क्‍या वाकई कोविड-19 से मृत्‍यु दर घटी है? डाटा तो कुछ और ही कर रहा बयां!

क्‍या वाकई कोविड-19 से मृत्‍यु दर घटी है? डाटा तो कुछ और ही कर रहा बयां!
दुनिया में कोरोना संक्रमण से मौत का आंकड़ा 3 लाख को पार कर गया है

विशेषज्ञों का कहना है कि दूसरी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के संक्रमित होने पर हालत बहुत तेजी से खराब होती है. ऐसे लोगों की मौत का कारण कोविड-19 को माने बिना कोरोना वायरस (Coronavirus) के असर का आकलन करना मुश्किल होगा. अब अस्‍पतालों के साथ ही घरों में होने वाली मौतों में भी कोविड-19 की पहचान करना जरूरी है.

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कोरोना वायरस (Coronavirus) के दुनियाभर में फैलने के शुरुआती हफ्तों के मुकाबले इस समय कई देशों में संक्रमण से मरने वालों की संख्‍या (Death Toll) काफी घट गई है. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हम सभी कारणों से मरने (All Cause Death) वालों की संख्‍या देख रहे हैं तो कुछ दूसरी ही कहानी सामने आ रही है. इस समय अलग-अलग देश कोविड-19 (Covid-19) से मरने वालों की संख्‍या का आकलन अलग-अलग तरीके से कर रहे हैं.

स्‍पेन (Spain) जैसे कुछ देश मरने वालों का पोस्‍टमार्टम होने के बाद कोविड-19 टेस्‍ट करा रहे हैं. वहीं, जर्मनी (Germany), ब्रिटेन (Britain) या तुर्की (Turkey) जैसे देश अलग तरीका अपना रहे हैं. बेल्जियम कोरोना वायरस के कारण अस्‍पतालों के बाहर होने वाली मौतों की भी गणना कर रहा है. आसान शब्‍दों में समझें तो वहां संदिग्‍ध संक्रमितों की मौत का कारण भी कोविड-19 को ही माना जा रहा है. वहीं, इटली (Italy) अस्‍पताल में मरने वाले लोगो की ही मौत का कारण कोरोना वायरस को मान रहा है.

क्‍यों जरूरी है सभी कारणों से होने वाली मौतों का आकलन
विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 के मामले में सभी कारणों से हुई मौतों की संख्‍या की गणना करना बहुत जरूरी है ताकि वैश्विक महामारी (Pandemic) के व्‍यापक असर का सही आकलन किया जा सके. ऐसा होने पर सरकारों को संक्रमण के प्रभाव को कम करने के लिए नीतियां बनाने में काफी आसानी हो जाएगी. दुनियाभर में कोरोना वायरस के कारण मरने वालों की संख्‍या बहुत ज्‍यादा है. लेकिन अभी भी कई देशों में संक्रमित लोगों की मौत की वजह सिर्फ कोविड-19 नहीं है.
अभी भी काफी लोग ऐसे हैं, जो अपने-अपने देश के हेल्‍थ सिस्‍टम पर बोझ कम करने के मद्देनजर लक्षण शुरू होते ही अस्‍पताल नहीं जा रहे हैं. अस्‍पतालों तक ज्‍यादातर लोग हालात खराब हो जाने पर ही पहुंच रहे हैं. सही मायने में संक्रमितों में काफी लोगों की मौत का कारण हार्ट से संबंधित बीमारी या कैंसर बन रहा है. अगर ऐसे लोगों की तादाद 5 फीसदी भी मानी जाए तो ये संख्‍या हजारों में बैठेगी.



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कोरोना वायरस का असली असर जानने के लिए संक्रमण के साथ ही दूसरी बीमारियों के कारण होने वाली मौतों को भी शामिल करना सबसे सही तरीका होगा.


आधिकारिक संख्‍या में शामिल नहीं की जा रही हैं ऐसी मौतें
कैंम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में पब्लिक अंडरस्‍टेंडिंग ऑफ रिस्‍क के प्रोफेसर डेविड स्पिगेलहॉल्‍टर का कहना है कि कोरोना वायरस का असली असर जानने के लिए संक्रमण के साथ ही दूसरी बीमारियों के कारण होने वाली मौतों को भी शामिल करना सबसे सही तरीका होगा. यही तरीका कोरोना वायरस से मृत्‍यु दर (Death Rate) का सबसे करीबी आकलन कर पाएगा. डीडब्‍ल्‍यू के जुटाए डाटा के मुताबिक, कोविड-19 के कारण होने वाली मौतों में हजारों दूसरी बीमारियों के कारण मरने वाले लोग भी शामिल हैं. हालांकि, ज्‍यादातर देशों में कोविड-19 के कारण मरने वालों की आधिकारिक संख्‍या (Official Data) में इन्‍हें शामिल नहीं किया जा रहा है. डीडब्‍ल्‍यू ने इस आकलन में स्‍पेन, ब्रिटेन और वेल्‍स (Wales) को ही शामिल किया है, लेकिन इससे दूसरे देशों का पैटर्न भी साफ हो जाता है.

गंभीर बीमारी वाले संक्रमित की हालत तेजी से होती है खराब
स्‍पेन के महामारी व जनस्‍वास्‍थ्‍य केंद्र की प्रमुख जांचकर्ता अंपारो लारॉरी का कहना है कि बहुत सी जगह पर दूसरी बीमारियों से जूझ रहे लोगों की कोविड-19 के कारण मौतों की पहचान नहीं होने के कई कारण हो सकते हैं. उनका कहना है कि संक्रमण के शुरुआती दिनों में ही गंभीर बीमारियों से पहले से ही जूझ रहे लोगों की मौत को कोविड-19 से जोडकर नहीं देखा जा रहा है. इसका एक कारण उनकी ज्‍यादा उम्र भी हो सकती है.

