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ज्यादा कसरत बढ़ा सकती है कोविड-19 जैसे संक्रमण का जोखिम -अध्ययन

सही तरह से ना की गई कसरत (Exercise) संक्रमण का भी जोखिम बढ़ा देती है.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

सही तरह से ना की गई कसरत (Exercise) संक्रमण का भी जोखिम बढ़ा देती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

कसरत के तीव्रता (Intensity of Exercise) और संक्रमण के जोखिम (Risk of Infection) को लेकर हुए अध्ययन में अजीब से लगने वाले नतीजे निकले है. इसमें पाया गया है कि उच्च स्तर की शारीरिक गतिविधि होने पर यानि कि ज्यादा कसरत करने पर सांसों के द्वारा हो रहे एरोसॉल उत्सर्जन में भी बहुत तेजी से इजाफा होता है जिससे व्यक्ति के संक्रामक रोगों को पकड़ने का जोखिम बहुत ज्यादा बढ़ जाता है. कोविड-19 (Covid-19) महामारी के संदर्भ में यह अध्ययन महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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    कसरत (Exercise) का सेहत से गहरा नाता है. लेकिन क्या कसरत ही कभी संक्रमण की वजह बन सकती है. जी हां ज्यादा कसरत तो नुकसानदेह होती है यह सबने सुना है. अभी तक कसरत की तीव्रता (Intensity of Exercise) और सांस से बाहर निकले एरोसॉल कणों (Exhaled Aerosol particles) की सघनता की मात्रा के बीच में संबंध को ठीक से समझा नहीं गया था. नए अध्ययन में पाया गया है कि ज्यादा कसरत संक्रमण (Infection) को बुलावा देने का कारण बन सकती है यह निष्कर्ष इस शोध में विशेष प्रयोग करने के बाद देखा गया कि उच्च स्तर की शारीरिक गतिविधि के साथ एरोसॉल उत्सर्जन में बढ़ोत्तरी बहुत ही तेजी से बढ़ती है.

    इंडोर हालात में विशेष प्रयोग
    म्यूनिख की एक शोध टीम ने प्रयोगात्मक स्थितियों में पाया है कि उच्च स्तर की शारीरिक गतिविधियों के कारण एरोसॉल उत्सर्जन में चरघातांकी तरीके से इजाफा होता है जिससे इंडोर एथलेटिक कार्यक्रमों में भाग ले रहे एथलीटों में कोविड-19 जैसे संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसा इमारतों के अंदर वाले जिम आदि क्षेत्रों में भी होता है जहां शारीरिक श्रम बहुत ज्यादा होता है.

    श्वसन आयतन की विशेष स्थिति
    इस शोध से पहले यह पता था कि अप्रशिक्षित व्यक्तियों में श्वसन आयतन सामान्य स्थिति में जहां 5 से 15 लीटर प्रति मिनट होता है, वही कसरत के दौरान 100 लीटर प्रति मिनट हो जाता है. वास्तव में अच्छे से प्रशिक्षित एथलीटों के मामले में यह आयतन 200 लीटर प्रति मिनट तक पहुंच सकता है. यह भी पाया गया आंतरिक खेल स्थितियों में बहुत से लोगों ने इसी वजह से सार्स कोव-2 का संक्रमण पाया था.

    एरोसॉल की संख्या
    अभी तक यह स्पष्ट नहीं था कि कसरत की तीव्रता का व्यक्ति के द्वारा सांस के जरिए लिए गए प्रति मिनट एरोसॉल की संख्या और बाहर निकाले गए एरोसॉल कणों की मात्रा के बीच संबंध क्या है. इस वजह से सार्स कोव-2 जैसे संक्रमण फैलने की संभावित खतरे का भी पता नहीं चल पा रहा था. लेकिन इस अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि हमें स्कूल जिम, इंडोर खेल के केंद्र, फिटनेस स्टूडियो, या डिस्को में संक्रमण फैलने की संभावना रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने के प्रयास करने होंगे.

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    अध्ययन में पाया गया है कि ज्यादा या तीव्र कसरत (Exercise) में संक्रमण का खतरा ज्यादा हो जाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    कैसे किया मापन
    शोधकर्ताओं ने उपरोक्त बातों को मापने के लिए ही एक पद्धति विकसित की है. उनके प्रायोगिक उपकरण पहले आसपास की हवा में मौजूद एरोसॉल की कणों को छानते हैं इसके बाद एर्गोमीटर स्ट्रेस टेस्ट के जरिए प्रतिभागी को  एक खास मास्क लगाया जाता है जिसमें साफ हवा ही जाती है और उसमें लगी विशेष नली से केवल सांस से बाहर निकली हवा ही बाहर निकलती है जिससे प्रति मिनट निकले गए एरोसॉल के कणों का मापन हो पाता है.

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    कितने वर्कलोड के बाद संवेदनशीलता
    इस तरह से शोधकर्ता पहली बार यह मापने में सफल रहे कि अलग अलग कसरतों के स्तर पर सांस बाहर निकालते हुए प्रतिमिनट कितने एरोसॉल बाहर निकले. अध्ययन में पाया गया है कि कसरत के दौरान शरीर वजन के हिसाब से प्रतिकिलोग्राम दो वाट के वर्कलोड इजाफे के दौरान एरोसॉल उत्सर्जन में  केवल सामान्य स्तर की ही बढ़ोत्तरी हुई. लेकिन उसके बाद यह चरघातांकी तरीके बढ़ी. यानि एक 75 किलो के प्रतिभागी इस नाजुक स्तर पर 150 वाट के वर्कलोड में ही पहुंच जाता है. जो सामान्य जॉगिंग जैसी कसरत करने पर आगे नहीं जाता है.

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    शोध बताता है कि जिम (Gym) जैसी जगहों पर वेंटीलेशन आदि सुविधाओं पर ज्यादा ध्यान और जोर देने की जरूरत है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    ऐसे इलाकों में सुरक्षा की जरूरत
    लेकिन सुप्रशिक्षित एथलीटों की कसरतों में यह तेजी से बढ़ने लगता है. शोधकर्ताओं को लिंग के आधार पर कोई बहुत ज्यादा अंतर देखने को नहीं मिला. इससे जाहिर होता है कि जिम जैसे क्षेत्रों में सुरक्षा के उपाय करने की कितनी ज्यादा जरूरत है. खास तौर पर जब स्वास्थ्यसेवाओं के तंत्र को चुनौती देने वाले कोविड-19 महामारी जैसे हालात बनने पर कहां ज्यादा ध्यान देना है, या कहां से शुरुआत करनी है इस अध्ययन के नतीजे मददगार हो सकते हैं.

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    शोधकर्ताओं का कहना है कि तीव्र स्तर की कसरतों को बाहर खुली हवा में करना सहायक और प्रभावी कदम हो सकता है. और अगर यह संभव ना हो तो इडोर हालात में ही बढ़िया कारगरता वाले वेंटिलेशन सिस्टम को चला कर खतरे कम किए जा सकते हैं. इसके साथ कोविड-19 रोकथाम के सामान्य नियमों को लागू करने से भी काफी मदद मिल सकती है.

    Tags: COVID 19, Disease, Health, Research, Science

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