होम /न्यूज /ज्ञान /

International Day of Sign Languages 2022: लोगों को एक करती है सांकेतिक भाषा

International Day of Sign Languages 2022: लोगों को एक करती है सांकेतिक भाषा

अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस (International Day of Sign Languages 2022) बधिरों की समस्याओं की कम करने में बहुत मददगार हो सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस (International Day of Sign Languages 2022) बधिरों की समस्याओं की कम करने में बहुत मददगार हो सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस (International Day of Sign Languages 2022) को मनाने का उद्देश्य लोगों में बधिरों की समस्याओं के प्रति जागरूकता पैदा करना है. इससे लोग सांकेतिक भाषा का सीखने के लिए प्रोत्साहित हो सकें और बधिरों (Deafs) से संवाद और संचार संभव बन सके. हैरानी की बात लगती है कि लेकिन सच है कि संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने चार साल पहले ही इस दिवस को मनाना शुरू किया है.

अधिक पढ़ें ...
  • News18Hindi
  • Last Updated :

हाइलाइट्स

बधिरों को संचार और संवाद में बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
ज्यादा से ज्यादा लोग सांकेतिक भाषा सीखें तभी बधिरों को मदद मिल सकती है.
बधिरों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए विश्व सांकेतिक भाषा दिवस मनाया जाता है.

पिछली सदी में संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के पीछे मकसद दुनिया में सभी तरह के लोगों के सामाजिक विकास और बेहतर जीवन स्तर देने का प्रयास करना भी शामिल है. इसके लिए संयुक्त राष्ट्र कई तरह के अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाता है. इन्हीं में से एक अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस (International Day of Sign Languages 2022) भी है जो हर साल 23 सितंबर को मनाया जाता है. इसकी स्थापना विश्व बधिर महासंघ (World Federation of Deaf) ने की थी. दुनिया में करोड़ों लोग सुनने की क्षमता से वंचित या बहुत ही कमजोर हैं जिस वजह से उन्हें अपने निजी जीवन में बहुत सारा संघर्ष करना पड़ता है. उन्हीं के लिए रची गई सांकेतिक भाषा सभी लोगों को एक करने का काम भी करती है.

बधिरों का कठिन और संघर्षपूर्ण जीवन
इस दिवस का मुख्य काम लोगों के बीच संकेतिक भाषा के प्रति जागरूक करना है. दुनिया में करीब 7.2 करोड़ लोग बधिर हैं लेकिन आम जनता इन लोगों के लिए सांकेतिक भाषा को नहीं समझती है इस वजह से बधिर लोगों का दैनिक संघर्ष और कठिन हो जाता है. इसीलिए इस दिवस का मकसद लोगों को प्रोत्साहित भी करना है कि वे कम से कम सांकेतिक भाषा की आधारभूत जानकारी तो जरूर रखें.

काफी समय पहले भी उपयोग में थीं ऐसी भाषाएं
वैसे तो सांकेतिक भाषा का उपयोग 500 ईसा पूर्व से भी पहले से होने के प्रमाण मिलते हैं, लेकिन आधुनिक सांकेतिक भाषा की सबसे पहली वर्णमाला फ्रांस के चार्ल्स –मिशेल डि एलोपे ने प्राकाशित की थी. यही वर्णमाला आज तक उपयोग में लाई जा रही है. 1755 में एबे डि एलोपे ने पेरिस में बधिरों के लिए पहले स्कूल खोला था और लॉरेंट क्लेरिक इसके मशहूर स्नातक के रूप में पहचाने गए थे.

23 सितंबर ही क्यों
क्लेरिक ने अमेरिका में जाकर 1817 में थामस हॉपकिंस गैलॉडेट के साथ पहले बधिर स्कूल खोला था. इसके बाद 1857 में गैलॉडेट के बेटे एडवर्ड माइनर गैलॉडेट ने वॉशिंगटन डीसी में बधिरों के लिए स्कूल खोला जो 1864 में राष्ट्रीय बधिर कॉलेज बन गया. इसके बाद विश्व बधिर महासंघ की स्थापना 23 सितंबर 1951 में हुई. साल 2017 में संयुक्त राष्ट्र ने फैसला किया कि हर साल 23 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस मनाया जाएगा और 2018 से इसे मनाया जा रहा है.

Research, United Nations, International day for Sign Language, World Federation of Deaf

ज्यादा से ज्यादा लोगों के सांकेतिक भाषा (Sign Languages) सीखने से बहुत फायदा होगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

क्या होती है सांकेतिक भाषा
सांकेतिक भाषा एक तरह के दृश्यीय भाषा होती है जिसमें संदेशों को हाथ के इशारों और संकेतों का उपयोग किया जाता है. वैज्ञानिकों को यह अभी तक स्पष्ट रूप से पता नहीं है कि दुनिया में इस तरह कीकुल कितनी भाषाएं प्रचलित हैं. यहां तक कि हर देश की अपनी सांकेतिक भाषा होती है. बल्कि कुछ देशों में तो एक से ज्यादा सांकेतिक भाषा हैं.

यह भी पढ़ें: कारों से दूरियां बढ़ा रहे हैं दुनिया के ये 4 शहर, पैदल यात्रियों को मिली तरजीह

नहीं सीखते सांकेतिक भाषा
राहत की बात यह है कि बहुत सारे संकेत और इशारे आधारभूत संचार के लिए सभी सांकेतिक भाषाओं में समान ही हैं. इन भाषाओं में स्थानीय बोलचाल के तरीकों का भी असर होता है
और इससे स्थानीय स्तर पर उन्हें उपयोग में लाना भी आसान हो जाता है, लेकिन फिर भी चूंकि अधिकांश बधिर मूक भी होते हैं, फिर भी बहुत सारे मूकबधिर भी सांकेतिक भाषा को नहीं सीखते हैं.

Research, United Nations, International day for Sign Language, World Federation of Deaf

साल 2050 तक हर दस में से एक व्यक्ति सुनने की समस्या (Hearing Problem) से पीड़ित होगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

दस में से एक व्यक्ति
7.2 करोड़ बधिरों में से 4.3 करोड़ लोग ऐसे हैं जिन्हें अपनी सुनने की क्षमता गंवाने के कारण पुनर्वास की जरूरत है और साल 2050 तक ऐसे लोगो की संख्या सात करोड़ से ज्यादा हो जाएगी. यानि हर दस में से एक व्यक्ति के साथ सुनने की समस्या हो जाएगी. इसीलिए यह बहुत जरूरी है कि ज्यादा से ज्यादा लोग सांकेतिक भाषा को समझें क्यों बधिरों के  पास बोलने वाली भाषा सीखने का विकल्प नहीं है.

यह भी पढ़ें: लोगों को खींचते हैं दुनिया के सबसे खूबसूरत रेलवे स्टेशन

यही वजह है कि इस साल विश्व बधिर महासंघ ने“साइन लैंग्वेज यूनाइट अस” यानि “सांकेतिक भाषा हमें एक करती है” को इस दिवस की थीम रखा है. यह भाषा लोगों को जोड़ने का काम करने के साथ उनकी संवेदनशीलता को भी जागृत और परीष्कृत करने का काम करेगी. सरकारों के ,साथ सामाजिक स्तर पर भी किए गए प्रयास इस दिशा में सार्थक हो सकती है और सांकेतिक भाषाओं को वैश्विक एकता के लिए एक उपकरण के तौर पर उपयोग में ला सकते हैं.

Tags: Research, United nations

अगली ख़बर