स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारियों का मानना हो सकता है कि पहले से ही गंभीर बीमारियों के कारण उनका जीवन ज्‍यादा नहीं बचा था. इसलिए संक्रमण के शुरुआती दौर में ही उनकी मौत को कोविड-19 के कारण मरने वालों की संख्‍या में शामिल न किया जा रहा हो. उनके मुताबिक, इस तरह के लोगों के संक्रमित होने पर हालात बहुत तेजी से खराब होते चले जाते हैं. ऐसे लोगों की पहले से मौजूद बीमारी के कारण समय से मृत्‍यु हो जाती है. यहां हम इस पर ध्‍यान देना भूल जाते हैं कि कोरोना वायरस ने उनकी हालत समय से पहले खराब कर दी और उनकी मौत हो गई. इसीलिए ज्‍यादातर विशेषज्ञ कोविड-19 के कारण मृत्‍यु दर को कम करके आंक रहे हैं.

घरों और केयर होम्‍स में हो रही मौतों पर भी देना होगा ध्‍यान
स्पिगेलहॉल्‍टर कहते हैं कि इसके अलावा इंग्‍लैंड और वेल्‍स में 20 मार्च से 24 अप्रैल के बीच सामान्‍य समय में होने वाली मौत से 38,550 ज्‍यादा लोगों की मृत्‍यु हुई. उन्‍होंने ये बात पिछले 10 साल में हुई औसत मृत्‍यु दर के आधार पर कही. इनमें से 11,000 लोगों की मौत का कारण कोविड-19 को नहीं माना गया. इंग्‍लैंड का राष्‍ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय हर हफ्ते मरने वाले लोगों की संख्‍या प्रकाशित कर रहा है.

ये डाटा वैश्विक महामारी के के वास्‍तविक असर का आकलन करने में मददगार साबित हो सकता है. मुझे लगता है कि अब हमें अस्‍पतालों के साथ ही घरों में और केयर होम्‍स में मरने वालों पर भी ध्‍यान देने की जरूरत है. कार्यालय की ओर स 18-24 अप्रैल के डाटा के मुताबिक, पिछले 5 सासलों के मुकाबले इस दौरान केयर होम्‍स में मरने वालों की संख्‍या में 373 फीसदी की वृद्धि हुई है. इनमें सिर्फ 35 फीसदी लोगों की मौत का कारण कोविड-19 को माना गया.

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विशेषज्ञों का कहना है कि मृत्‍यु दर का वास्‍तविक आकलन करने के लिए अस्‍पतालों के साथ ही घरों और केयर होम्‍स में होने वाली मौतों पर भी ध्‍यान देना जरूरी है.


पुरानी बीमारी का इलाज कराने अस्‍पताल नहीं जा रहे लोग
स्पिगेलहॉल्‍टर कहते हैं, 'हो सकता है कि इनें से कुछ और लोगों की मौत कोविड-19 के कारण ही हुई हो, लेकिन वे अस्‍पताल नहीं जा पाए थे.' इस बीच इंग्‍लैंड के अस्‍पतालों में मरने वालों की संख्‍या 50 फीसदी से घटकर 37 फीसदी हो गई. माना जा रहा है कि ज्‍यादा से ज्‍यादा लोग अस्‍पताल जाना चाहते हैं. उनका कहना है कि कोविड-19 के कारण होने वाली ऐसी मौतें ज्‍यादा चिंता का कारण बन रही हैं, जिन्‍हें संक्रमण के मामलों में दर्ज (Unrecorded) नहीं किया जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि घरों (Homes) और केयर होम्‍स (Care Homes) में होने वाली मौतों को अस्‍पताल पहुंवाकर टाला भी जा सकता था. काफी लोग कोरोना वायरस से बचने के लिए ही अस्‍पताल नहीं जा रहे हैं. दूसरी बीमारियों के इलाज के लिए अस्‍पताल में भर्ती होने वालों की घटती संख्‍या इसका सबूत है.

अलग-अलग देशों की मृत्‍यु दर में दिख रहा काफी अंतर
कोविड-19 की मृत्‍यु दर में अलग-अलग देशों में काफी अंतर है. जहां बेल्जियम में कोविड-19 से मृत्‍यु दर 16.42 फीसदी है, वहीं सिंगापुर (Singapore) में ये आंकडा 0.09 फीसदी है. इसके बहुत से कारण हो सकते हैं. इनमें पोस्‍टमार्टम के बाद कोरोना टेस्‍ट नहीं करना, सिर्फ अस्‍पतालों में भर्ती हुए लोगों की गणना करना, टेस्टिंग (Corona Test) की संख्‍या में अंतर जैसे कई कारण शामिल हैं. वहीं, इसके कुछ राजनीतिक कारण भी हैं. कई देशों की सरकारें हालात नियंत्रण में बताने के लिए भी पारदर्शी तरीके से डाटा जारी नहीं कर रही हैं ताकि उन्‍नहें बाद में इसका सियासी फायदा मिल सके. बहुत से देशों के स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी सभी कारणों से होने वाली मौत का डाटा नहीं बता रहे हैं. कुछ देशों में ये डाटा देरी से जारी किया जा रहा है. ऐसे देशों में जर्मनी भी शामिल है.

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