Explained: क्यों कीड़े-मकोड़ों से बनी डिशेज Future Food कहला रही हैं?

कृमिवर्म, कीड़े और टिड्डों से बना ये खाना फ्यूचर फूड कहला रहा है- सांकेतिक फोटो (pixabay)

कृमिवर्म, कीड़े और टिड्डों से बना ये खाना फ्यूचर फूड कहला रहा है- सांकेतिक फोटो (pixabay)

झींगुर और टिड्डे जैसे कीड़ों के वजन का 80% हिस्सा केवल प्रोटीन ही होता है. साथ ही इनसे मिलने वाला पोषण तत्व चिकन और मांस के मौजूदा विकल्पों से कहीं ज्यादा हैं. ये फ्यूचर फूड की तरह फ्रांस (future food in France restaurant) में परोसा जा रहा है.

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कोरोना और कई प्राकृतिक आपदाओं के बीच दुनियाभर में खाद्य संकट गहराता दिख रहा है. ऐसे में कई देश दूसरे देशों में जमीन लीज पर लेकर अन्न उपजा रहे हैं तो कई जगहों पर खाने का संकट दूर करने के लिए नए प्रयोग हो रहे हैं. इसी के तहत फ्रांस के पेरिस का एक रेस्त्रां कीड़े-मकोड़ों से बने व्यंजन परोस रहा है. इसी साल जनवरी में यूरोपियन फूड सेफ्टी एजेंसी (EFSA) ने कीड़ों, टिड्डों से बने भोजन की इजाजत दी है.

भुखमरी की चपेट में संसार

संयुक्त राष्ट्र की मई की शुरुआत में जारी एक रिपोर्ट में दिखा कि दुनिया किस कदर भुखमरी की चपेट में है. 2020 के दौरान दुनिया के 55 देशों के करीब 15.5 करोड़ लोग गंभीर रूप से खाद्य संकट का सामना कर रहे थे. ये डाटा साल 2019 की तुलना में 2 करोड़ से भी ज्यादा रहा. यूएन की 2021 ग्लोबल रिपोर्ट ऑन फूड क्राइसिस की इस रिपोर्ट में सबसे खतरनाक हालात में अफ्रीका और मिडिल ईस्ट के देशों को बताया गया.

गहराएगा अन्न संकट
अब कोरोना के कारण देशों की इकनॉमी गड़बड़ा गई है. इस दौरान जाहिर है कि अन्न का संकट और खतरनाक होने वाला है. खासकर बच्चों और युवाओं के लिए ये काफी भारी पड़ सकता है क्योंकि उनमें पोषण की कमी से उत्पादक उम्र में ही कई बीमारियां हो सकती हैं.

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पेरिस के कई रेस्त्रां अपने मेनु में अनाज, फल और सब्जियों के साथ कीड़े का कॉम्बिनेशन तैयार कर रहे हैं- सांकेतिक फोटो (pixabay)

पेरिस के रेस्त्रां ने किया प्रयोग 



यही सब देखते हुए पेरिस में डायट में कीड़े-मकोड़ों को शामिल करने की कवायद शुरू हुई. पेरिस के कई रेस्त्रां अपने मेनु में अनाज, फल और सब्जियों के साथ कीड़े का कॉम्बिनेशन तैयार कर रहे हैं. इसमें सेहत के लिए लाभदायक स्वस्थ कीड़ों की कई प्रजातियों को कुरकुरा कर सलाद और चॉकलेट सॉस के साथ परोसा जा रहा है.

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सेहत और पर्यावरण दोनों का दोस्त 

कृमिवर्म, कीड़े और टिड्डों से बना ये खाना फ्यूचर फूड भी कहला रहा है. इन कीड़ों में झींगुर, टिड्डे, मीलवर्म जैसे कीड़े मुख्य हैं. हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में पेरिस के रेस्त्रां के हवाले से इस भोजन को न केवल सेहत, बल्कि पर्यावरण के लिए भी काफी अच्छा माना जा रहा है.

