भारत-चीन के बीच ये हैं 5 बड़े विवाद, इनके बावजूद बढ़ रही दोनों की दोस्ती

पिछले कुछ सालों में भारत-चीन संबंध मुश्किल चरण से गुजरे हैं. एनएसजी में भारत की संभावित सदस्यता के चीन के उत्साही विरोध सहित दोनों देशों के बीच विवाद रहे हैं.

News18Hindi
Updated: April 27, 2018, 10:58 AM IST
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भारत और चीन के बीच 1962 युद्ध के बाद रुके द्वपक्षीय कारोबार को 1978 में शुरू किया गया. इस शुरुआत के बाद 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पहल पर दोनों देशों ने मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) एग्रीमेंट पर समझौता किया. इस समझौते के बाद 2000 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय कारोबार बढ़कर 3 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया. इसके बाद अगले 8 साल के दौरान दोनों देशों के बीच कारोबार लगभग 52 बिलियन डॉलर की नई ऊंचाई पर पहुंच गया और इस साल चीन ने अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर पार्टनर बन गया.

भारत और चीन के आपसी कारोबार को उस ऊंचाई पर ले जाने के लिए दोनों देशों के बीच तीन बॉर्डर ट्रेडिंग प्वाइंट बेहद अहम भूमिका में रहे. इनमें नाथू ला पास (सिक्किम), शिप्की ला पास (हिमाचल प्रदेश) और लिपुलेख पास (उत्तराखंड) शामिल हैं.

भारत-चीन द्विपक्षीय व्यापार पिछले साल 84.44 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो कि डोक्कलम समेत कई मुद्दों पर तनाव के बावजूद ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचा.

2017 में द्विपक्षीय व्यापार सालाना आधार पर 18.63 प्रतिशत बढ़कर 84.44 अरब डॉलर हो गया. इसे ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है क्योंकि द्विपक्षीय व्यापार पहली बार 80 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले साल पंजीकृत 71.18 अरब डॉलर से अधिक था.

भारत चीनी उत्पादों के लिए सातवां सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है और चीन के 24 वें सबसे बड़े निर्यातक के रूप में उभरा है. महत्वपूर्ण बात यह है कि तांबे, लोहे, कार्बनिक रसायनों और सूती धागे के साथ हीरे चीन में भारतीय निर्यात में वृद्धि में योगदान देते हैं. अब आगे चीन के बाजारों को भारत के सोयाबीन, चीनी, चावल और सरसों के लिए खोला जाएगा. चीन के वाणिज्य मंत्री ट्रेड डेफिसिट को कम करने के लिए कदम उठाने का वादा किया है.

भारत चीन के बीच बड़े विवाद

सीमा विवाद
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भारत और चीन के सैनिकों के बीच पिछले साल सिक्किम के पास डोकलाम इलाके में तनातनी हुई थी और दो महीने से ज्यादा समय तक गतिरोध बना रहा था. उप विदेश मंत्री कोंग ने डोकलाम विवाद के बारे में पूछे जाने पर मीडिया से कहा, 'पिछले साल (डोकलाम में) सीमा पर हुई घटना से एक तरह से दोनों देशों के बीच परस्पर विश्वास की कमी का पता चलता है.'

भारत-चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा के करीब 3,488 किलोमीटर लंबे हिस्से पर विवाद है. दोनों देश इसके हल के लिए विशेष प्रतिनिधियों के बीच 20 चरणों की बातचीत कर चुके हैं. कोंग ने कहा, 'साफ तौर पर सीमा से जुड़ा सवाल महत्वपूर्ण हैं. दोनों देशों को अनुकूल परिस्थितियां तैयार करने के लिए मिलकर काम करना होगा और धीरे-धीरे इसका हल करना होगा. सीमा विवाद के उचित समाधान से दोनों देशों के बीच सहयोग एवं परस्पर समझ गहरा होगी और आपसी विश्वास बढ़ेगा.'

व्‍यापार असंतुलन
चीन भारत के मार्केट पर काफी हद तक कब्‍जा जमाए हुए हैं. इतना भारत की ओर से चीन के मार्केट के लिए नहीं किया गया.

