32 साल तक चलता रहा था वो ऐतिहासिक भूकंप जिसने वैज्ञानिकों को किया हैरान

19वीं सदी में यह घटना इंडोनेशिया (Indonesia) के सुमात्रा द्वीप में हुई थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

19वीं सदी में यह घटना इंडोनेशिया (Indonesia) के सुमात्रा द्वीप में हुई थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

इंडोनेशिया (Indonesia) के सुमात्रा (Sumatra) में साल 19वीं सदी में एक ऐसा भूंकप (Earthquake) आया था जो 32 साल तक चलता रहा था.

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आमतौर पर माना जाता है कि भूकंप (Earthquake) जब भी आता है तो कुछ ही सेंकेंड या मिनट तक ही आता है. इस दौरान इसकी तीव्रता और इसका ही विनाश का कारण बनाती है. अगर यह भूकंप समुद्र में आया हो तो ऊंची ऊंची सुनामी लहरे तबाही मचा देती हैं. लेकिन कुछ भूकंप ऐसे होते हैं जो बहुत लंबे समय तक भी चलते हैं. 19वीं सदी में इंडोनेशिया (Indonesia) के सुमात्रा द्वीप (Sumatra Island) में एक ऐसा भूकंप आया था जो 32 साल तक चलता रहा था. जिससे वैज्ञानिक भी हैरान हैं.

एक खतरनाक भूंकप

साल 1861 में इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप में 8.5 की तीव्रता का भूकंप आया था जिससे बहुत बड़ी सुनामी आई थी और उसकी वजह से तटों पर रहने वाले हजारों लोगों की जान चली गई थी. नए अध्ययन से पता चला है कि यह एक छोटी और अलग घटना नहीं थी, बल्कि पृथ्वी पर सबसे लंबे चले भूंकप का अंत था जो 32 साल तक चला था.

धीमी गति के भूकंप
इस तरह के भूकंपों को स्लो स्लिप इवेंट्स यानि धीमी गति की घटना (SSE)  कहा जाता है. ये कई दिन ही नहीं बल्कि कई महीनों से लेकर सालों तक चल सकते हैं. नेचुरल अर्थ साइंस में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक यह घटना पिछले सबसे लंबे भूकंप से दोगुने समय तक चली थी.

शोधकर्ताओं को भी नहीं हुआ विश्वास

सिंगापुर की नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सीट की अर्थ ऑबजर्वेटरी के जियोडेसिक साइंटिस्ट और इसअध्ययन की लेखिका एमा हिल  बताया, “मुझे विश्वास ही नहीं हुआ है कि हमने इतने लंबी घटना की खोज की है, लेकिन वास्तव में ऐसा हमने किया था.” इस धीमे भूकंप की खोज वैज्ञानिकों को हमारे ग्रह के अंदर की गतिविधियों समझने में मदद मिलेगी.



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धीमी गति की घटनाओं का कारण भूंकप (Earthquake) बहुत तेज तो नहीं आते लेकिन उसकी भूमिका जरूर बना देते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

खुद खतरनाक नहीं होते ये भूकंप

अब वैज्ञानिक यह जान सकेंगे कि पृथ्वी की आंतरिक सतही गतिविधियों में विविधता और इस शांत परिघटना के प्रभावों और कारण क्या है जिसकी वजह से अंत में ऐसा घातक भूकंप आया. तेज भूकंप की तरह धीमे भूकंप भी टेक्टोनिक प्लेट की गतिविधियों में सिमटी ऊर्जा निकलते रहते हैं. लेकिन यह ऊर्जा धरती में कंपन पैदा करने की जगह धीरे धीरे तनाव निकालती हैं जिसकी वजह से वे अपने आप में खतरा नहीं बनतीं.

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बड़े भूकंप की नींव

सतह के नीचे ये धीमे लेकिन लगातार होते बदलाव आसपास के इलाकों में भ्रंश की दिशा में दबाव बढ़ा देते हैं. यब बढ़कर एक विशाल भूकंप की नींव तैयार कर देता है. इंडोनेशिया के कई इलाके पहले ही भूकंपीय नजरिए से चिंता का विषय बने हुए हैं. इस अध्ययन के प्रथम लेखक और सिंगापुर में नानयांग टेक्नोलॉजीकल यूनिवर्सिटी में पीएचडी उम्मीदवार रेशव मलिक इस बारे में विस्तार से बताते हुए कहते हैं कि दक्षिणी द्वी एंगानू बहुत तेजी से डूब रहा है.

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इस तरह की परिघटनाओं से इंडोनेशिया (Indonesia) में साल 2005 में भी घातक भूकंप आया था. (फाइल फोटो)

सबसे बड़ा सवाल

मलिक ध्यान दिलाते हैं कि आंकड़े एक ही जगह से आए हैं और वे सुझाते हैं कि धीमा भूकंप इस द्वीप में पहले ही आ चुके हैं. उन्होंने बताया कि इस तरह की परिघटनाएं 19वीं सदी में इकलौती घटना नहीं है. वे यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि यह कैसे होता है. इसके लिए शोधकर्ताओं ने पानी के अंदर मूंगे का अध्ययन किया.

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मूंगे पानी की ऊपर होने की दिशा के अनुसार बढ़ते हैं. शोधकर्ताओं ने मूंगे की परतों का अध्ययन कर इतिहास में पानी के उतार चढ़ाव की पड़ताल की और इससे पानी के नीचे की टेक्टोनिक गतिविधियों का खुलासा हुआ. प्लेट्स टकराने से वे ऊपर नीचे  होने लगी और अंततः भूकंप आया. ऐसा ही एक भूकंप सुमात्रा में साल 2005 में भी आया था.

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