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इंफोसिस संकट: पत्नी से पैसे लेकर 10 हजार रुपए से नारायणमूर्ति ने शुरू की थी कंपनी

News18Hindi
Updated: October 23, 2019, 11:10 AM IST
इंफोसिस संकट: पत्नी से पैसे लेकर 10 हजार रुपए से नारायणमूर्ति ने शुरू की थी कंपनी
इंफोसिस 7 दोस्तों ने मिलकर शुरू की थी

इंफोसिस (Infosys) आज संकट के दौर में है. कंपनी के भीतर गड़बड़ी होने की खबर सामने आ रही है. इंफोसिस के सामने अपने शेयरधारकों के बीच फिर से विश्वास हासिल करने की चुनौती है...

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  • Last Updated: October 23, 2019, 11:10 AM IST
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देश की बड़ी आईटी (IT) कंपनी इंफोसिस (Infosys) चर्चा में है. चर्चा किसी अच्छी वजह से नहीं हो रही है. मंदी, धीमा विकास दर और नौकरियों के जाने के दौर में एक बड़ी आईटी कंपनी के डगमगाने की खबर आई. एक व्हिसलब्लोअर ने कंपनी के भीतर गड़बड़ी को उजागर किया है. व्हिसलब्लोअर ने आरोप लगाया है कि कंपनी के सीईओ सलिल पारेख (Salil Parekh) और सीएफओ निलांजन रॉय (Nilanjan Roy) ने गलत तरीके से कंपनी की आय बढ़ाने की कोशिश की. दोनों पर आरोप है कि कंपनी को मुनाफे में दिखाने के लिए इन्होंने निवेश नीति और एकाउंटिंग से छेड़छाड़ की है.

एक बड़ी आईटी कंपनी के भीतर इस तरह की गड़बड़ी की खबर आते ही इसके शेयर टूटने लगे. बीएसई पर कंपनी के शेयर 15.99 फीसदी गिरकर 645.35 पर आ गए. वहीं एनएसई पर ये 15.90 घटकर 645 रुपए पर आ गए. कंपनी के शेयर में एक दिन में पिछले 6 साल में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई.

इंफोसिस का मार्केट कैप 3.28 लाख से गिरकर 2.83 लाख पर आ गया. लोगों को लगने लगा कि इसका हाल कहीं सत्यम कंप्यूटर की तरह न हो जाए. हांलाकि अब इंफोसिस के चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने कहा है कि वो आरोपों की स्वतंत्र आंतरिक जांच करवा रहे हैं. सीईओ सलिल पारेख और सीएफओ निलांजन रॉय को इस जांच से दूर रहने को कहा गया है.

इंफोसिस पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. एक बड़ी आईटी कंपनी जिसने अपनी स्थापना के कुछ ही वर्षों में जबरदस्त कामयाबी पाई आज मुश्किल में है.

7 दोस्तों ने मिलकर शुरू की थी कंपनी
इंफोसिस को आज से 38 साल पहले सात दोस्तों ने मिलकर बनाई थी. इसमें सबसे आगे थे नारायण मूर्ति. मूर्ति ने अपने छह दोस्तों नंदन नीलेकणि, एनएस राघवन, एस गोपालकृष्णन, एसडी शिबूलाल, के अलावा के दिनेश और अशोक अरोड़ा के साथ मिलकर इंफोसिस की नींव रखी थी. ये सभी पटनी कंप्यूटर्स के कर्मचारी थे. पटनी कंप्यूटर्स से अलग होकर उन्होंने अपना खुद का फर्म बनाया था.

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नारायण मूर्ति

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इंफोसिस की स्थापना 10 हजार रुपए के मामूली रकम से हुई थी. नारायण मूर्ति ने कंपनी का नाम रखा- इंफोसिस कंसलटेंट. पैसों की कमी हुई तो उन्होंने अपनी पत्नी सुधा मूर्ति से कुछ उधार लिए. नारायण मूर्ति के घर के सामने वाले रूम में कंपनी का दफ्तर बना. हालांकि कंपनी का आधिकारिक दफ्तर राघवन के पते पर था.

