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जानिए, कहीं विदेशी साइबर जासूसों की नजर आपके कंप्यूटर पर तो नहीं

जानिए, कहीं विदेशी साइबर जासूसों की नजर आपके कंप्यूटर पर तो नहीं

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

दुनिया के लगभग तमाम देशों में इंटरनेट के जरिए जासूसी हो रही है.

    इंटरनेट पर किसी से अपनी परेशानी या सीक्रेट बांटते हुए संभल जाएं क्योंकि आपके सीक्रेट किसी और की स्क्रीन पर भी खुले हुए हैं. ये जासूस आपका अपना देश या फिर अमेरिका भी हो सकता है. किसी भी तरह का शक होने पर तपाक से आपकी सारी सीक्रेट जानकारी सबके सामने आ सकती है. दुनिया के लगभग तमाम देशों में कुछ कम-ज्यादा लेकिन इंटरनेट के जरिए जासूसी हो रही है. अमेरिका अक्सर सवालों के घेरे में आता रहा है, तो चीन और रूस भी इस लिस्ट में हैं.

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    किसलिए उठा जिक्र
    हाल ही में केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने 10 केन्द्रीय एजेंसियों को देश के किसी भी कंप्यूटर की जासूसी करने की इजाजत दे दी है. केंद्र का तर्क है कि ऐसा देश की सुरक्षा के मद्देनजर किया जा रहा है. इस आदेश के तहत भारतीय इंटेलिजेंस ब्यूरो, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय, सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स, डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस, सीबीआई, एनआईए, रॉ, डायरेक्टरेट ऑफ सिग्नल इंटेलिजेंस और दिल्ली कमिश्नर ऑफ पुलिस किसी भी भारतीय नागरिक के कंप्यूटर पर किसी भी सूचना या दस्तावेज को देख सकती है.



    किस तरह होती है जासूसी
    वैसे तो लगभग सभी कंपनियों जैसे गूगल, फेसबुक के पास ग्राहकों की अलग-अलग जानकारी होती है लेकिन साथ ही सरकारी खुफिया एंजेसियों के पास भी ये हक होता है कि वे ग्राहकों की सारी जानकारी एक्सेस कर सकें. जब भी उन्हें कोई संदेह हो, वे अपने कंप्यूटर से आपके कंप्यूटर को जोड़कर देख सकते हैं कि आप क्या कर रहे हैं. भारतीय नागरिकों की सारी जानकारी अमेरिका को भी रहती है क्योंकि सभी बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइट्स वहीं से रजिस्टर्ड हैं. हालांकि इंटरनेस पर निगरानी का अधिकार देश अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लेते हैं. ज्यादातर सभी देशों ने इंटरनेट पर कई तरह के फिल्टर भी लगा रखे हैं ताकि नागरिक किसी आपत्तिजनक साइट को सर्च न कर सकें.

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    एक कंज्यूमर सिक्योरिटी साइट सिक्योरिटी बारन ने इसी साल एक लिस्ट जारी की है, जिसमें उन देशों का जिक्र है जहां सरकारें इंटरनेट पर अपने ही नागरिकों की जासूसी कर रही हैं. इसकी तीन प्रमुख श्रेणियां हैं.

    वे देश जहां कई चीजें ब्लॉक हैं- इनमें सऊदी अरब, सीरिया. चीन, क्यूबा, यूएई, इरान, उजबेकिस्तान, वियतनाम, नॉर्थ कोरिया, ओमन, कतर और यमन शामिल हैं. यहां बहुत सारी चीजें खोली ही नहीं जा सकती हैं. यही वजह है कि सोशल नेटवर्किंग के लिए भी यहां कई अपनी साइट्स बनाई जा चुकी हैं.

    वे देश जहां कई स्तर पर हल्के-फुल्के फिल्टर होते हैं- ये देश हैं बर्मा, रूस, पेलेस्टीन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, सूडान, थाइलैंड और साउथ कोरिया.

    यहां है सलेक्टिव सेंसरशिप- भारत भी इसी श्रेणी में आता है. साथ में ब्रिटेन, कजाकिस्तान, भूटान, कंबोडिया, लीबिया, मलेशिया, इजीप्ट, माली, मोरक्को, रवांडा, सिंगापुर, श्री लंका, टर्की, और यूएसए भी शामिल हैं.



    ये देश कर रहे जासूसी
    इंटरनेट पर जासूसी करने के सबसे ज्यादा आरोप अमेरिका पर लगते रहे हैं क्योंकि वहीं पर लगभग सारे बड़े कंपनियों के हेड-क्वाटर हैं. वहीं अमेरिका चीन पर इस तरह के आरोप लगाता रहा है. हाल ही में अमेरिका ने चीन पर भारत समेत 12 देशों में साइबर जासूसी करने का आरोप लगाया है. अमेरिका के अनुसार चीन ने पूरी योजना बनाकर अपने दो मास्टरमाइंड हैकरों को इस काम पर लगाया. दूसरी ओर चीन ने अमेरिका पर उलटवार करते हुए कहा कि चीन के मजबूत आर्थिक-राजनैतिक हालातों पर परेशान अमेरिका उसकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहा है.

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    रूस पर भी समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर जासूसी के आरोप लगते रहे हैं. इसी साल सितंबर के अंत में अमेरिका, नीदरलैंड और ब्रिटेन ने आरोप लगाया कि रूस ने कई देशों की बड़ी संस्थाओं के लिए हैकर तैनात कर रखे हैं. कनाडा ने भी कुछ इसी तरह का आरोप रूस पर लगाया कि वो लगातार उनके महत्वपूर्ण विभागों पर नजर रखे हुए था ताकि वक्त पड़ने पर कोई बड़ा नुकसान कर सके. वहीं रूस के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ये सारे देश मिलकर योजनाबद्ध तरीके से बदनाम कर रहे हैं.



    गूगल सब जानता है
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