी की तरंगे भेज सकता है और एक विशेष भौगोलिक क्षेत्र में सीमित होता है.
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ये बीम जितनी पतली होंगी तरंगे उतनी ही ज्यादा शक्तिशाली होंगीं. इसी बीम की प्रक्रिया को सैटेलाइट कई बार दोहराएगी ताकि पूरे देश को कवर किया जा सके. इससे उलट इनसैट जैसी पारंपरिक सैटेलाइट ब्रॉड सिंगल बीम का प्रयोग करती हैं. जो कि इतनी शक्तिशाली नहीं होतीं कि पूरे देश को कवर कर सकें.

चार सैटेलाइट हैं जो लेकर आएंगीं इंटरनेट क्रांति
जीसैट-11 के बाद अगली सैटेलाइट जीसैट-20 होगी जिसे अगले साल पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया जाएगा. ISRO के चेयरमैन के सिवान ने बताया, इसरो का लक्ष्य 2019 तक चार सैटेलाइट लांच के जरिए 100 गीगाबाइट/ सेकेंड तक की स्पीड पाने का है. ये सैटैलाइट होंगीं- जीसैट-19, जीसैट- 29, जीसैट- 11 और जीसैट- 20. इन चार सैटेलाइट्स में से दो जीसैट- 19 और जीसैट- 29 पहले ही छोड़े जा चुके हैं.

इसरो फिर से जीसैट- 6A वाली गलती नहीं दोहराना चाहता है
जीसैट-11 को पहले मार्च-अप्रैल में लांच किया जाना था. जबकि जीसैट-6A उपग्रह मिशन के अप्रैल में फेल हो जाने के चलते ISRO ने इसे फ्रेंच गुयाना से छोड़ने का फैसला किया. एजेंसी के अनुसार इलेक्ट्रिकल सर्किट में आई एक खराबी के चलते जीसैट-6A से सिग्नल नहीं मिल सका था. यह 29 मार्च को लॉन्च किया गया था. उन्हें डर था कि कहीं जीसैट-11 का हाल भी ऐसा ही न हो. कई सारे टेस्ट के बाद ही इसे लॉन्च किया गया.

इतने भारी सैटेलाइट के लिए किया गया यूरोपियन रॉकेट का चुनाव
इसरो के इस भारी-भरकम सैटेलाइट के लिए जीएसएलवी-III मुफीद नहीं होगा. क्योंकि इसकी क्षमता केवल 4000 टन तक के उपग्रह ले जाने की है. इसलिए इसरो इस सैटेलाइट को लॉन्च करने के लिए फ्रेंच गुयाना स्थित यूरोपियन स्पेसपोर्ट की मदद लेगा. इसरो ने इसकी लॉन्चिंग के लिए एलन मस्क के स्पेस एक्स से भी बात की थी. वैसे एक अच्छी बात यह भी है कि इसरो GSLV- III की पेलोड ले जाने की क्षमता बढ़ाने पर भी काम कर रहा है.

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