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प्रोटीन का काफी अच्छा स्त्रोत 

इनमें वजन का 80% हिस्सा केवल प्रोटीन ही होता है, जो इस तरह का है कि इंसानी आंतें आसानी से पचा सकें. इसके अलावा ग्रासहॉपर, झींगुर समेत कई तरह के कीड़ों में प्रोटीन के अलावा आयरन, जिंक, कॉपर, मैग्नीशियम इतनी ज्यादा मात्रा में होता है, जो चिकन या मांस में नहीं होता. इससे शरीर की पोषण की सारी जरूरतें पूरी हो पाती हैं.

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कीड़ों को ओट और सब्जियां खिलाई जाती हैं ताकि वे स्वस्थ रहें- सांकेतिक फोटो (pixabay)

एनीमिया दूर हो सकता है 

कीड़े-मकोड़ों को खाने में शामिल करने पर इसलिए भी जोर दिया जा रहा है कि ये आयरन का भी बढ़िया सोर्स हैं. चूंकि फिलहाल दुनिया के बहुतेरे देशों में गर्भवती, किशोरियां और 5 साल के कम उम्र के बच्चे आयरन की कमी से जूझ रहे हैं, ऐसे में ये महंगी सब्जियों या दवाओं का विकल्प बन सकते हैं.

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मांस से पर्यावरण को कितना खतरा 

यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन (University of Copenhagen) की स्टडी के अलावा दुनिया के कई हिस्सों में स्टडी में ये बात निकलकर आई. इसके अलावा इन्हें पालने में निकलने वाली कार्बन काफी कम होती है. बता दें कि फिलहाल प्रोटीन के लिए मांसाहार लेने वाले लोग जिन पशुओं का सेवन करते हैं, उन्हें पालने में काफी कार्बन उत्सर्जित होती है, जो कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही है. संयुक्त राष्ट्र समेत पर्यावरण पर काम करने वाली नामी संस्थाएं कई बार इस बारे में सचेत कर चुकी हैं. वे बताती हैं कि दुनिया में जितनी कार्बन गैस निकलती है, उसमें 14.5% से ज्यादा केवल उन पशुओं के पालन में निकलती हैं, जिन्हें हम खाने के लिए पालते हैं.

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पर्यावरण को नुकसान पहुंचाएं बगैर खाद्यान्न संकट दूर करने के लिए कई देश क्लीन मीट बनाने की पहल भी कर चुके- सांकेतिक फोटो (pixabay)

विकल्प के तौर पर क्लीन मीट की पहल 

पर्यावरण को नुकसान पहुंचाएं बगैर खाद्यान्न संकट दूर करने के लिए कई देश क्लीन मीट बनाने की पहल भी कर चुके. सिंगापुर में लैब में मीट तैयार होता है, जिसे क्लीन मीट कहते हैं. मीट लैब में बना होने के कारण जानवरों को मारने जैसी हिंसा की जरूरत भी नहीं होगी. दरअसल ये मीट एनिमल सेल से तैयार होता है जिसके कारण स्वाद और पोषण असल मीट जैसा होता है. हालांकि फिलहाल क्लीन मीट की ये पहल प्रयोग के चरण में है और बाजार में इसे आने में समय लग सकता है. इसके अलावा ये काफी महंगा भी हो सकता है.

ये मिल रहा रेस्त्रां के मेनु में 

अब एक बार ये समझते हैं कि पेरिस में खाने के साथ कीड़े-मकोड़ों के मेल को प्रमोट करने के लिए क्या हो रहा है. लोगों में इसके लिए स्वाद पैदा करने की कोशिश के तहत मेनु में कई तरह से इसे शामिल किया गया. जैसे किसी पसंदीदा सलाद में कुरकुरे कीड़े डालना, या फिर चॉकलेट सलाद या पास्ता के साथ इसका मेल.

कीड़ों की क्वालिटी को लेकर ग्राहक आश्वस्त रहें, इसके लिए रेस्त्रां के पास ही फार्म तैयार किया गया, जहां कीड़े पाले जा रहे हैं. हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में रॉयटर्स के हवाले से बताया गया कि इन कीड़ों को ओट और सब्जियां खिलाई जाती हैं ताकि वे स्वस्थ रहें.

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