कितना ताकतवर है इंटरपोल, जिसकी मदद से प्रेसिडेंट ट्रंप गिरफ्तार हो सकते हैं?

कितना ताकतवर है इंटरपोल, जिसकी मदद से प्रेसिडेंट ट्रंप गिरफ्तार हो सकते हैं?
इंटरपोल का पूरा नाम इंटरनेशनल क्रिमिनल पुलिस ऑर्गेनाइजेशन है (Photo-interpol)

ईरान ने प्रेसिडेंट ट्रंप की गिरफ्तारी के लिए इंटरपोल (Iran requests Interpol to issue red notice for Donald Trump arrest) से रेड नोटिस जारी करने की रिक्वेस्ट की है. जानिए, क्या है इंटरपोल (what is Interpol) और कैसे इसके पास इतनी ताकत है.

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ईरान अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी कर चुका है. ट्रंप के खिलाफ ये वारंट ईरान के सैन्य जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या के आरोप में निकला है. अब ईरान ने रेड नोटिस के लिए इंटरपोल से मदद मांगी है ताकि ट्रंप की गिरफ्तारी हो सके. बता दें कि इंटरपोल टॉप लेवल पर बैठे लोगों के लिए रेड नोटिस निकालता है ताकि अरेस्ट की प्रक्रिया आसान हो सके. भारत में भी सीबीआई ने कुछ ही समय पहले नीरव मोदी, मेहुल चोक्सी और विजय माल्या को आर्थिक घपलों के आरोप में देश लौटाने के लिए इंटरपोल की मदद मांगी थी.

क्या है इंटरपोल
इसका पूरा नाम इंटरनेशनल क्रिमिनल पुलिस ऑर्गेनाइजेशन है. 192 देश इसके सदस्य हैं, जिनमें से एक भारत भी है. साल 1923 में इस संगठन की स्थापना हुई थी, जिसका हेडक्वार्टर फ्रांस के लिऑन में तैयार हुआ. इसका मकसद है दुनियाभर की पुलिस इकट्ठे काम करे ताकि खूंखार और ऊंची पहुंच वाले अपराधियों को पकड़ा जा सके और दुनिया सुरक्षित रहे. मॉर्डन समय में चूंकि क्रिमिनल्स भी तकनीकों का सहारा लेकर काम करते हैं तो इंटरपोल भी तकनीकी तौर पर काफी संपन्न है ताकि अपराधी उसकी पकड़ से बच न सकें.

ईरान ने रेड नोटिस के लिए इंटरपोल से मदद मांगी है ताकि ट्रंप की गिरफ्तारी हो सके




भारत कब से इसका सदस्य है?


भारत साल 1956 से इसका सदस्य है. दूसरे सारे सदस्यों की तरह हमारे यहां भी नेशनल सेंट्रल ब्यूरो (NCB) है. ये एक तरह से भारत की कानूनी संस्थाओं और पुलिस को इंटरनेशनल लेवल पर इंटरपोल से जोड़ता है. इसमें कई लोग होते हैं जो इंटरपोल से सीधे संपर्क में होते हैं. हमें बहुतों बार इंटरपोल की मदद की जरूरत होती है, खासकर इंटरनेशनल लेवल पर तस्करी के मामलों में, बड़े स्तर के आर्थिक घपलों में, जब आरोपी देश छोड़कर भाग जाता है. ड्रग्स और नकली दवाओं के रैकेट के मामले में भी भारत कई बार इंटरपोल से मदद ले चुका है.

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इंटरपोल क्या और कैसे करता है?
अपराधी के टॉप स्तर पर बचने की कोशिश का पता चलते ही इंटरपोल सक्रिय हो जाता है. ये तुरंत काम शुरू करता है. इसके तहत सूचनाओं का लेन-देन होता है और रिसर्च होती है कि कोई व्यक्ति या संगठन किस तरह से क्राइम को अंजाम दे रहा है और कैसे उसे खत्म किया जा सकता है. काफी खुफिया स्तर पर काम होता है जिसमें कोड लैंग्वेज का इस्तेमाल होता है. इसमें कलर कोड की भी काफी अहमियत होती है. इसी के तहत चार तरह के नोटिस इंटरपोल जारी करता है, जो इसकी सबसे बड़ी ताकत है.

