क्या किसी गहरी साजिश का नतीजा है कोरोना वायरस, चीन ने क्यों उठाई अमेरिका पर अंगुली

क्या कोरोना वायरस को चीन के बाहर कहीं किसी लैब में पैदा किया गया?
क्या कोरोना वायरस को चीन के बाहर कहीं किसी लैब में पैदा किया गया?

दुनियाभर में फैले कोरोना वायरस के कोहराम के बीच चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आरोप लगाया है कि जब अक्टूबर में चीन के वुहान शहर में विश्व सैन्य खेल हुए थे, तभी अमेरिकी सैनिकों की टीम ने साजिश के तहत इस वायरस को उस शहर में प्लांट किया, उसके बाद से ही ये बीमारी वुहान में फैलने लगी

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 17, 2020, 1:28 PM IST
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कोरोना का हाहाकार पूरी दुनिया में छाया हुआ है. 17 मार्च तक ये 162 देशों में पहुंच चुका है. 7100 से ज्यादा मौतें हो चुकीं थीं. 1.8 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हैं. हालांकि करीब 80 हजार लोगों का उपचार भी हो चुका है. लेकिन अगर अमेरिका, रूस और चीन के मीडिया और नेताओं की बात करें तो वो ये मान रहे हैं कि कोरोना वायरस अपने आप पैदा नहीं हुआ बल्कि इसे पैदा किया गया है. चीन, रूस और ईरान इसके लिए सीधे अमेरिका को निशाने पर ले रहे हैं.

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पहली बार ट्विट करके आशंका जाहिर की है कि कोरोना गहरी साजिश के जरिए चीन आया है. उन्होंने इसके लिए अमेरिका की सेना को जिम्मेदार माना है.

कोरोना वायरस के चीन में हाहाकार मचाने के बाद से ही ये दबेछिपे तरीके से ये आवाजें भी उठी हैं कि कोरोना वायरस एक गहरी साजिश का नतीजा हो सकता है. पिछले एक महीने में दुनियाभर में कोरोना के साजिश के तहत पैदा किए जाने की बातें सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में अपने अपने तरीके से होती रही हैं.



चीन का आरोप अमेरिकी सेना ने फैलाया कोरोना
सीएनएन और कई दूसरे न्यूज मीडिया ने एक रिपोर्ट पब्लिश की है. इसके अनुसार 15 मार्च को पहली बार चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने ट्वीट कर इसे अमेरिकी आर्मी की साजिश बताया. उन्होंने ट्वीट किया, ये वायरस दरअसल अमेरिकी सेना ने ही चीन में छोड़ा था. हालांकि चीन के सोशल मीडिया में ये बात काफी समय से कयासों के तौर पर चल रही है.


दरअसल पिछले साल चीन में वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स हुए थे, जिसमें अमेरिका ने भी अपने सैनिक एथलीटों की लंबी चौड़ी टीम भेजी थी. ये इवेंट अक्टूबर में वुहान में ही हुए थे. जहां ये टीम ठहरी थी, वो जगह वुहान के चर्चित सी-फूड मार्केट के पास ही है. मिलिट्री गेम्स खत्म होने के बाद ही नवंबर में वहां एक रहस्यमयी बीमारी के फैलने की खबरें आने लगीं. चीन के सोशल मीडिया में लंबे समय से कहा जा रहा है कि अमेरिकी टीम ने चीन में इस वायरस को प्लांट किया है.

रूस के सोशल मीडिया ने भी अमेरिका पर आरोप लगाया
मार्च में अमेरिका ने आरोप लगाया कि रूस से ताल्लुक रखने वाले कुछ सोशल अकाउंट्स और मीडिया द्वारा बड़े पैमाने पर ये बातें फैलाई जा रही हैं कि कोरोना वायरस का प्रहार अमेरिका के जरिए किया गया है. उसने जानबूझकर कोरोना वायरस का जैविक हथियार बनाया और उसे वुहान में छोड़ा, जहां से ये बीमारी नवंबर के आखिरी हफ्ते या फिर दिसंबर के पहले हफ्ते में फैलनी शुरू हुई.