इंफोसिस के पहले कर्मचारी नहीं थे नारायणमूर्ति
इंफोसिस के शुरू करने के पीछे मुख्यतौर पर नारायणमूर्ति को माना जाता है. लेकिन वो कंपनी के पहले कर्मचारी नहीं हैं. पहले व्यक्ति एनएस राघवन हैं. नारायण मूर्ति कंपनी के चौथे कर्मचारी थे. उन्हें पटनी कंप्यूटर्स में अपना बचा हुआ काम पूरा करने में एक साल का वक्त लग गया. एक साल बाद उन्होंने इंफोसिस जॉइन किया.

इंफोसिस के पास 1983 तक एक भी कंप्यूटर नहीं था. मूर्ति की आर्थिक हालत ऐसी नहीं थी कि वो कंप्यूटर का आयात करवाते. कंपनी को पहला कंप्यूटर हासिल करने में 2 साल का वक्त लग गया. शुरुआती वर्षों में कंपनी के सामने मुश्किलें भी आईं. इंफोसिस उस वक्त संकट में आ गया, जब कंपनी के एक संस्थापक सदस्य अशोक अरोड़ा ने कंपनी छोड़ दी.

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इंफोसिस दुनिया की बड़ी आईटी कंपनियों में से एक है


किसी को नहीं पता था कि अब क्या होगा. इस मुश्किल घड़ी में नारायणमूर्ति सामने आए. उन्होंने अपने बाकी सदस्यों से कहा कि जिसे भी कंपनी छोड़कर जाना है जा सकता है लेकिन वो आखिरी वक्त तक इसके साथ रहेंगे. उनकी बातों का असर हुआ और नंदन नीलेकणि, गोपालकृष्णन, शिबूलाल, दिने और राघवन ने कंपनी से जुड़े रहे.

इंफोसिस के लिए अपनी पत्नी से बार-बार उधार लेते थे नारायणमूर्ति

एक बार नारायणमूर्ति की पत्नी सुधा मूर्ति ने बताया कि इंफोसिस शुरू करते वक्त नारायण मूर्ति अक्सर उससे पैसे उधार लिया करते थे. सुधा उधार दिए पैसों का हिसाब रखती थीं और उसे एक डायरी में दर्ज करती थीं. नारायणमूर्ति ने सुधा को वो पैसे कभी नहीं लौटाए. जब दोनों की शादी हो गई तो सुधा मूर्ति ने उधार वाले पन्ने को अपनी डायरी से फाड़ दिया. सुधा मूर्ति ने बताया था कि नारायणमूर्ति ने करीब 4 हजार रुपए उधार लिए थे.

1993 में पहली बार कंपनी आईपीओ लेकर आई. 14 जून 1993 को इंफोसिस देश की पहली आईटी कंपनी बनी जिसे शेयर बाजार ने लिस्ट किया. इंफोसिस जब आईपीओ लेकर आई तो इसका इश्यू प्राइस था 95 रुपए लेकिन शेयर बाजार में लिस्ट होने के दिन इसका शेयर 145 रुपए पर लिस्ट हुआ. कंपनी की साख इसी से पता चलती है.

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नंदन नीलेकणि


इंफोसिस दुनिया की बड़ी आईटी कंपनियों में से एक

1999 तक इंफोसिस की स्थिति काफी अच्छी हो चुकी थी. कंपनी का नेटवर्थ 100 मिलियन डॉलर पहुंच चुका था. इंफोसिस भारत की पहली आईटी कंपनी थी जिसे नैसडैक (NASDAQ) ने लिस्ट किया. इंफोसिस दुनिया की 20 बड़ी आईटी कंपनियों में से एक थी.

आज इंफोसिस पूरी दुनिया में अपनी सेवाएं दे रही हैं. कंपनी के 50 हजार कर्मचारी दुनियाभर के 12 देशों में फैले हैं.

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First published: October 23, 2019, 9:46 AM IST
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