जन्मदिनः शराब-सिगरेट से दूर रहने वाला हिटलर जंग पर निकले सैनिकों को करवाता था नशा

अडोल्फ हिटलर को आज भी उसकी हिंसा के लिए याद किया जाता है
अडोल्फ हिटलर को आज भी उसकी हिंसा के लिए याद किया जाता है

क्रूरता की बात करें तो इतिहास में शायद ही कोई नाजी तानाशाह अडोल्फ हिटलर (Adolf Hitler) की बराबरी कर सके. दूसरे विश्व युद्ध (second world war) के दौरान हिटलर ने लगभग 6 मिलियन यहूदियों (Jews) को मौत के घाट उतरवाया. इसे The Holocaust (यहूदी नरसंहार) के नाम से जाना जाता है. कत्लेआम के लिए कुख्यात ये तानाशाह सनकी भी था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 20, 2020, 4:41 PM IST
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नाजी पार्टी (Nazi Party), जिसे नेशनल सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी (NSDAP) के तौर पर भी जाना जाता था, के नेता अडोल्फ हिटलर (Adolf Hitler) को आज भी उसके दमन  के लिए याद किया जाता है. पेंटिंग और वास्तुकला में दिलचस्पी रखने वाले हिटलर को जब मनमुताबिक करने का मौका नहीं मिला तो वो पहले विश्वयुद्ध के दौरान सेना में भर्ती हो गया. जंग खत्म होने के बाद से राजनीति में बढ़ते हिटलर ने जल्दी ही एक पार्टी बना ली और इसके बाद जो हुआ, उससे लगभग सभी वाकिफ हैं. आज ही यानी 20 अप्रैल 1999 को ऑस्ट्रिया के वॉन शहर में इस तानाशाह का जन्म हुआ था. इस मौके पर जानते हैं हिटलर की कुछ कमजोरियां.

मूंछों के पीछे था राज
यहूदियों से हिटलर की नफरत इतनी ज्यादा थी कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उसने उन्हें कमरों में ठूंसकर और जहरीली गैसें छोड़कर मारने का आदेश दे दिया. अपने इसी कत्लेआम की वजह से हिटलर की मूंछों को आज भी most sinister moustache यानी सबसे मनहूस या हिंसक मूंछ कहा जाता है. वैसे हिटलर की मूंछों का स्टाइल हमेशा से ही ऐसा नहीं था. वो ऐसी मूंछें रखना चाहता था, जो खूब लंबी और घनी हो. उसने मूछें बढ़ानी शुरू भी की थीं लेकिन फौज में भर्ती के बाद Bavarian Infantry Division ने उसे अपनी मूंछें छोटी रखने का आदेश दिया ताकि जहरीली गैसों से बचने के लिए गैस मास्क चेहरे पर ठीक से फिट हो सके. इससे गुस्साए हिटलर ने अपनी मूंछें एकदम छोटी-छोटी कतर लीं और अंत तक वैसा ही रखा. वैसे हिटलर की मूंछों की ये खास स्टाइल टूथब्रश स्टाइल कहलाती है.

हिटलर की मूंछों का स्टाइल हमेशा से ही ऐसा नहीं था

डरता था बिल्लियों से


माना जाता है कि किसी चीज से न डरने वाले हिटलर को छोटी सी बिल्ली से भी डर लगता था. बिल्ली से उसका डर इतना ज्यादा था कि अगर कहीं बिल्ली दिख जाए तो वो वहां जाने से पहले स्टाफ को बुलाता और बिल्ली को भगाता था. वैसे अकेला हिटलर ही नहीं, अलेक्जेंडर द ग्रेट, जुलियस सीजर, नेपोलियन और मुसोलिनी को भी बिल्ली से डर लगता था. दिलचस्प बात ये है कि ये सभी योद्धा और अपनी क्रूरता के लिए जाने जाते हैं.

जंग में जाने से पहले नशे की आदत
खुद को सबसे अच्छी नस्ल का साबित करने के लिए हिटलर ने अपनी सेना के लिए कई नियम बनाए, जिन्हें वो खुद भी मानता था. मसलन, वो शराब कभी नहीं पीता था, उसने जर्मनी में एंटी-स्मोकिंग कैंपन चलाया और यहां तक कि वो मांसाहारी खाने से भी परहेज करता था. हालांकि वो तरह-तरह का नशा और नींद के लिए दवाएं लेने का आदी था. हिटलर के पर्सनल फिजिशियन Theodor Morell ने साल 1941 में एक रिसर्च में शामिल होकर कहा था कि हिटलर रोज कई तरह का नशा करता था जैसे ऑक्सीकोडॉन, मॉर्फीन और यहां तक कि कोकीन भी. यहां तक कि पूरी नाजी पार्टी में लोग नशा करते थे और लड़ाई से पहले सैनिकों को Methamphetamine दिया जाता था ताकि उनका नर्वस सिस्टम उत्तेजित रहे.

जीवन के शुरुआती दौर में मुफलिसी देख चुके हिटलर को पैसे जुटाने की भी सनक थी


अपनी किताब खरीदने का दिया आदेश
जीवन के शुरुआती दौर में मुफलिसी देख चुके हिटलर को पैसे जुटाने की भी सनक थी. पार्टी के गठन के बाद वो संस्थाओं से डोनेशन लेता, जिसका कुछ हिस्सा अपने पर लगाता था. वैसे अमीर होने के लिए इस तानाशाह के पास कई दूसरी योजनाएं भी थीं. जैसे चांसलर बनने के बाद उसने आदेश किया कि उसकी आत्मकथा Mein Kampf की ज्यादा से ज्यादा कॉपीज खरीदी जाएं और नए जोड़े को गिफ्ट में दी जाएं. इसके अलावा उसने टैक्स देने से भी इनकार कर दिया ताकि पैसे कहीं न जाएं. दूसरा विश्व युद्ध खत्म होने और हिटलर की खुदकुशी के बाद उसकी प्रॉपर्टी, जो कि लगभग 5 अरब डॉलर से भी ज्यादा थी, को जर्मन स्टेट Bavaria को दे दिया गया.

30 अप्रैल 1945 को हिटलर के बाद ही कई बड़े नाजी नेताओं ने भी खुदकुशी की थी. इसके बाद जर्मनी में एक अजीब स्थिति बनी. हज़ारों जर्मन पुरुषों, महिलाओं और बच्चों ने आत्महत्या की. इसे सामूहिक आत्महत्या लहर या मास सुसइड वेव के नाम से जाना जाता रहा. इसपर बोलने-बताने से हरदम परहेज किया जाता रहा लेकिन साल 2015 में एक जर्मन लेखक Florian Huber ने इसी घटना पर एक किताब लिखी जो अंग्रेजी में Promise Me You'll Shoot Yourself: The Downfall of Ordinary Germans, 1945 के नाम से आ चुकी है. इसमें मास सुसाइड का खुलकर जिक्र है.

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