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आप सोच भी नहीं सकते इंटरनेट शटडाउन से कितना बड़ा होता है नुकसान

अलीगढ़ में 5 दिनों बाद इंटरनेट सेवाएं बहाल (file photo)

अलीगढ़ में 5 दिनों बाद इंटरनेट सेवाएं बहाल (file photo)

सरकार अफवाह (rumours), भड़काऊ और भ्रामक खबरों को फैलने से रोकने के लिए इंटरनेट शटडाउन (internet shutdown) करती है. हालांकि आप सोच भी नहीं सकते कि इंटरनेट शटडाउन से कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है और खुद सरकार को इससे कितना आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है

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नागरिकता संशोधन एक्ट (Citizenship Amendment Act) पर लोगों के हिंसक विरोध प्रदर्शन (violent protest) को देखते हुए कई इलाकों के इंटरनेट कनेक्शन (internet connection) बंद किए गए हैं. विरोध प्रदर्शन की वजह से किसी तरह की अफवाह नहीं फैले, इसलिए एहतियाती उपाय के तौर पर इंटरनेट शटडाउन (shutdown) कर दिया जाता है. आजकल पुलिस प्रशासन किसी भी तनावग्रस्त इलाके में शांति व्यवस्था बहाल करने के लिए सबसे पहला काम करती है- इंटरनेट कनेक्शन को शटडाउन करना.

नागरिकता संशोधन एक्ट के खिलाफ लोगों के उग्र और हिंसक प्रदर्शन को देखते हुए असम में 10 दिनों तक इंटरनेट कनेक्शन बंद रहा. गुरुवार को दिल्ली में हुए जबरदस्त विरोध प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी के कई इलाकों में इंटरनेट को बंद कर दिया गया. मेंगलुरु में इंटरनेट कनेक्शन बंद है. उत्तर प्रदेश गुजरात और बिहार के कई हिस्सों में इंटरनेट कनेक्शन को शटडाउन किया गया है.

इंटरनेट कनेक्शन शटडाउन से क्या होता है
सरकार अफवाह, भड़काऊ और भ्रामक खबरों को फैलने से रोकने के लिए इंटरनेट शटडाउन करती है. हालांकि आप सोच भी नहीं सकते कि इंटरनेट शटडाउन से कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है और खुद सरकार को इससे कितना आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. आमतौर पर लोग सोचते हैं कि इंटरनेट शटडाउन की वजह से वॉट्सऐप, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया साइट्स के बंद हो जाने से अफवाह नहीं फैलती और बिगड़े कानून व्यवस्था में शांति बहाली में मदद मिलती है. हालांकि इंटरनेट शटडाउन से होने वाले नुकसान कहीं अधिक बड़े हैं.

इंटरनेट शटडाउन से कैसी मुश्किलें आती हैं
सबसे पहली बात की इससे टेलीकॉम्यूनिकेशन कंपनियों को आर्थिक नुकसान पहुंचता है. टेलीकॉम्यूनिकेशन कंपनियों के नुकसान होने की स्थिति में सरकार को भी आर्थिक चपत लगती है. दूसरी सबसे बड़ी बात है कि आज का पूरा सिस्टम कंप्यूटर और इंटरनेट से जुड़ा है. जीवन के हर कदम पर आपको इंटरनेट की जरूरत पड़ती है. इंटरनेट नहीं होने की वजह से आपको अपने मोबाइल पर खबरें नहीं मिलेंगी, बैंको का काम-काज ठप हो जाएगा.

 internet shutdown you can not imagine how net suspension affect economy
हिंसक विरोध प्रदर्शन पर कई जगहों की इंटरनेट सेवा बंद की गई हैं


आप पेटीएम और एटीएम के जरिए डिजिटल पेमेंट नहीं कर सकते. ऑनलाइन शॉपिंग को आप भूल ही जाइए. ट्रेन रिजर्वेशन आप नहीं करवा सकते. सफर के लिए ओला-ऊबर जैसी कैब फैसिलिटी का इस्तेमाल नहीं करते. खाने-पीने के लिए स्वीगी और जोमैटो जैसे ऐप का इस्तेमाल नहीं कर सकते. इस तरह से न जाने कितने उदाहरण हैं, जिसमें आप इंटरनेट बंद होने की स्थिति में इनकी सुविधाओं का इस्तेमाल नहीं कर सकते.

इस वजह से हर स्तर पर आर्थिक नुकसान होता है. व्यक्तिगत और कंपनियों को नुकसान तो होता ही है, सरकार को भी बड़ी आर्थिक चपत लगती है.

इंटरनेट शटडाउन से कितना आर्थिक नुकसान
इंटरनेट सुविधा बंद रखने की वजह से बड़ा आर्थिक नुकसान होता है. एक आंकड़े के मुताबिक भारत में पिछले 5 वर्षों में तकरीबन 16 हजार घंटों तक के लिए इंटरनेट शटडाउन रहा है. इससे करीब 3.04 बिलियन डॉलर यानी करीब 21,584 करोड़ का नुकसान हुआ है. इस आंकड़े को इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशन ने जारी किया है.

कश्मीर में लंबे वक्त तक इंटरनेट शटडाउन रहा है. पिछले महीने कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने कहा था कि 5 अगस्त से सिर्फ कश्मीर को इंटरनेट शटडाउन की वजह से 100 बिलियन यानी करीब 10 हजार करोड़ का नुकसान हो चुका है. कश्मीर में सिर्फ टेलीकॉम्यूनिकेशन कंपनियों को हर दिन 4 से 5 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा था.

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तनावग्रस्त इलाकों की इंटरनेट सेवा बंद की जाती हैं


आजकल ऑनलाइन मार्केटिंग का जमाना है. इसलिए इंटरनेट शटडाउन की वजह से कारोबार को तगड़ा झटका लगता है. सिर्फ बड़े-बड़े सेलर्स ही नहीं बल्कि छोटे वेंडर भी इससे प्रभावित होते हैं.

भारत में होता है सबसे ज्यादा इंटरनेट शटडाउन
पिछले साल इंटरनेट शटडाउन को लेकर यूनिस्को की एक रिपोट आई थी. इस रिपोर्ट में बताया गया था कि दक्षिण एशिया में सबसे ज्यादा इंटरनेट शटडाउन होते हैं. मई 2017 से लेकर अप्रैल 2018 के बीच दक्षिणी एशिया के देशों में इंटरनेट शटडाउन की 97 घटनाएं हुईं. इनमें से 82 इंटरनेट शटडाउन के मामले भारत के थे. इंटरनेट शटडाउन के मामले ज्यादा होने पर इसे अभिव्यक्ति और प्रेस की अजादी पर पाबंदी लगाने की कोशिश के तौर पर देखा जाता है.

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