ब्रह्मपुत्र नदी पर हाइड्रोपावर परियोजना
भारत और चीन के बीच ब्रह्मपुत्र नदी पर हाइड्रोपावर परियोजना से भी विवाद की स्थिति बनी हुई है. सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, चीन की इस परियोजना को लेकर पर्यावरणीय चिन्ताएं भी बनी हुई है.

PoK में चीन का दखल
हाल के दिनों में देखने में आया है कि पाकिस्‍तान अधिकृत कश्‍मीर (POK) में चीन का दखल बढ़ रहा है. माना जा रहा है कि पाकिस्‍तान इस इलाके की सीमा के पास चीन की सहायता से सड़क निर्माण में लगा है. ऐसे में भारत के लिए ये चिंता का विषय बना हुआ है.

मसूद अजहर
चीन मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कराने की भारत की कोशिशों में लगातार बाधा बनाता रहा है. हालांकि जैश-ए- मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर पर संयुक्त राष्ट्र की ओर से पाबंदी लगाए जाने जैसे मुद्दे इस मीटिंग में नहीं उठने चाहिए. भारत के लिए ये भी चिंता का विषय बना हुआ है.

भारत चीन कूटनीति
भारत चीन दोनों ही संबंधों को स्थिर करने की कोशिश करते रहे हैं लिकिन जटिलताएं भी लगातार बनी रही हैं.

पिछले कुछ सालों में भारत-चीन संबंध मुश्किल चरण से गुजरे हैं. परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत की संभावित सदस्यता के चीन के उत्साही विरोध सहित दोनों देशों के बीच विवाद रहे हैं.

हालांकि इन घटनाओं ने द्विपक्षीय संबंधों में खटास डाली है, लेकिन यह भी सच है कि, डोक्लम संघर्ष और उसके बाद ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद, नई दिल्ली और बीजिंग दोनों ने संबंधों को स्थिर करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं. खटास और दोनों के बीच निरंतर प्रतिस्पर्धा को देखते हुए भी, ऐसा लगता है कि द्विपक्षीय संबंध भविष्य में टिकाऊ तरीके से महत्वपूर्ण रूप से सुधारेंगे.

संबंधों में मामूली सुधार के कुछ संकेत हैं. सबसे पहले, बीजिंग में नए भारतीय विदेश सचिव विजय गोखले की हालिया यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को कुछ नई गति दे सकती है. माना जाता है कि मैंडेरिन में धाराप्रवाह गोखले ऐसे व्यक्ति हैं जो भारत-चीन के रिश्तों में कुछ संतुलन लाएंगे. गोखले को बगैर ज्यादा क्षति के डॉकलम संकट को फिनिश लाइन में लाने के लिए विशेष रूप से श्रेय दिया गया था.

कौन है विजय गोखले
चीन के साथ डोकलाम गतिरोध को हल कराने में अहम भूमिका निभाने वाले अनुभवी राजनयिक विजय केशव गोखले विदेश सचिव हैं.

भारतीय विदेश सेवा के 1981 बैच के अधिकारी गोखले फिलहाल विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) हैं.

गोखले को चीन का विशेषज्ञ माना जाता है. उन्होंने पिछले साल भारत और चीनी सेनाओं के बीच डोकलाम में 73 दिन लंबे गतिरोध को हल कराने के लिए बातचीत में अहम भूमिका निभाई थी.

वह 20 जनवरी 2016 से 21 अक्तूबर 2017 तक चीन में भारत के राजदूत थे. इसके बाद वह नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के मुख्यालय आ गए.

उन्होंने अक्तूबर 2013 से जनवरी 2016 तक जर्मनी में भारत के शीर्ष राजनयिक के तौर पर सेवा दी है. उन्होंने हांगकांग, हनोई और न्यूयॉर्क में भारतीय मिशनों में काम किया है. वह विदेश मंत्रालय में चीन और पूर्वी एशिया के निदेशक और पूर्वी एशिया के सचिव के पद पर भी रह चुके हैं.
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