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अंतरराष्ट्रीय चाय दिवसः चीन के राजा के उबले पानी में उड़ते हुई एक पत्ती गिरी, फिर...

News18Hindi
Updated: May 22, 2020, 3:10 PM IST
अंतरराष्ट्रीय चाय दिवसः चीन के राजा के उबले पानी में उड़ते हुई एक पत्ती गिरी, फिर...
चाय की दिलचस्प कहानी

क्या है भारत में चाय की कहानी. अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस पर पेश है चाय की यात्रा. इसका सफर चीन से शुरू हुआ. फिर जापान होते हुए यूरोप में गया. भारत में इसे परिचित कराने वाले अंग्रेज थे. जिन्होंने बाद में यहां चाय का बड़े पैमाने पर उपयोग किया और बाहर बड़े पैमाने पर निर्यात भी किया

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आप कौनसी चाय के शौक़ीन हैं? ब्लैक टी? ग्रीन टी? लेमन टी? या अपनी गुड ओल्ड दूध वाली कड़क चाय? आपको जानकार आश्चर्य होइगा कि जिसे हम अपने सबसे पसंदीदा पुरानी दूध वाली चाय कहते हैं वह नई है और ग्रीन टी या ब्लैक टी पुरानी. दुनिया भर में करोड़ों लोगों के सुबह की शुरुआत चाय की प्याली से होती है. एक कप चाय हम सभी को एनर्जी से भर देता है, लेकिन क्या आप जानते हैं चाय की शुरुआत कैसे हुई थी.

चाय से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार  कहा जाता है कि चाय की शुरुआत 5 हजार साल पहले चीन में हुई थी.

ऐसा माना जाता है कि चीन के सम्राट शैन नुंग रोज गर्म पानी पिया करते थे. एक दिन उनके लिए बगीचे में पानी उबाला जा रहा था, तभी एक पेड़ की कुछ पत्तियां उस पानी में गिर गई. पानी का रंग बदल गया और उसमें खूशबू भी आने लगी. राजा ने जब वो पानी पिया तो उसे काफी अच्छा लगा और यहीं से शुरुआत हुई चाय की. धीरे-धीरे राजा के महल से निकलकर पूरे चीन का पसंदीदा पेय पदार्थ बन गयी चाय.



इस तरह जाहिर हुई चाय की सीक्रेट रेसिपी



खास बात ये थी कि चीन दुनियाभर से आए लोगों की मेहमानवाजी चाय से करता था, लेकिन कभी इसकी रेसिपी किसी को नहीं बताई. कई सालों के बाद एक बौद्ध गुरु को किसी तरह चाय का रहस्य पता चला. उन्होंने जापान में जाकर सबको इसकी रेसिपी बताई. फिर क्या था जापान में भी लोग चाय की चुस्कियों के आदी हो गए. जापान से चाय जा पहुंची यूरोप के देशों में, जहां इंग्लैंड के लोग भी चाय का मजा लेने गए.

चाय में कई तरह के औषधीय गुण भी होते हैं, ये बात कई रिसर्च से जाहिर भी हो चुकी है


 अंग्रेजों ने भारत में बताया कि चाय क्या होती है 
भारत में चाय के शुरुआत की कहानी बेहद दिलचस्प है. दरअसल गवर्नर जनरल लॉर्ड बैंटिक ने 1834 में जब भारत आए तो उन्होंने असम में देखा कि वहां के लोग चाय की पत्तियों के साथ उबालकर पानी पीते हैं जिसे वो दवाई की तरह इस्तेमाल करते थे.

बैंटिक ने लोगों को चाय की जानकारी दी. एक समिति का गठन किया, जिसके बाद चाय की परंपरा भारत में शुरू हो गई. इसके बाद 1835 में असम में चाय के बाग लगाए गए. भारत में सन 1881 में इंडियन टी एसोसिएशन की स्थापना की गई, जिसने भारत में ही नही अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में भी चाय के उत्पादन को फैलाया. अंग्रेजों की आय का मुख्य स्रोत भी बन गई थी चाय. यहां चाय उगाकर वो इसे बडे़ पैमाने पर विदेशों में भेजते थे.

