Explained: क्या म्यांमार में सरकार गिराने के पीछे China का हाथ है?

म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के बीच एक के बाद एक हंगामा हो रहा है (Photo- news18 English via Reuters)

म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के बीच एक के बाद एक हंगामा हो रहा है (Photo- news18 English via Reuters)

म्यांमार में सैन्य तख्तापलट (military coup in Myanmar) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान लोग हाथ में "Myanmar coup, Made in China" की तख्तियां लिए हुए हैं और चाइनीज सामानों का बहिष्कार कर रहे हैं.

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  • Last Updated: March 16, 2021, 11:31 AM IST
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म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के बीच एक के बाद एक हंगामा हो रहा है. चुनी हुई सरकार के समर्थन में एक ओर लोग सड़कों पर उतर आए हैं तो दूसरी ओर अब चीन के खिलाफ भी म्यांमारी जनता का गुस्सा उबल रहा है. आक्रोश यहां तक बढ़ा कि स्थानीय लोगों ने चीन की 10 फैक्ट्रियों को आग के हवाले कर दिया. लेकिन यहां समझने की बात है कि आखिर म्यांमार में सेना के राज ने क्यों जनता को चीन के खिलाफ कर दिया?

सबसे पहले तो म्यांमार में तख्तापलट की वजह समझते हैं

बता दें कि साल 2020 के नवंबर में ही इस देश में चुनाव हुए, जिसमें आंग सान सू ची की पार्टी भारी मतों से जीती. उनके खिलाफ सेना के लोग खड़े हुए थे. चुनाव के नतीजों के बाद सैन्य नेता आरोप लगाने लगे कि देश में तो उनकी लोकप्रियता ज्यादा है. ऐसे में भला सू ची की पार्टी कैसे जीत सकती है. चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए सेना 1 फरवरी 2021 को सरकार गिराते हुए जीती हुई पार्टी के सारे नेताओं को जेल में डाल दिया.

Myanmar coup
बौद्ध-बहुल देश में लगभग सभी सेना के शासन के खिलाफ हैं (Photo- news18 English via Reuters)

म्यांमार के हालात दिनोंदिन खराब हो रहे

लोकतंत्र समर्थन में जनता तानाशाही का विरोध कर रही है. अटकलें तो यहां तक हैं कि चीन ने ही म्यांमार पर अपने कब्जे के लिए सेना का सहारा लिया है. यहां बता दें कि लंबे समय तक म्यांमार को चीन का बैक डोर कहा जाता था. यहां के बंदरगाहों के रास्ते चीन दुनियाभर में अपना व्यापार फैला चुका था. हाल के दिनों में चीन की बढ़ती दखलंदाजी से परेशान म्यामांर ने चीन की बजाए भारत से संबंध बेहतर किए तो चीन परेशान हो गया. वो लगातार इसके बाद से ही म्यांमार में राजनैतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश में रहा. ताजा सत्ता पलट के पीछे भी चीन का कहीं न कहीं हाथ माना जा रहा है.

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सेना समेत स्थानीय दलों से चीन के बढ़िया संबंध

दरअसल म्यांमार में कई कट्टरवादी समूह हैं, जिनसे चीन के अच्छे संबंध हैं. एमस्टर्डम आधारित थिंक टैंक यूरोपियन फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज (ईएफएसएएस) ने दावा किया था कि चीन एथनिक समूहों और सेना के जरिए म्यांमार में लोकतंत्र को खत्म कर वापस अपनी कमजोर हो रही पैठ मजबूत करने की फिराक में रहा. इसके लिए वो चरमपंथी समूह अराकान आर्मी से संबंध बनाए हुए है. वो म्यांमार के स्थानीय दल को हथियारों की मदद देता और बदले में म्यांमार और पड़ोसी देशों में अस्थिरता पैदा करता रहा. अब चीन को इस कोशिश में म्यांमार की सेना का खुला साथ मिला है.

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म्यांमार की सड़कों पर सेना के साजोसामान हैं (Photo- news18 English via Reuters)


म्यांमार की चुनी हुई सरकार से चीन खासतौर पर चिढ़ता रहा

इसकी कई वजहें रहीं, जैसे एक तो पार्टी की नेता सू ची को भारत से खास लगाव रहा. वो लगातार भारत के पक्ष में बोलती रहीं. इसके अलावा उन्होंने म्यांमार को चीन के अलिखित कब्जे से मुक्त कराने की बात की. जैसे फिलहाल चीन कई दूसरे देशों जैसे ताइवान की तरह ही म्यांमार को भी हथियाना चाहता है. इसके लिए उसने इस देश में निवेश के नाम पर भारी पैसे लगाए हैं. हालांकि चुनी हुई सरकार ने आते ही चीन के और निवेश के प्रस्ताव पर साफ इनकार कर दिया, जिससे चीन और भड़क गया. इसके साथ ही दो महीने के भीतर सैन्य तख्तापलट हो गया.

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चीन का हो रहा विरोध

यही देखते हुए लोकतंत्र समर्थकों ने सड़कों पर उतर केवल सेना का विरोध शुरू नहीं किया, बल्कि चीन का विरोध कर रहे हैं. उन्होंने चीन की एक-दो नहीं, बल्कि 10 फैक्ट्रियों में आग लगी दी. साथ ही चीनी लोगों पर हमला भी हुआ. इसके अलावा प्रदर्शनकारी चीन के सामानों के बायकॉट की मांग कर रहे हैं.

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म्यांमारी जनता चीनी सामानों को आग के हवाले कर रही है (Photo- news18 English via Reuters)


चीनी उत्पादों के बहिष्कार की अपील

प्रदर्शन के दौरान वे हाथों में तख्तियां लिए हुए हैं, जिनपर ऐसी बातें लिखीं हैं. मिसाल के तौर पर तख्तियों पर लिखा है- "Myanmar coup, Made in China" यानी म्यांमार में तख्तापलट चीन की देन है. इसके साथ ही म्यांमारी जनता धड़ल्ले से चीनी सामानों को आग के हवाले कर रही है और भारत से सामान खरीदने की अपील कर रही है, भले ही वे चीन की तुलना में ऊंची कीमत पर मिलें.

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इस बीच म्यांमार की सेना और आक्रामक हो रही है. कारखानों में आगजनी के बाद उसने गोलाबारी की, जिसमें लगभग 50 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई. अब मानवाधिकार संस्थाएं भी म्यांमारी सेना और चीन की मिलीभगत की बात उठाते हुए सेना की हिंसा रोकने को कह रही हैं. हालांकि म्यांमार में फिलहाल हालात जस के तस हैं.
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