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तारों के भी पहले से मौजूद हैं जीवन के लिए जरूरी तत्व, नए शोध ने दी जानकारी

शोध ने पता लगाया है कि तारों के पहले से भी जीवन आवश्यक जटिल अणु की मौजूदगी थी.  (प्रतीकात्मक तस्वीर)

शोध ने पता लगाया है कि तारों के पहले से भी जीवन आवश्यक जटिल अणु की मौजूदगी थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नए शोध ने उस धारणा को तोड़ा है जिसके मुताबिक जीवन के लिए जरूरी जटिल अणुओं (Complex Molecules) की मौजूदगी के लिए तारों (Stars) के गर्म वातावरण जरूरी है.

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नई दिल्ली: पिछले कुछ समय से खगोलविज्ञान (Astro Science) के क्षेत्र में काफी तेजी से काम हो रहा है. उन्नत किस्म के टेलीस्कोप (Telescope) अमेरिका, चीन सहित कई देशों की इस क्षेत्र में सक्रियता बढ़ी है. खगोलविदों को भी कई तरह की नई जानकारियां मिल रही हैं. उनकी पृथ्वी के बाहर जीवन की संभावनाओं की तलाश में भी कई उत्साहवर्धक जानकारियां मिल रही है. वहीं एक ताजा शोध ने यह पता लगाया है कि जीवन की शुरुआत के लिए जरूरी जटिल ऑर्गेनिक अणु (Complex Organic Molecule) तारों के बनने से पहले भी मौजूद रहते हैं.

एक अलग तरह का अध्ययन
आमतौर पर जब भी पृथ्वी के इतर जीवन की संभावनाओं की बात होती है तो लोगों का ध्यान उन ग्रहों पर जाता है जहां जीवन की अनुकूलता होना मुमकिन है. लेकिन ऐसे ग्रहों पर वे पदार्थ कैसे और कहां से आते हैं जो जीवन के लिए आवश्यक होते हैं. इस अध्ययन ने इसी पर प्रकाश डाला है

क्या पता लगा शोध में
पहले वैज्ञानिकों को लगता था कि जीवन के लिए आधारभूत या मूल जटिल ऑर्गेनिक अणु अंतरिक्ष में गैस की ठंडे बादल और धूल में कम मात्रा में होंगे, लेकिन एरीजोना यूनिवर्सिटी की स्टीवर्ड ऑबजर्वेटरी के खगोलविदों के मुताबिक तारे और ग्रहों की पैदाइश में खास भूमिका निभाने वाले इन बादलों और धूल में जीवनकारक जटिल अणु ज्यादा व्यापक तौर पर  मौजूद हैं.

टूट गई यह धारणा
इतना ही नहीं जितना सोचा जा रहा था उससे कहीं ज्यादा समय पहले से ये अणु अस्तित्व में आए. उससे भी पहले लाखों साल पहले जब तारों का निर्माण हमारे ब्रह्माण्ड  मे शुरु हुआ था. शोधकर्ताओं की यह पड़ताल एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित हुई है. इस अध्ययन के नतीजे कई पुराने मतों को चुनौती दे रहे हैं. अबतक माना जाता था की इन जटिल ऑर्गेनिक अणुओं के देखे जाने के लिए तारों में एक गर्म वातावरण जरूरी होता है, लेकिन इस अध्ययन में ऐसा नहीं पाया गया है. इस प्रकार के अणु तो तारों के बनने के पहले ही पाये जा रहे हैं.

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पहले माना जाता था कि इस तरह के अणुओं की उपस्थिति के लिए तारों का गर्म वातावरण जरूरी है. (प्रतीकात्मक फोटो)


कौन से अणुओं पर हुआ अध्ययन
इस अध्ययन में सबसे पहले शोधकर्ताओं ने दो जटिल अणुओं मिथेनॉल और एसिटैल्डिहाइड के संकेतों की अंतरिक्ष में उपस्थिति के बारे में जानने की कोशिश की. उन्होंने इन अणुओं को तारे के निर्माण वाली जगहों पर देखने की कोशिश की. आमतौर पर इन जगहों पर खगोलविदों का ध्यान नहीं जाता है.  इन जगहों को शोधकर्ताओं ने प्री स्टोलर या स्टारलेस कोर (Pre –Stellter or Starless Cores) कहा क्योंकि अभी तक वहां कोई भी तारा नहीं है और वे ऐसी जगहें हैं जहां ठंडी धूल और गैस हैं जो तारों और संभवतः ग्रहों के बीज की तरह हैं.

कौन से अंतरिक्ष क्षेत्र का हुआ अध्ययन
शोधकर्ताओं ने अमेरिका के टक्सन को किट पीक स्थित एरीजोना रेडियो ऑबजर्वेटरी के 12 मीटर डिश टेलीस्कोप का उपयोग किया, उन्होंने इस टेलीस्कोप की मदद से गैस और धूल वाले 31 स्टारलेस कोर  का अध्ययन किया जो टॉरस मॉलीक्यूलर क्लाउड इलाके में फैले थे. यह इलाका हमारी पृथ्वी से 440 प्रकाश वर्ष दूर हैं. हर कोर में इतना ज्यादा फैला है कि उसमें एक ही कतार में एक के बाद हमारे एक हजार सौरमंडल आ सकते हैं.

इन सवालों के जवाब अब तक नहीं मिले हैं
शोधकर्ताओं का कहना है कि इस अध्ययन से उन्हें पता चला कि तारों और ग्रहों के बनने से भी पहले जीवन के लिए आवश्यक मूल ऑर्गेनिक रसायन इन गैसों और धूल में उपस्थित हैं. अभी तक वैज्ञानिक इससे पहले यह तो जानते थे कि इस तरह के अणु अंतरिक्ष में मौजूद हैं, लेकिन वे कहां हैं, कैसे बनते हैं, और ग्रहों की सतह तक कैसे पहुंचते हैं, इससे वे अनजान थे.

अध्ययन का कहना है कि इस प्रकार के अणु तारों और ग्रहों के निर्माण से पहले मौजूद थे.


शोध कर्ताओं को लगता है कि इस अध्ययन से अब उन सभी शोधकर्ताओं को अपने मत में सुधार करने में मदद मिलेगी जिन्होंने इस तरह के अणुओं के अस्तित्व में आने के अपने सैद्धांतिक मत रखे हैं.  उनका यह भी मानना है कि यह अध्ययन हमारे सौरमंडल के निर्माण को समझने में भी काम आ सकता है.

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