मेजर जनरल कासिम सुलेमानी ईरान के साथ सीरिया और इराक में भी काफी ख्यात थे


इसमें इंग्लिश, स्पेनिश, फ्रेंच और अरेबिक में काम होता है. वैसे इंटरपोल के पास अरेस्ट की ताकत नहीं होती. अगर कोई सदस्य देश इस तरह की रिक्वेस्ट करता है तो इंटरपोल उस संदेश को दूसरे देशों को भेजता है. वहां से जो संदेश मिलते हैं, वो उस देश तक पहुंचाए जाते हैं, जिसने रिक्वेस्ट की है.

किस तरह के नोटिस जारी करता है इंटरपोल?
रेड नोटिस- इसके तहत आरोपी/दोषी को किसी खास देश के अनुरोध पर उस देश से सौंपने की रिक्वेस्ट करना है, जहां वो है. इसके लिए पक्का नेशनल अरेस्ट वारंट चाहिए होता है तभी इंटरपोल ऐसी रिक्वेस्ट कर पाता है. हालांकि, भगोड़े की गिरफ्तारी उस सदस्य राष्ट्र के शासन पर आधारित होती है, जहां वह है.

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यलो नोटिस- लापता लोगों का पता लगाने में मदद करने के लिए यलो नोटिस जारी किया जाता है. ये अक्सर नाबालिकों या ऐसे लोगों के लिए जारी होता है जो खुद अपनी पहचान में असमर्थ होते हैं, जैसे मानसिक तौर पर दिव्यांग लोग. मानव तस्करी का रैकेट बड़े स्तर पर काम करता है. तब इंटरपोल इसे पहचानने में काफी काम आता है. इसी तरह से किसी प्राकृतिक आपदा के दौरान काफी लोग लापता हो जाते हैं. तब भी उनका पता लगाने के लिए इंटरपोल मदद करता है.

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ब्लू नोटिस- किसी अपराध के संबंध में किसी खास की पहचान, स्थान या गतिविधियों के बारे में अतिरिक्त जानकारी जमा करने के लिए ब्लू नोटिस जारी किया जाता है. हालांकि यह व्यक्ति के प्रत्यर्पण या गिरफ्तारी की गारंटी नहीं देता है.

इसी तरह से ब्लैक, ग्रीन, ऑरेंड और पर्पल नोटिस भी होते हैं. सबके अलग-अलग मकसद हैं. ऑरेंज नोटिस भी काफी महत्वपूर्ण है. इसके तहत इंटरपोल किसी ऐसी घटना के बारे में अलर्ट जारी करता है, जिस दौरान काफी बड़ी साजिश का डर हो. जैसे किसी उत्सव के दौरान बम ब्लास्ट की प्लानिंग या कोई और आतंकी गतिविधि का सुराग मिलना.

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ईरान ने ट्रंप के मामले में इंटरपोल से रेड नोटिस जारी करने को कहा है. हालांकि अब तक इंटरपोल से इसका जवाब नहीं आया है. ईरान का कहना है कि ट्रंप के ही आदेश पर मेजर जनरल कासिम सुलेमानी को मारा गया. दरअसल सुलेमानी ईरान में काफी ख्यात थे. वे वहां रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के विदेशी आर्मी के प्रमुख थे. ईरान के साथ वो सीरिया और इराक में भी उनकी काफी लोकप्रियता थी. सुलेमानी पश्चिमी देशों में इस्लामिक क्रांति लाने की कोशिश में थे. और माना जा रहा था कि उनकी कोशिश पश्चिमी देशों और खासकर अमेरिका को अस्थिर करने की थी. इसी वजह से इसी साल 3 जनवरी को अमेरिका ने सुलेमानी को बगदाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हवाई हमले में मार गिराया.
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