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क्या लालू के जंगलराज से भी बदतर हालत में है नीतीश का बिहार

Vivek Anand | News18Hindi
Updated: October 23, 2019, 5:09 PM IST
क्या लालू के जंगलराज से भी बदतर हालत में है नीतीश का बिहार
एनसीआरबी के ताजा आंकड़े में अपराध के मामले में बिहार की स्थिति खराब है

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Record Bureau) ने देश में अपराध की स्थिति को लेकर जो ताजा आंकड़े जारी किए हैं, उसमें बिहार (BIHAR) की स्थिति काफी खराब है. सवाल है कि क्या नीतीश सरकार (Nitish Government) का सुशासन छलावा है...

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  • Last Updated: October 23, 2019, 5:09 PM IST
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नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Record Bureau) ने देशभर में होने वाले क्राइम को लेकर आंकड़े जारी किए हैं. उन आंकड़ों का अब कई तरह से विश्लेषण किया जा रहा है. एनसीआरबी (NCRB) की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए बिहार में आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव (Tejashwi yadav) ने नीतीश सरकार (Nitish Government) पर हमला करते हुए ट्वीट किया. उन्होंने लिखा- ‘बिहार के कथावाचक सीएम को हार्दिक बधाई. उनके अथक पलटीमार प्रयासों से देशभर में बिहार को दंगों में प्रथम स्थान मिला है. मर्डर में द्वितीय, वॉयलेंट क्राइम में द्वितीय और दलितों के विरुद्ध अपराध में भी बिहार अग्रणी रूप से द्वितीय स्थान पर है. 15 वर्ष से गृहविभाग उन्हीं के जिम्मे है.’ 

इसके बाद तेजस्वी यादव ने एक और खबर ट्वीट की. खबर में बिहार में हत्या और दहेज हत्या में दूसरे स्थान पर आने का जिक्र था. खबर का लिंक साझा करते हुए तेजस्वी यादव ने लिखा- नीतीश कुमार और सुशील मोदी की महापाखंडी, महाझूठी, महाभ्रष्ट जोड़ी ने विज्ञापनों के जरिए खुद का महिमामंडन करा-करा कर बिहार को अपराध, हत्या, बलात्कार, हिंसा और दंगों के अंधेरे कुएं में धकेल दिया है. जंगलराज अलपाने वाले बेशर्म लोग अब गूंगे-बहरे व अंधे हो गए हैं.

अपराध के मामलों में बिहार का रिकॉर्ड कभी अच्छा नहीं रहा है. फिर भी बिहार में अपराध के फलने-फूलने में लालूराज को जिम्मेदार ठहाराया जाता है. 1990 से लेकर 2005 तक के 15 साल के आरजेडी के शासन को बिहार में जंगलराज कहा जाता है. इसी को लेकर तेजस्वी यादव ने तंज कसा है. सवाल है कि क्या सच में आज बिहार के हालात लालूराज से खराब हैं?

क्या कहती है एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट

एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट में बिहार दंगों के मामले में पूरे देश में अव्वल है. साल 2017 में बिहार में दंगों के कुल 11,698 मामले दर्ज किए गए. ये पूरे देश में सबसे ज्यादा है. सांप्रदायिक दंगों के मामले में भी बिहार सबसे आगे है. यहां 2017 में सांप्रदायिक दंगों के सबसे ज्यादा 163 मामले दर्ज किए गए.

एनसीआरबी की रिपोर्ट में हत्या के मामले में बिहार का स्थान दूसरा है. 2017 में यहां हत्या के 2,803 मामले दर्ज हुए. दलित अत्याचार के मामलों में भी बिहार का स्थान यूपी के बाद आता है. 2017 में दलित अत्याचार के यहां 6,700 मामले दर्ज हुए. दहेज हत्या के मामले में भी बिहार का स्थान दूसरा है. साल 2017 में यहां दहेज हत्या के 1,081 मामले दर्ज किए गए. ये एक साल पहले की तुलना में 10 फीसदी ज्यादा थे.

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बिहार में अपराध के लिए लालू के जंगलराज को जिम्मेदार ठहराया जाता है

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इन आंकड़ों से साफ हो जाता है कि अपराध के मामले बिहार में कहीं से कम नहीं हुए हैं. ये लगातार बढ़ते जा रहे हैं और कुछ संगीन अपराधों में बिहार का स्थान अव्वल है. फिर सवाल उठता है कि बिहार की स्थिति अब भी नहीं सुधरी है तो हालात के लिए लालू यादव को क्यों जिम्मेदार ठहराया जाता है? लालू के शासन को जंगलराज कहकर सारा दोष उनके सिर क्यों मढ़ा जाता है? और लालू राज में एनसीआरबी की रिपोर्ट क्या कहती थी?