चाय पर चीन के एकाधिकार को तोड़ने के लिए चाय के वाणिज्यिक उत्पादन को पहली बार अंग्रेजों ने भारत में पेश किया. अंग्रेजों ने चीनी बीज, चीनी रोपण और खेती की तकनीक का उपयोग करके, असम में चाय उद्योग शुरू किया जो निर्यात के लिए था.

पहले देश में चाय औषधि के तौर पर पी जाती थी
अंग्रेजों से पहले, पौधे औषधीय उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था. सिंगफो जनजाति और खम्ति जनजाति यह भी मानती है कि वे 12 वीं शताब्दी से चाय पी रहे हैं. हालांकि, भारत में चाय का वाणिज्यिक उत्पादन ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के आगमन तक शुरू नहीं हुआ था.

अंग्रेजों ने भारत और सिलोन में वाणिज्यिक चाय बागान शुरू किए. 1824 में बर्मा और असम के बीच की सीमा के साथ पहाड़ियों में चाय के प्लांट तैयार किए गए.

भारत का एक शख्स सालभऱ में कितनी चाय पीता है
भारत लगभग एक शताब्दी तक चाय का शीर्ष उत्पादक था, लेकिन चीन द्वारा 21 वीं शताब्दी में शीर्ष चाय उत्पादक के रूप में विस्थापित किया गया था.  जबकि भारत दुनिया भर में चाय का सबसे बड़ा उपभोक्ता है, भारत में चाय की प्रति व्यक्ति खपत प्रति वर्ष प्रति व्यक्ति सामान्य 750 ग्राम है.

1901 तक आते आते भारत में भी चाय का एक बड़ा बाजार बन गया था और 1903 में टी सेस बिल पास हुआ जो चाय के एक्सपोर्ट को कंट्रोल करने के लिए था.

पानी के बाद सबसे ज्यादा पिया जाने वाला पेय
आपको जानकर आश्चर्य होगा कि अब पानी के बाद सबसे ज्यादा पी जाने वाला पेय चाय ही है. दुनिया में तीन सौ करोड़ कप चाय रोज पी जाती है। भारत में जितनी चाय उगाई जाती है उसकी 70 फीसदी तो भारत में ही इस्तेमाल हो जाती है.

पानी के बाद दुनियाभर में अगर कोई पेय सबसे ज्यादा पिया जाता है तो वो चाय है. भारत में तो हम जितनी चाय उगाते हैं, उसका 70 फीसदी खुद पी डालते है


 

अब बढ़ने लगा है ग्रीन टी का उपयोग
ही में हरी चाय की खपत ने शहरों में एक बड़ा उछाल देखा है. खपत में औसत वृद्धि 50% से अधिक माना जाता है. ग्रीन टी के बाजार का आकार 1400 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है और अगले कुछ वर्षों में 6000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा.

रूस खरीदता है हमसे सबसे ज्यादा चाय
भारत में उगने वाली चाय का 51 % असम से आता है. 29 प्रतिशत पश्चिम बंगाल से और 12 प्रतिशत तमिलनाडु से. इसमें से भारत से रूस सबसे ज़्यादा चाय खरीदता है. लगभग 777 करोड़ रूपए में 48 मिलियन किलो चाय रूस हर साल भारत से खरीदता है.

कहां है भारत चाय पीने के मामले में 
अगर आपको लगता है कि भारतीय सबसे ज़्यादा चाय पीते हैं तो आप गलत हैं. भारत में चाय पीने वाले देशों के मुकाबले बहुत कम चाय पी जाती है. भारत में एक व्यक्ति एक महीने में लगभग 26 कप चाय पीता है लेकिन इंग्लैंड में 170 कप चाय एक व्यक्ति एक महीने में पी जाता है. भारत इस मामले में चीन और अमेरिका से भी पीछे है.

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First published: May 22, 2020, 3:10 PM IST
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