ईरान के पास हत्यारी डॉल्फिनों की टुकड़ी. पलक झपकते करती हैं हमला

ईरान के पास हत्यारी डॉल्फिनों की टुकड़ी. पलक झपकते करती हैं हमला
ईरान के पास किलर डॉल्फिन की फौज

दुनिया की दो जानी-मानी वेबसाइट्स का दावा है कि ईरान की नौसेना के पास हत्यारी डॉल्फिन की ब्रिगेड है. जो अपने साथ विस्फोटक लेकर जा सकती है. दुश्मन जहाजों पर चुपचाप घातक हमला कर उन्हें बर्बाद कर सकती है. जानिए कैसी ये डॉल्फिन मछलियों की खतरनाक ब्रिगेड

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 10, 2020, 7:05 PM IST
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ईरान के पास कुछ ऐसे हैरतभरे हथियार हैं कि आप चौंक जाएंगे. उसके पास खतरनाक हत्यारी डॉल्फिनों की पूरी टुकड़ी है. करीब 17 साल पहले ईरान की इस किलर ब्रिगेड का सामना एक अमेरिकी टुकड़ी से भी हो चुका है, हालांकि ये सामना एक सैन्य अभ्यास के दौरान हुआ था.

अब दो बड़ी न्यूज वेबसाइट्स डेली स्टार और मिलिट्री डॉट कॉम ने अपनी ताजा रिपोर्ट्स के जरिए इसकी पुष्टि की है. उनका कहना है कि ईरान के पास ऐसी हजारों डॉल्फिन हैं. ईरान उन्हें अपने सैन्य इस्तेमाल के लिए कई बरसों से रख रहा है.
दरअसल सोवियत संघ ने डॉल्फिन की सेना बनाने का एक प्रोजेक्ट शुरू किया था लेकिन सोवियत संघ के ढहने के बाद ये प्रोजेक्ट भी खटाई में पड़ गया. जब इसे बंद किया जा रहा था तब इन डॉल्फिन के ट्रेनर बोरिस ज्यूरिद ने उन्हें एक सर्कस बनाने के लिए खरीद लिया.

ट्रेनर ने इन डॉल्फिनों के साथ एक नये किस्म का डॉल्फिनेरियम खोला, जहां इनके जरिए अजब-गजब करतब दिखाए जाते थे. लेकिन जब रूस के लोगों की दिलचस्पी इसमें खत्म हो गई तो डॉल्फिनों के खाने के लाले पड़ने लगे.
हत्यारी डॉल्फिन का खतरनाक अंदाज. ईरान नौसेना में डॉल्फिन टुकड़ी की भूमिका वाकई खास है




चुपचाप दुश्मन के जहाज पर हमला और विध्वंस में सक्षम
तभी इस ट्रेनर ने बड़ी संख्या में इसको खरीदने वाले की तलाश की. ईरान ने उसमें दिलचस्पी दिखाई. ये हत्यारी डॉल्फिन ब्रिगेड ईरान के पास पहुंच गई. वहां भी शुरू में उन्हें बोरिस ने ही ट्रेंड किया.
ये हत्यारी डॉल्फिन वाकई बहुत खतरनाक हैं. ये पलक झपकते और चुपचाप दुश्मन के जहाज पर विस्फोटकों के साथ आक्रमण करने में सक्षम हैं. इनकी संख्या एक हजार से ज्यादा बताई जा रही है.

मिलिट्री डॉट कॉम साइट के अनुसार, 1991 में जब सोवियत संघ का पतन हो गया तो उसकी डॉल्फिन यूनिट को क्रीमिया प्रायद्वीप भेज दिया गया था. वहां उन्हें इस तरह तैयार किया गया कि वो हमले में दुश्मन की जान ले सकें. इन पनडुब्बियों की सबसे खास बात ये है कि वो दुश्मन के जहाज और पनडुब्बियों को पानी के भीतर उनकी आवाज से पहचान लेती हैं.

हथियार लेकर हमले के लिए जाती हुई किलर डॉल्फिन टुकड़ी की एक सैनिक


कई देश अपनी सेना में करते हैं जानवरों का इस्तेमाल
गौरतलब है कि डॉल्फिन की उम्र करीब 50 साल तक होती हैं. ये माना जाता है कि उनके पास मनुष्य के बाद सबसे ज्यादा दिमाग होता है. यूं भी सोवियत संघ और रूस में जानवरों को सेना में इस्तेमाल करने का पुराना रिकॉर्ड रहा है. उनके जरिए वो जासूसी के काम के साथ कई हमलवार कामों को अंजाम देते रहे हैं. अब भी कई देशों में जानवरों, पक्षियों और समुद्री जीवों को सेना के काम में इस्तेमाल किया जा रहा है.

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