लालूराज में अपराध पर एनसीआरबी की रिपोर्ट

1989 के आखिर से लेकर 2005 तक बिहार में लालू यादव के राष्ट्रीय जनता दल का शासन रहा. इस दौरान राजनीति और अपराध में गजब का तालमेल देखा गया. अपराधियों के राजनीतिक संरक्षण, उनके राजनीति में प्रवेश, रंगदारी और किडनैपिंग के मामलों ने पूरे बिहार को बदनाम कर दिया. कहा जाता है कि लालूराज में एक ही उद्योग फला-फूला और वो थी अपहरण उद्योग.

टाइम्स ऑफ इंडिया के एक सर्वे के मुताबिक बिहार में 1992 से लेकर 2004 के बीच कुल 32,085 किडनैपिंग के केस दर्ज हुए. कहा जाता है कि ये आंकड़ा काफी ज्यादा होता लेकिन उस दौरान कई मामले डर के मारे दर्ज ही नहीं हुए. उस वक्त बीजेपी और जेडीयू जैसी बिहार की विपक्षी पार्टियों ने लालूराज को जंगलराज का नाम दिया.

नवंबर 2005 में बिहार में नीतीश कुमार ने सरकार संभाली. 15 साल बाद आए बदलाव के बाद जनता को उम्मीद थी कि अपराध के मामलों में कमी आएगी. शुरुआती वर्षों में ऐसा हुआ भी.

क्या नीतीश सरकार में कम हुए अपराध?

नवंबर 2005 में बिहार की सत्ता पर नीतीश कुमार काबिज हुए. इसके एक साल बाद ही एनसीआरबी की रिपोर्ट में अपराध में कमी दर्ज की गई. एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक 2005 में बिहार में हत्या के कुल 3,471 मामले दर्ज हुए. एक साल बाद 2006 में हत्या के मामले घटकर 3,225 रह गई. इसी तरह से किडनैपिंग के मामलों में भी कमी आई.

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नीतीश सरकार में भी कम नहीं हुए अपराध


2005 में अपहरण के कुल 251 मामले दर्ज किए गए, जो 2006 में घटकर 194 रह गए. उसी तरह से रेप के मामलों में भी कमी आई. 2005 में जहां रेप के 1,147 मामले दर्ज हुए वहीं 2006 में ये घटकर 1,083 रह गए.

एक साल में ही एनसीआरबी की रिपोर्ट से पता चला की नीतीश सरकार में बिहार की स्थिति सुधर रही है. हालांकि बाद के वर्षों में बिहार में अपराध बढ़ते गए. हालांकि इसके पीछे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कुछ और वजह बताते थे. अपराध के बढ़ते मामलों पर एक बार जब नीतीश कुमार से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा- अभी एक झापड़ भी मार दो तो पुलिस कंप्लेन हो जाती है. एक लड़की छेड़ दो तो शिकायत सीधे एसपी को जाती है. लिकर बैन (शराबबंदी) में इतना केस दर्ज हुआ कि ये एक रिकॉर्ड बन गया. आज हर क्राइम रिपोर्ट होता है एक दुक्का को छोड़कर.’

इस बात का पता लगाना मुश्किल है कि सिर्फ केस के रजिस्टर होने से अपराध के कितने फीसदी मामले बढ़े. लेकिन ये हकीकत है कि नीतीश सरकार के शासन के शुरुआती वर्षों को छोड़कर बाद के वर्षों में अपराध में लगाम लगाने में सरकार फेल ही दिखी.

2012 की तुलना में 2013 में महिलाओं के खिलाफ अपराध 21 फीसदी की दर से बढ़े. वहीं इस दौरान किडनैपिंग के मामले 16 फीसदी बढ़े. साल 2012 में बिहार में रेप के 927 मामले दर्ज किए गए, 2013 में ये बढ़कर 1,128 हो गए. 2012 में किडनैपिंग के 3,789 मामले दर्ज हुए, जो 2013 में बढ़कर 4,419 हो गए. ये सभी आंकड़े नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के हैं.

बिहार में अपराध की जड़ें गहरी हुई हैं. लालूराज में हालात खराब थे तो आज के हालात को भी सामान्य नहीं कहा जा सकता. सिर्फ ये कहकर नहीं बचा जा सकता कि पहले केस रजिस्टर नहीं होते थे और अब सारे मामले को रजिस्टर किया जा रहा है.

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First published: October 23, 2019, 4:43 PM IST
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