भारत अंतरिक्ष महाशक्तियों में शामिल, हमारे अंतरिक्ष यात्रियों को "व्योमनॉट्स" कहा जाएगा!

व्योमनॉट्स" में व्योम एक संस्कृत शब्द है, जिसका मतलब होता है अंतरिक्ष

News18Hindi
Updated: August 1, 2019, 3:10 PM IST
भारत अंतरिक्ष महाशक्तियों में शामिल, हमारे अंतरिक्ष यात्रियों को
इसरो
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Updated: August 1, 2019, 3:10 PM IST
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2022 तक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा मानव को अंतरिक्ष में भेजने की घोषणा कर चुके हैं. जब देश की जनता अपनी स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मना रही होगी, ठीक उसी समय भारत अपने अंतरिक्ष यात्री को स्पेस में भेज रहा होगा. भारतीय अतंरिक्ष यात्री को 'व्योमनॉट' कहा जाएगा. इस उपलब्धि के बाद भारत अंतरिक्ष में मानव भेजने वाला चौथा देश बन जाएगा. इस तरह भारत अंतरिक्ष महाशक्तियों के क्लब में रूस, अमेरिका और चीन के साथ शामिल हो जाएगा.

इससे पहले यह उपलब्धि केवल अमेरिकी स्पेस एजेंसी 'NASA', रूस की स्पेस एजेंसी 'Roscosmos और चीन की स्पेस एजेंसी 'CNSA' ने ही हासिल की है. ISRO के लिए ये बेहद महत्वपूर्ण मिशन है. अंतरिक्ष में यात्रा करने वाले भारत के एकमात्र नागरिक अभी तक राकेश शर्मा हैं. वो देश की वायु सेना में एक पायलट थे. उन्होंने 1984 में सोवियत संघ के अंतरिक्ष कार्यक्रम में हिस्सा लिया था और अंतरिक्ष में गए थे.

 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो)


"व्योमनॉट्स" नाम रखने के पीछे की वजह

गगनयान मिशन का उद्देश्य एक हफ्ते के लिए अंतरिक्ष में तीन-व्यक्ति का दल भेजना है. अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों के एस्ट्रोनॉट नाम के ट्रेंड को ध्यान में रखते हुए भारत ने अपने अंतरिक्ष यात्रियों का नाम "व्योमनॉट्स" रखा है. रूस के अंतरिक्ष यात्री "कॉस्मोनॉट्स" कहलाते हैं और चीन के अंतरिक्ष यात्री "ताइकोनॉट्स". "व्योमनॉट्स" में व्योम एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ है अंतरिक्ष (कई बार इसका इस्तेमाल आकाश के लिए भी होता है.)

इसरो के भावी प्रोजेक्ट्स
इसरो की तरफ से 2022 तक गगनयान लेकर कई भारतीय व्योमनॉट्स अंतरिक्ष में जाएंगे. इसरो का शुक्र ग्रह के लिए मिशन 2023 में लॉन्‍च होगा. इसके बाद भारत वर्ष 2029 तक अपना स्‍पेस स्‍टेशन स्‍थापित करेगा. माना जा रहा है कि 2025 से 2030 के बीच भारत चांद पर मैन मिशन पर कामयाबी हासिल कर लेगा. भारत अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने अगले एक दशक में जिन अंतरिक्ष मिशनों की योजना बनाई है, उनमें कॉस्मिक रेडिएशन के अध्ययन के लिए 2020 में मिशन एक्सपोसैट, 2021 में सूर्य तक पहुंचने के लिए आदित्य L1, 2022 में मार्स ऑर्बिटर मिशन-2, 2024 में चंद्रयान-3 और सोलर सिस्टम के अध्ययन के लिए 2028 में मिशन लॉन्‍च किया जाना शामिल है. इसरो की सबसे बड़ी बात ये है कि इसके ज्यादातर मिशन का बजट दूसरे स्पेस एजेंसी के मुकाबले काफी कम और किफायती होता है.
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इसरो चाहता है कि अंतरिक्ष में महिला को भेजा जाए
इसरो के अध्यक्ष डॉ. के सिवन कहते हैं कि इसरो चाहता है कि अंतरिक्ष में सबसे पहले व्योमनॉट के तौर पर महिला को भेजा जाए. डॉ. के सिवन कह चुके हैं कि चयन की प्रक्रिया भारतीय वायु सेना के जरिए होगी. इसके लिए आम आदमी भी आवेदन कर सकता है, पर ये देखा जाएगा कि जाने वाला अंतरिक्ष जाने में कितना सक्षम है.

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First published: August 1, 2019, 2:18 PM IST
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