किन देशों में सबसे ज्यादा बार इंटरनेट शटडाउन होता है?

कई देश कई वजहों से एक तयशुदा समय के लिए इंटरनेट पर पाबंदी लगाते रहे हैं- सांकेतिक फोटो (pixabay)

इंटरनेट शटडाउन (internet shutdown in India) के मामले में कोई भी देश भारत के आसपास भी नहीं ठहरता. साल 2018 में यहां 134 बार इंटरनेट बंद हुआ, जो अलग-अलग वजहों से अलग राज्यों या क्षेत्रों में किया गया.

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    जी-7 समिट के दौरान देश ने ओपन सोसायटीज स्टेटमेंट पर हामी भरी. इसके मुताबिक राजनैतिक मकसद से इंटरनेट का बंद किया जाना लोकतंत्र के लिए सही नहीं. इस स्टेटमेंट पर भारत ने भी हामी भरी. इसके बाद से एकाएक इंटरनेट शटडाउन का जिक्र छिड़ गया है. इंटरनेट शटडाउन की आंकड़ेवार जानकारी देने वाली संस्था एक्सेस नाऊ इस बात का लेखाजोखा रख रही है कि किस देश में साल में कितनी बार इंटरनेट पर पाबंदी लगाई जाती रही है. लिस्ट में भारत का भी नाम है और वो भी टॉप पर.

    क्या तर्क है इंटरनेट बंद करने का 
    एक्सेस नाऊ के हवाले से स्टेटिस्टिका वेबसाइट में उन देशों का नाम है, जहां कथित तौर पर जानबूझकर इंटरनेट बंद कर दिया जाता है. कई देशों में गृहयुद्ध या राजनैतिक उथलपुथल के दौरान ऐसा किया जाता रहा ताकि देश में अव्यवस्था न बढ़े. यहां समझें कि इंटरनेट जहां जानकारी पहुंचाने का जरिया है, वहीं भड़काऊ बातें या तस्वीरें डालने से काफी लोगों पर असर हो सकता है. ये भी हो सकता है कि ये जानकारी पूरी तरह से फेक हो. ऐसे में कई देश लगातार जानकर इंटरनेट शटडाउन का सहारा लेते रहे.

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    गृहयुद्ध या राजनैतिक उथलपुथल के दौरान इंटरनेट शटडाउन आम है- सांकेतिक फोटो (pixabay)


    अरब देशों में काफी लंबे समय तक शटडाउन 
    ऐसे देशों में इजिप्ट का नाम काफी लिया जाता है. यहां साल 2011 के दौरान काफी तनाव रहा. तब लोगों तक सही-गलत जानकारियां जाने से रोकने के लिए पूरे देश में लंबे समय तक इंटरनेट नहीं था. ऐसे ही साल 2016 में तुर्की में हुआ, जब वहां मिलिट्री ने तख्तापलट किया. ताजा उदाहरण म्यांमार का हो सकता है. वहां सेना ने चुनी हुई सरकार को हटाते हुए सबसे पहले इंटरनेट बंद कर दिया ताकि लोग आंदोलित न हों.

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    भारत में सबसे ज्यादा बार नेट बंद 
    देशों में आंतरिक तनाव से अलग देखें तो भी ज्यादातर देशों में कभी न कभी इंटरनेट शटडाउन होता रहा. भारत इसमें सबसे ऊपर है. साल 2018 में यहां 134 बार इंटरनेट बंद किया गया. ये अलग-अलग राज्यों या जिलों में रहा. इसमें कश्मीर, बिहार के नवादा और पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग का नाम मुख्य है, जहां महीनेभर से ज्यादा समय तक शटडाउन हुआ.

