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International Tiger Day 2021: क्या होगा अगर हम शेरों को खो देंगे?

शेरों (Tigers) का जंगलों के वातवारण पर अन्य जानवरों की तुलना में ज्यादा असर होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

शेरों (Tigers) का जंगलों के वातवारण पर अन्य जानवरों की तुलना में ज्यादा असर होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

International Tiger Day 2021: शेरों के दुनिया से कम होने में मानवीय गतिविधियों का ज्यादा योगदान है और उनके कम होने से जैवविविधता (Biodiversity) और पर्यावरण (Environment) को बहुत ही बड़ा नुकसान होता है.

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    आज दुनिया जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को देख रही है जो दिन ब दिन भयावह होते जा रहे हैं. इसका इसका मानव जीवन से ज्यादा धरती के जानवरों पर भी हुआ है. जब भी पृथ्वी (Earth) को बचाने की बात करते हैं तो उसमें पर्यावरण (Environment) और जंगलों को बचाने की तो बात करते हैं लेकिन दुनिया में विलुप्त होती जीवों की प्रजातियों पर उनती बात नहीं होती. जीवों को बचाने में बाघ यानि शेरों को बचाने के मुहिम पर ज्यादा जोर दिया जाता है. अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस (International Tiger Day 2021) पर हमें यह जानेंगे कि आखिर बाघ को इतना महत्व क्यों दिया जाता है जो 29 जुलाई को पूरी दुनिया मना रही है.

    शेर हमारी पृथ्वी के पर्यावरण के पारिस्थितिकी तंत्र में विविधता और उसकी सेहत को कायम रखने में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं. ये शिकारी जीव खाद्य शृंखला की शीर्ष पर होते हैं. शेरों की जंगलों में जनसंख्या को काबू में रखने खास योगदान होता है. ये शाकाहारी जानवरों को संख्या को बढ़ने से रोकते हैं जिससे वनवस्पति की बेतहाशा वृद्धि नहीं होती है.

    इंसानों का दखल
    लेकिन इस धरती पर मानवों की संख्या बढ़ने से हालात बहुत बदल गए. इंसानों से जंगलों को नष्ट किया और शेरों का शिकार करक उसके अंगों का व्यापार किया जिससे शेरों की संख्या में बहुत तेजी से कम हो गई और इनके अस्तित्व तक का संकट खड़ा हो गया. मानवीय गतिविधियों के कारण शेरों का आवासीय इलाका तक कम हो गया. अब शेरों को बचाने के लिए अभियान चलाने पड़ रहे हैं.

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    शेरों (Tigers) का शिकार ही नहीं उनका आवास क्षेत्र भी कम हो रहा है जिससे उनके अस्तित्व को खतरा बढ़ गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

    शेरों को बचाने की जरूरत
    आज हालात ये हो गए हैं कि शेर उन प्रजातियों में शामिल हो गए हैं जो विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई हैं. इसी लिए शेरों के संरक्षण के लिए दुनिया 29 जुलाई को इंटरनेशनल टाइगर डे मनाती है इस दिन का उद्देश्य पर्यावरण के प्रति लोगों में जागरुकता पैदा करना है जिससे लोग यह समझ सकें कि शेरों को बचाना हमारे जंगलों को बचाने के लिए कितना जरूरी है.

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    29 जुलाई ही क्यों
    29 जुलाई की तारीख खास महत्व रखती है. इस दिन दुनिया के बहुत सारे देशों ने साल 2010 में रूस में हुई सेंट पीटर्सबर्ग टाइगर शिखर सम्मेलन में एक करार किया था. इस समझौते के तहत ये देश  शेरों की घटती जनसंख्या के प्रति जागरुकता फैलाने और उनके प्राकृतिक आवास को बचाने के लिए प्रयास करेंगे.इन देशों के प्रतिनिधियों ने यह ऐलान भी किया कि जिन देशों में बाघ ज्यादा हैं वहां उनकी जनसंख्या 2022 तक दोगुनी करने का प्रयास किया जाएगा.

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    शेरों (Tigers) की कमी के लिए वनों की कटाई भी जिम्मेदार है. (तस्वीर: Pixabay)

    चार प्रजातियां हो चुकी हैं नष्ट
    बाघों की संख्या दुनिया में तेजी से कम हो रही है. विश्व वन्यजीवन निधि के अनुसार आज दुनिया भर में केवल 3900 जंगली शेर बचे हैं. शेर बहुत सारे रंगों में होते हैं सफेद शेर, काली पट्टी वाले भूरे शेर, काली पट्टी वाले सफेद शेर, और सुनहरे शेर. अभी तक बाली शेर, कैस्पियन शेर, जावाई शेर और संकर शेर विलुप्त हो चुके हैं.

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    शेरों का खत्म होना होगा खतरनाक
    शेरों का कम होने वास्तव में बहुत चिंताजनक है क्योंकि इनके खत्म होने से हमारे जंगलों का पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन पूरी तरह से खराब होने की नौबत आ जाएगी. इससे उन जानवरों की संख्या तेजी से बढ़ेगी जिन्हें शेर खाते हैं. ऐसे में जंगलों घास आदि वनस्पति की कमी हो जाएगी क्योंकि उन्हें खाने वाले जानवर बढ़ जाएंगे. इतना ही नहीं सांप, चूहे खाने वाले जानवर जिन्हें शेर खाते हैं बढ़ जाएंगे. ऐसे में सांप चूहे कम होने लगें पूरा संतुलन बिगड़ा जाएगा. इसके अलावा शेरों का शिकार, उनका घटता आवास भी उनकी जनसंख्या कम होने के लिए जिम्मेदार है.

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