1962 आम चुनाव: कांग्रेस को मिली आसान जीत लेकिन राजगोपालाचारी की पार्टी ने किया कमाल

1962 के आम चुनावों में प्रचार के दौरान जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी

1962 के आम चुनावों में प्रचार के दौरान जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी

1957 के आम चुनावों तक 91 ऐसी सीटें थीं जिनमें एक ही सीट पर दो लोगों को चुना जाता था. इस परंपरा को 1962 के आम चुनावों में खत्म कर दिया गया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 23, 2019, 8:11 PM IST
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कांग्रेस को 1962 के आम चुनावों के बाद मुश्किलों का सामना करना पड़ा क्योंकि इसके सबसे बड़े नेता जवाहरलाल नेहरू की कांग्रेस को तीसरी जीत दिलाने के दो साल बाद ही मृत्यु हो गई. ये ऐसे आम चुनाव थे जिनमें लोग नदियां और रेगिस्तान पार कर वोट डालने पहुंचे थे.

1962 के लोकसभा चुनावों के नतीजों को दिल्ली के कनॉट प्लेस पर एक बोर्ड पर प्रदर्शित किया गया था. 2 अप्रैल, 1962 को तीसरी लोकसभा का गठन किया गया था.  1962 में कश्मीर में उपचुनाव भी हुए थे. 1962 के चुनावों के वक्त भारत में 18 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश थे. ये चुनाव 494 सीटों पर लड़े गए थे.

1957 के आम चुनावों तक 91 ऐसी सीटें थीं जिनमें एक ही सीट पर दो लोगों को चुना जाता था. इस परंपरा को 1962 के आम चुनावों में खत्म कर दिया गया. तबसे फिर कभी एक सीट पर एक से ज्यादा प्रत्याशी नहीं चुना गया. बता दें कि इसका मतलब एक ही सीट के दो अलग-अलग समुदायों के लिए अलग-अलग जीते प्रत्याशी का चयन होता था.



27 मई, 1964 को जवाहर लाल नेहरू की मौत हो गई थी. और इसके बाद करीब दो हफ्तों तक प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी गुलजारीलाल नंदा ने निभाई थी. इसके बाद यह जिम्मेदारी निभाने के लिए लाल बहादुर शास्त्री को प्रधानमंत्री चुन लिया गया.
इन चुनावों में भारतीय जन संघ को 494 में से 14 सीटों पर जीत मिली. वहीं कम्युनिस्ट पार्टी ने कुल 29 सीटें जीतीं. प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने भी 12 सीटों पर जीत दर्ज की. वहीं कांग्रेस ने इन चुनावों में 361 सीटें जीतीं.

इन चुनावों में कांग्रेस ने फिर से पहले चुनावों की तरह करीब 45 फीसदी वोट पाए थे. हालांकि उसे सीटों के मामले में थोड़ा नुकसान हुआ था. लेकिन अभी भी कांग्रेस ने कुल सीटों की 70 परसेंट से ज्यादा सीटें जीती थीं.

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इन चुनावों में सी राजगोपालाचारी की स्वतंत्र पार्टी ने एक मजेदार चीज करके दिखाई थी. पहली बार आम चुनावों में हिस्सा ले रही इस पार्टी ने करीब 8 फीसदी वोट हासिल कर लिए थे जो कि भारतीय जनसंघ से ज्यादा थे. और 8 परसेंट वोटों के साथ स्वतंत्र पार्टी ने 18 सीटों पर जीत दर्ज की थी.

इन चुनावों में जवाहरलाल नेहरू इलाहाबाद की फूलपुर सीट से खड़े हुए थे. नेहरू का यह आखिरी आम चुनाव था. यहां उन्होंने जबरदस्त वोट पाते हुए अपने विरोधी से 33 फीसदी ज्यादा वोट पाए थे.

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