दिसंबर में आईं थी चीन में रहस्यमय बीमारी की खबर
वुहान में दिसंबर में जब ये बीमारी फैल रही थी तब केवल इतनी ही खबरें आ रही थीं कि वुहान में एक रहस्यमय बीमारी किसी वायरस से फैल रही है. चीन इसे सीक्रेट रखने की कोशिश कर रहा है लेकिन मरीज बढ़ते जा रहे हैं. वास्तव में तब चीन ने दुनियाभर से इस बीमारी और इसके मरीजों की संख्या के बारे में छिपाया. चीन पूरे दिसंबर कोशिश करता रहा कि इस बीमारी का पता दुनिया को नहीं लगने दिया जाए.

रूस के विदेश मंत्री का खंडन
अमेरिका ने जब ये आरोप लगाया कि रूस बड़े पैमाने पर इस तरह की स्टोरीज फैला रहा है कि ये बीमारी अमेरिका ने फैलाई है तो रूस के विदेश मंत्री ने तुरंत इसका खंडन कर दिया. उन्होेंने इन फैलती हुई खबरों को फेक न्यूज कहा. हालांकि इन रिपोर्ट्स में लगातार कहा गया कि कोरोना वायरस, जिसे कोविड-19 नाम दिया गया है, उसे लैब में पैदा करके चीन में छोड़ा गया ताकि चीन आर्थिक तौर पर कमजोर हो जाए और अमेरिका के सामने घुटनों पर आ जाए.



रूस के टीवी चैनल सीआईए की साजिश बता रहे हैं
रूस में चैनल वन नाम के टीवी चैनल ने तो इस पर शाम के समय एक नियमित शो ही करना शुरू कर दिया. जहां रोज केवल ये स्टोरीज और चर्चा ब्राडकास्ट की जाने लगी थी कि किस तरह कोरोना वायरस एक गहरी साजिश का नतीजा है. इस प्रोग्राम में मोटे तौर पर कहा गया कि कोरोना वायरस दरअसल यूरोप और अमेरिका की बड़ी दवा कंपनियों, सीआईए, अमेरिका की खुफिया एजेंसियों की मिलीजुली साजिश है. इस वायरस को अमेरिकी लैब में विकसित किया गया और किसी तरह फैला दिया गया.

रूस के कई और चैनलों ने कोरोना वायरस की साजिश संबंधी प्रोग्राम प्राइम टाइम में चलाए. एक प्रोग्राम में ये दावा किया गया कि जार्जिया में एक अमेरिकी सीक्रेट लैब है, जहां जैविक हथियार बनाने का काम हो रहा है, जो मनुष्य पर असर डाल सकें.

क्या इसे वुहान की लैब में तैयार किया गया
24 जनवरी वाशिंगटन टाइम्स में एक आर्टिकल प्रकाशित हुआ, ये वायरस चीन के जैविक हथियारों के एक प्रोग्राम के कारण पैदा हुआ है. इसे वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में तैयार किया गया. ये इंस्टीट्यूट वुहान शहर में बीचों बीच ही बना हुआ है. हालांकि बाद में अखबार ने इसका खंडन भी कर दिया. ये कहा गया कि वुहान का ये इंस्टीटयूट जैविक हथियार बनाने में सक्षम नहीं है.

अमेरिकी सांसदों ने भी कहा-कोरोना लैब में पैदा हुआ
फरवरी 2020 में अमेरिकी सीनेटर टॉम कॉटन (रिपब्लिकन पार्टी) और फ्रांसिस बोयले ने कहा, ये वायरस चीन द्वारा बनाए जा रहे जैविक हथियारों से उपजा हो सकता है. एक और अमेरिकी नेता लिंबग ने कहा कि संभव है कि ये चीन के किसी लैब में हो रहे परीक्षण से निकला हो. एक अन्य साइंटिस्ट की थ्योरी थी कि हो सकता है कि चमगादड़ के जरिए कई सालों पहले कोई वायरस किसी जानवर में पहुंचा. वो अब एक्टिव होकर मानव में पहुंच गया हो और फिर तबाही मचाने लगा हो.

रूस के चैनल वन पर रोजाना प्राइम टाइम पर रोज ये प्रोग्राम चलाया जा रहा है कि किस तरह ये वायरस अमेरिका की साजिश है


क्या चीनी वैज्ञानिकों का है इसमें कहीं हाथ
29 जनवरी 2020 को फाइनेंशियल न्यूज वेबसाइट और ब्लॉग जीरोहेज ने कहा, कोविड-19 यानी कोरोना वायरस को वुहान के किसी वैज्ञानिक ने ही पैदा किया है. उस वेबसाइट ने चाइनीज साइंटिस्ट की पहचान का दावा करते हुए उसका नाम और फोटो भी पब्लिश की. बाद में ट्विटर ने उसकी पोस्ट को वहां से हटा दिया. जीरो हेज ने भी कहा, 'उसने कभी ये दावा नहीं किया कि इस चीनी साइंटिस्ट ने ही ये वायरस पैदा किया है और ना ही उन्होंने ये दावा किया कि ये वायरस मानव सृजित है.' जनवरी 2020 में बज़फीड़ न्यूज ने भी ऐसी ही एक रिपोर्ट पब्लिश की.

