अमेरिकी आसमान में दिखा कयामत लाने वाला जहाज, 1 घंटे उड़ने की लागत करोड़ों में

इस तरह के डूम्स-डे प्लेन केवल  अमेरिका और रूस के पास हैं

इस तरह के डूम्स-डे प्लेन केवल अमेरिका और रूस के पास हैं

वॉशिंगटन में ट्रंप समर्थकों की हिंसा के साथ ही अमेरिका में डूम्स-डे प्लेन (doomsday plane in America) तैयार हो गया. दुनिया के सबसे सुरक्षित और सबसे खतरनाक इस प्लेन के घंटाभर हवा में रहने की लागत 1 करोड़ 17 लाख है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 9, 2021, 8:37 AM IST
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बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों ने संसद को घेरकर जमकर हिंसा की. एक ओर इस दंगे-फसाद की तस्वीरें इंटरनेट पर वायरल हुईं तो दूसरी तरफ तुरंत अमेरिका ने न्यूक्लियर डूम्स डे प्लेन (nuclear doomsday planes) लॉन्च कर दिया. दुनिया के किसी भी देश पर चुटकियों में परमाणु हमला कर सकने में सक्षम ये प्लेन क तरह से चेतावनी है कि कोई भी देश अमेरिकी अस्थिरता का फायदा उठाने की न सोचे.

सुपर पावर देश अमेरिका में राजनैतिक अस्थिरता आना कई देशों के फायदेमंद हो सकता है. फिलहाल जैसे हालात हैं, उसमें अमेरिका से दुश्मनी रखने वाले देश अस्थिरता का लाभ उठाते हुए उसपर हमले जैसी योजना भी बना सकते हैं. यही ध्यान में रखते हुए अमेरिका के पास एक बैक-अप योजना हमेशा तैयार रहती है. इसके तहत असामान्य हालातों के आते ही डूम्स डे प्लेन लॉन्च कर दिया जाता है.

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इसे E-4B नाइटवॉच कहते हैं. बेहद आधुनिक तकनीकों से लैस ये विमान अगर इशारा भी कर दे तो तुरंत अमेरिका के 4,315 परमाणु बम एक साथ हरकत में आ सकते हैं. यानी अमेरिका जब चाहे दुनिया के किसी भी हिस्से में विनाश बरपा सकता है.
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बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों ने संसद को घेरकर जमकर हिंसा की (Photo-news18 English via REUTERS )


वॉशिंगटन पोस्ट में इस प्लेन के बारे में विस्तार से रिपोर्ट आई है कि कैसे कैपिटल हिल की तरफ लोगों के बढ़ते ही तुरंत मैरिलैंड स्थित एंड्रयू एयरबेस से नेशनल एयर कमांड पोस्‍ट एयरक्राफ्ट E-4B ने उड़ान भरी. इस प्लेन के अमेरिकी आसमान पर दिखने का मतलब है कि अमेरिका के भीतर कुछ अस्थिरता तो है लेकिन वे बाहरी ताकतों से निपटने के लिए भी तैयार हैं.

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इस तरह के डूम्स-डे प्लेन केवल अमेरिका और रूस के पास हैं. एक और रूस ने इस प्लेन के बारे में काफी गोपनीयता रखी हुई है तो अमेरिका के बारे में कई जानकारियां है कि प्लेन किस सीरीज का है और क्या खासियत है. बोइंग E-4B के अलावा इस श्रेणी में बोइंग E-6 Mercury भी है.

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ये सीरीज तब एक्टिव हुई थी, जब चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे. उस दौरान अमेरिका के आसमान में दो E-6B Mercury प्लेन लगातार देश के दोनों छोरों पर गश्त लगा रहे थे. ये नजर रखने का काम कर रहे थे कि अगर देश पर हमला होता है तो ये विमान बैलिस्टिक-मिसाइल पनडुब्बियों से संपर्क करेंगे और यही पनडुब्बियां दुश्मन देश को परमाणु मिसाइल से जवाब दें.

nightwatch plane
इस प्लेन के प्रतिघंटा उड़ने की कीमत लगभग 160,000 डॉलर है


इस प्लेन की खासियतों का अंदाजा इसी बात से लग सकता है कि ये अमेरिकी रक्षा विभाग के सबसे महंगे उपकरण हैं. अकेले साल 2020 में अमेरिका ने इस श्रेणी के प्लेन्स के रखरखाव पर लगभग 223 मिलियन डॉलर खर्च किए. ये तीन डेक वाले इस प्लेन में 112 क्रू रह सकते हैं. इसमें खिड़कियां नहीं होती हैं और अमेरिका का दावा है कि ये कितना भी भयंकर परमाणु हमला सह सकते हैं. तो इस तरह से ये हवा में उड़ते वॉर रूम ही हैं, जहां से दुनिया पर हमला किया जा सकता है.

डूम्स-डे प्लेन को दूसरे विश्व युद्ध के बाद साल 1973 में तैयार किया गया था. तब रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) के साथ अमेरिका के संबंध काफी तनावपूर्ण थे और शीत युद्ध कभी भी असल युद्ध में बदल सकता था. यही देखते हुए अमेरिका ने ये प्लेन तैयार किया.

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अकेले साल 2020 में अमेरिका ने इस श्रेणी के प्लेन्स के रखरखाव पर लगभग 223 मिलियन डॉलर खर्च किए


लंबे-चौड़े क्रू को रख सकने लायक बड़ा ये प्लेन लगातार 12 घंटों तक बिना ईंधन के उड़ सकता है. लेकिन ये भी जान लें कि इस प्लेन के प्रतिघंटा उड़ने की कीमत लगभग 160,000 डॉलर है. यानी एक घंटे भी प्लेन हवा में रहे तो लगभग 1 करोड़ 17 लाख रुपए खर्च होंगे. किसी भी ताप या फिर रेडिएशन के बचाने के लिए इसपर ऐसी शील्ड चढ़ी हुई है, जो किसी माइक्रोवेव में होती है.

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ये तो हुईं तकनीकी खूबियां. भीतर से ये प्लेन किसी अत्याधुनिक होटल जैसी सुविधाएं लिया हुआ है. इसकी वजह ये है कि अगर कोई देश अमेरिका पर हमला या गड़बड़ी करने की सोचे तो सबसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति और आर्मी कमांडर को प्लेन में लिया जा सके. उनके लिए प्लेन के भीतर कॉन्फ्रेंस रूम भी है, जहां सुरक्षित तरीके से युद्ध की नीतियां बनाई जा सकें. बता दें कि प्लेन के टॉप पर एक बबलनुमा संरचना है, जहां लगभग 67 सैटेलाइट एंटीना हैं, जो गंभीर से गंभीर हालातों में कम्युनिकेशन बनाए रखने का काम करते हैं.
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