क्या मालदीव का 'इंडिया आउट कैंपेन' China की कोई चाल है?

मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ (news18 english via Reuters)
मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ (news18 english via Reuters)

जिस मालदीव को भारतीय सेना ने श्रीलंका के उग्रवादियों से बचाया, वही अब सैनिको को खदेड़ने के लिए इंडिया आउट कैंपेन चला रहा है. हालांकि खुद मालदीव का सत्ता पक्ष इसके खिलाफ है.

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  • Last Updated: September 18, 2020, 12:34 PM IST
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कोरोना संकट के इस दौर में भारत मजबूती से मालदीव के साथ रहा. उसने चीन के वुहान से मालदीव के कई नागरिकों को एयरलिफ्ट भी किया. हालांकि इस सबके बीच मालदीव में भारत विरोध लहर की आहट सुनाई दे रही है. वहां तैनात भारतीय सैनिकों को बाहर निकालने के लिए बाकायदा एक कैंपेन चल रहा है. 'इंडिया आउट' नाम से चले इस कैंपेन को वहां की विपक्षी पार्टी सपोर्ट कर रही है. जानिए, क्यों भारत का ये पड़ोसी देश भारतीय सैनिकों को अपने लिए खतरा मान उन्हें हटाने पर तुला है.

भारत ने चलाया ऑपरेशन कैक्टस
इसके लिए पहले ये जानना जरूरी है कि आखिर मालदीव में भारतीय सेना क्या कर रही है. दरअसल ये पड़ोसी देश मालदीव को साल 1988 में मुसीबत से निकालने के लिए उठाए गए कदम के तहत हुआ. अस्सी के आखिरी सालों में श्रीलंका के उग्रवादी संगठन पीपुल्स लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन ऑफ तमिल ईलम का मालदीव में उत्पात काफी बढ़ गया था. यहां तक कि नवंबर 1988 में इस संगठन ने तख्ता पलट की योजना को अंजाम देने की सोची. इसके तहत वहां की राजधानी माले पर कब्जा कर लिया गया.

भारतीय सेना ने मालदीव को लिट्टे से बचाने के लिए ऑपरेशन कैक्टस चलाया था- सांकेतिक फोटो

है भारतीय अफसरों की तैनाती


खतरा देखते हुए वहां के तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन गयूम ने कई देशों को मदद का इमरजेंसी संदेश भेजा. भारत ने इस संदेश पर सबसे पहले कार्रवाई की. उन्होंने देश को उग्रवादियों के कब्जे से सुरक्षित निकाल लिया. तब से भारतीय सैनिकों की एक छोटी टुकड़ी वहां तैनात है. इसके अलावा मालदीव में अतिरिक्त भारतीय अफसर मौजूद हैं, जो भारतीय सेना की ओर से मालदीव नेशनल डिफेंस फोर्स को उपहार में दिए गए हेलिकॉप्टर ऑपरेट करते आए हैं.

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क्या है इंडिया आउट कैंपेन 
अब विपक्षी पार्टी ने अचानक कहना शुरू कर दिया है कि भारतीय सैनिकों का होना उनके देश की सुरक्षा के लिए खतरा है. इसके लिए वहां इंडिया आउट कैंपेन चलाया जा रहा है. दूसरी तरफ सत्ता पक्ष के लोगों के कहना है कि ऐसा कुछ भी नहीं है. द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक वहां के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने कहा कि दोनों देशों के बीच रिश्ते मजबूत हैं और विपक्षी इसे पचा नहीं पा रहे इसलिए अनाप-शनाप सोशल मीडिया कैंपेन चला रहे हैं. बता दें कि हाल ही में वहां ट्विटर पर एक हैशटैग चला- #Indiaout. इसके तहत बताया गया कि विदेशी सेना की मौजूदगी से मालदीव की सुरक्षा और संस्कृति को खतरा हो सकता है.

अब मालदीव चीन के कर्ज के आगे दब गया है- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


चीन को खुश करने का तरीका
वैसे विपक्षी पार्टी क्यों भारत से भड़की हुई है, इसके पीछे की कहानी दिलचस्प है. दरअसल इसके पीछे भी चीन का हाथ माना जा रहा है. विपक्षी पार्टी के नेता और मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन गयूम का अब चीन की तरफ जबर्दस्त झुकाव है. बता दें कि ये वही राष्ट्रपति हैं, जिन्हें ऑपरेशन कैक्टस के दौरान भारतीय सेना ने श्रीलंका से बचाया था. यही राष्ट्रपति अपने आगे के कार्यकाल में चीन से कर्ज लेने लगे.

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उनकी सरकार ने आधारभूत परियोजनाओं के नाम पर बीजिंग से भारी -भरकम कर्ज लिया. उनके कार्यकाल में लिया हुआ ये कर्ज इतना बढ़ा कि अब पूरा देश ही चीन के कर्ज के आगे दब गया है. खुद मालदीव की वर्तमान सरकार ने माना कि देश पर चीन का करीब 3.1 अरब डॉलर का कर्ज है, जबकि मालदीव की पूरी अर्थव्‍यवस्‍था ही करीब 5 अरब डॉलर की है.

मालदीव की विपक्षी पार्टी को भारतीय सेना खतरा लगने लगी है- सांकेतिक फोटो


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कोरोना के चलते अब टूरिज्म पर टिके इस देश का अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है. इसी दौर में सत्ता पर दबाव बनाने के लिए विपक्षी और चीन की पक्षधर पार्टी ने इस तरह से कैंपेन शुरू कर दिए हैं. इससे विपक्षियों के लिए एक तीर से दो निशाने हो सकते हैं. जैसे सबसे पहले तो वे भारत के खिलाफ बगावत दिखाकर चीन के पसंदीदा लोगों की लिस्ट में बने रहेंगे, दूसरा इससे कोरोना से पहले ही हिली हुई सत्ता को कमजोर किया जा सकता है और वापस सत्ता हथियाने का मौका मिल सकता है.



वैसे ये भी कहा जा रहा है कि इंडिया आउट कैंपेन ISIS चला रहा है ताकि वो भारतीय सेना को मालदीव से हटा सके. मालदीव की संसद के स्पीकर और पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नाशीद ने ये बात कही. हालांकि इस बात के पीछे उन्होंने कोई तर्क या सबूत नहीं दिए. यही वजह है कि फिलहाल चीन के कब्जे में फंसे विपक्ष पर संदेह जताया जा रहा है कि वो चीन की फेवरेट लिस्ट में बने रहने के लिए भारतीय सैनिकों को अपने यहां से भगाने की फिराक में है.
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