व्हाइट हाउस ने शोधकर्ताओं से क्या कहा
06 फरवरी 2020 को अमेरिका में व्हाइट हाउस ने साइंस और मेडिकल रिसर्चर्स से कहा कि वो जल्दी से जल्दी पता लगाएं कि इस वायरस की उत्पत्ति का मूल स्थान कौन है और ये कहां से फैलना शुरू हुआ.

ब्रिटिश सांसद ने भी गहरी साजिश बताया 
इसी बीच ब्रिटेन में सांसद और हाउस ऑफ कामंन के डिफेंस सेलेक्ट कमेटी के चेयरमैन टॉबी एलवुड ने सार्वजनिक तौर पर सवाल पूछा कि क्या इसमें चीनी सेना के वुहान स्थित बॉयोलॉजिकल प्रोडक्ट्स लैब की कोई भूमिका है. उन्होंने इसे बड़ी साजिश कहा. उनका कहना था कि कोरोना की उत्पत्ति खुद -ब-खुद नहीं हुई.

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चीन के सोशल मीडिया पर ये कयास भी लगने लगे थे कि इसे वुहान के एक वैज्ञानिक ने तैयार किया.बाद में उस वैज्ञानिक ने सौगंध खाकर इसका खंडन किया


चीन में भी एक वैज्ञानिक पर उठे सवाल
साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट ने रिपोर्ट दी कि चीन में जब ये बीमारी फैलनी शुरू हुई तो चीन के ही लोगों ने बड़े पैमाने पर वुहान इंस्टीट्यूट की मुख्य शोधकर्ता शी झेंगली पर सोशल साइट्स के जरिए सीधे ये आरोप लगाने शुरू कर दिए कि ये वायरस उन्हीं का किया धरा है. इसी की बदौलत चीन में लोग मर रहे हैं. सोशल साइट्स पर बडे़ पैमाने पर लोगों का गुस्सा झलक रहा था कि कहीं कुछ गड़बड़ की गई है, जिससे बीमारी फैल रही है. हालांकि शी ने तुरंत सफाई दी, मैं सौगंध खाती हूं कि ये मैंने नहीं किया है और ना ही इसे लैब में बनाया गया है.

क्या पेंटागन भी साजिश में शामिल
रूस की डिफेंस मिनिस्ट्री ज्वेज्दा नाम की एक मैगजीन प्रकाशित करती है. उसमें कहा गया कि दरअसल कोरोना वायरस अमेरिका का चीन और रूस के खिलाफ सुनियोजित तरीके से किया गया हमला है ताकि चीन कमजोर पड़ जाए और इकोनॉमिक वार्ता में अमेरिकी की शर्तें उसे माननी पड़ें. रूस के राष्ट्रवादी नेता व्लादीमिर झिरनोव्स्की ने मास्को रेडियो पर आरोप लगाया कि इस वायरस का परीक्षण पेंटागन में हुआ. इसमें अमेरिका की बड़ी दवा कंपनियां शामिल हैं.

ईरान के नेता क्या कह रहे हैं
पूर्व ईरानी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने 09 मार्च को संयुक्त राष्ट्र को एक पत्र भेजकर दावा किया कि कोरोना वायरस को लैब में ही पैदा किया गया है ताकि अमेरिका अपने इस हथियार के जरिए दुनिया पर वर्चस्व बनाकर रखे.

ईरान खुद इस वायरस से दुनिया में सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में शामिल है. उसके रेडियो फरदा पर एक धार्मिक गुरु ने आरोप लगाया कि अमेरिका की सोची समझी चाल के चलते ईरान पर वायरस का हमला हुआ ताकि हम खत्म हो जाएं और हमारे कल्चर पर असर पड़े. एक और ईरानी टीवी शख्सियत अली अकबर रइफीपर ने इसे हाईब्रिड वायरफेयर का अंग बताया, जिसे अमेरिका ने चीन और ईरान के खिलाफ छेड़ा है.

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