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जब INS विक्रांत को डुबाने आई पाकिस्तानी पनडुब्बी को भारत ने दे दी थी जलसमाधि

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Updated: January 31, 2019, 3:28 AM IST
जब INS विक्रांत को डुबाने आई पाकिस्तानी पनडुब्बी को भारत ने दे दी थी जलसमाधि
आईएनस विक्रात (फाइल फोटो)

1971 का युद्ध शुरू होने से पहले पाकिस्तान ने गाजी को चुपचाप बंगाल की खाड़ी की तरफ रवाना कर दिया. गाजी का मकसद आईएनएस विक्रांत को खोजकर तबाह करना था.

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  • Last Updated: January 31, 2019, 3:28 AM IST
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31 जनवरी 1997 को भारतीय नौसेना पोत आईएनएस विक्रांत सेवा मुक्त हुआ था. भारत ने आईएनएस  विक्रांत को 1957 में ब्रिटेन से खरीदा था. 1961 में इसे भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था. इतिहास के पन्नों को उठाकर देखें तो 'आईएनएस विक्रांत' के नाम कई कामयाबियां हैं. इन्हीं में से एक है 1971 में इसको डुबाने आई पाकिस्तानी पनडुब्बी पीएनस गाजी का खुद डूब जाना.

पाकिस्तान की ताकत था गाजी
गाजी पनडुब्बी को पाकिस्तान ने अमेरिका से लीज पर लिया था. उस वक्त इस पनडुब्बी का जवाब पूरे दक्षिण एशिया में किसी देश के पास नहीं था. यह 75 दिनों तक पानी के अंदर रह सकती थी और 20 हजार किलोमीटर का सफर तय कर सकती थी. यही नहीं गाजी दुश्मन की नजरों से बचने में भी सक्षम था. कहा जाता है कि गाजी के खौफ वजह से ही 1965 के युद्ध में भारतीय नौसेना ने कराची पर हमले का प्लान टाल दिया था. यहीं डर 1971 के युद्ध में भी मंडरा रहा था.

INS विक्रांत को तबाह करने के लिए निकला गाजी



1971 का युद्ध शुरू होने से पहले पाकिस्तान ने गाजी को चुपचाप बंगाल की खाड़ी की तरफ रवाना कर दिया. गाजी का मकसद आईएनएस विक्रांत को खोजकर तबाह करना था. अरब सागर को पार करते हुए गाजी बंगाल की खाड़ी में पहुंच भी गया. गाजी अपने मकसद में कामयाब होता इससे पहले ही एडमिरल एन कृष्णन ने ऐसा दांव खेला कि गाजी को समुद्र में समाना पड़ा.

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एडमिरल एन कृष्णन का बड़ा दांव
एन कृष्णन ने पनडुब्बी रोधी क्षमता से लैस आईएनएस राजपूत को आईएनएस विक्रांत होने का नाटक करने के लिए कहा. आईएनएस राजपूत से भारी वायरलेस मैसेज भेजे जाने लगे. मद्रास नेवल बेस को कहा गया कि उनकी तरफ बड़ा युद्धपोत आने वाला है. ये सब गाजी को गुमराह करने के लिए किया जा रहा था और हुआ भी ऐसा ही. पाकिस्तान को लगा कि आईएनएस विक्रांत विशाखापत्तनम में है और गाजी इसे डुबाने के लिए आगे बढ़ने लगा.

ऐसे डूबा गाजी
भारतीय नौसेना सतर्क हो चुकी थी, वहीं गाजी बेखौफ होकर विशाखापत्तनम पहुंच चुका था. विशाखापत्तनम के समुद्र तट पर आईएनएस राजपूत के कैप्टन लेफ्टिनंट कमांडर इंदर ने पानी में बड़ी हलचल देखी. उन्होंने अनुमान लगाया कि इतनी हलचल किसी पनडुब्बी के पानी में गोता लगाने से ही हो सकती है. उन्होंने तुरंत समंदर में पनडुब्बी नष्ट करने वाले दो डेफ्थ चार्जर डालने का हुक्म दिया जो जाकर सीधा गाजी से टकराए और इसी के साथ गाजी पानी में समा गया.

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First published: January 31, 2019, 3:28 AM IST
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