    नुकसान भी हैं शटडाउन के 
    साल 2021 में भी कई बार ये हो चुका है. गलत ताकतों को उकसाऊ बातें पोस्ट करने से रोकने के लिए ये अक्सर जरिया बनता रहा. हालांकि इस शटडाउन के भारी नुकसान भी हैं. एक तो ये होता है कि इससे सरकार पर जनता का यकीन डगमगाता है. उसे लगता है कि कहीं कोई बात छिपाई जा रही है. दूसरे, इससे सही जानकारियां भी लोगों तक पहुंचने से रह जाती हैं.

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    इंटरनेट बंद होने से इकनॉमी पर बुरा असर होता है- सांकेतिक फोटो (pixabay)


    एक बड़ा नुकसान अर्थव्यवस्था का है
    इंटरनेट बंद होने से उस क्षेत्र का व्यापार-व्यावसाय ठप हो जाता है. इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकनॉमिक रिलेशन्स (ICRIER) ने एक रिपोर्ट में बताया कि साल 2012 से 2017 के बीच देश में लगभग 16 हजार घंटों का इंटरनेट शटडाउन हुआ. ये डाटा अलग-अलग इलाकों को मिलाते हुए है. इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को लगभग 3.04 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ.

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    भारत के बाद इंटरनेट शटडाउन के मामले पाकिस्तान, इराक, यमन, इथियोपिया, बांग्लादेश, कांगो और रूस जैसे देशों में भी कॉमन हैं. ये तो हुए वे देश, जहां किसी खास वजह से इंटरनेट जानकर बंद किया जाता है.

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    इंटरनेट से ही चलता है ये यूरोपियन देश 
    एक देश ऐसा भी है, जहां चौबीसों घंटे इंटरनेट चलता है, वो भी मुफ्त. यूरोप के एस्टोनिया में इंटरनेट मुफ्त है और हर सुविधा ऑनलाइन है. यहां के नागरिक टैक्स रिटर्न भरने से लेकर कार पार्किंग की पेमेंट और डॉग बोर्डिंग का शुल्क भी ऑनलाइन देते हैं. अमेरिका की एक गैर सरकारी संस्था Freedom House की मानें तो ये पूरी दुनिया में फ्री इंटरनेट एक्सेस का मॉडल देश है.

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    एस्टोनिया में इंटरनेट पूरी तरह से निःशुल्क है- सांकेतिक फोटो (pxfuel)


    डिजिटल नेशन भी कहलाता है 
    नागरिकों को इंटरनेट से जोड़कर अर्थव्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए एस्टोनिया में 1996 में देशव्यापी कार्यक्रम शुरू हुआ और आज ये पूरी तरह डिजिटल देश हो चुका है. देशभर में 3 हजार से ज्यादा फ्री wifi स्पॉट हैं, इनमें कॉफी शॉप, पेट्रोल पंप, रेस्त्रां, स्कूल-कॉलेज, अस्पताल, होटल और सभी सरकारी दफ्तर आते हैं. यहां चुनावों में वोटिंग भी ऑनलाइन की जाती है.

    इंटरनेट मुफ्त होने के बाद भी नहीं है साइबर क्राइम
    देश में हर तरफ फ्री wifi होने के बावजूद साइबर क्राइम नहीं के बराबर है, जो चौंकाने वाली बात है. इसकी वजह ये भी मानी जाती है कि एस्टोनियन सरकार समय-समय पर नेट के सही इस्तेमाल पर कैंपेन चलाती रहती है. वैसे यहां इंटरनेट तो फ्री है लेकिन कई चीजों के एक्सेस पर रेस्ट्रिक्शन है. जैसे गैंबलिंग एक्ट के तहत किसी भी घरेलू और फॉरेन गैंबलिंग साइट को स्पेशल लाइसेंस की जरूरत होती है. लाइसेंस न होने पर वे बंद कर दिए जाते हैं. मार्च 2020 तक Estonian Tax and Customs Board ने ऐसी 1200 वेबसाइट्स छांटी, जिन्हें बंद करने की जरूरत थी क्योंकि उनके पास लाइसेंस नहीं था.

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