पाकिस्तान क्यों इजरायल को मान्यता देने से इनकार करता आया है?

इजरायल और पाकिस्तान की दुश्मनी इजरायल के बनने के बाद से चली आ रही है
इजरायल और पाकिस्तान की दुश्मनी इजरायल के बनने के बाद से चली आ रही है

साल 1952 में पाकिस्तान ने मुस्लिमों मुल्कों से घिरे छोटे-से यहूदी देश इजरायल (Pakistan and Israel problem) पर सवालिया निशान लगा दिया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 15, 2020, 12:03 PM IST
  • Share this:
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने हाल में एक टीवी इंटरव्यू के दौरान कहा कि उनपर इजरायल को मान्यता देने का दबाव बनाया जा रहा है. उनका कहना है कि मिडिल ईस्ट में संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन जैसे देशों के इजरायल से जुड़ने के बाद ये दबाब बढ़ा है. हालांकि इमरान ने साफ कर दिया कि वे ऐसा कतई नहीं करेंगे. जानिए, आखिर पाकिस्तान को इजरायल से क्या एतराज है.

इजरायल और पाकिस्तान की दुश्मनी इजरायल के बनने के बाद से चली आ रही है. तब इजरायल के तत्कालीन पीएम डेविड गुरिअन ने अपने देश को यूनाइटेड नेशन्स में शामिल करने के लिए देशों का समर्थन चाहा था. इसके लिए उन्होंने पाकिस्तान से भी संपर्क किया लेकिन पाक ने कोई भी मदद देने से इनकार कर दिया.

यहां तक कि साल 1952 में उसने मुस्लिमों मुल्कों से घिरे इस छोटे से यहूदी देश पर ही सवालिया निशान लगा दिया. इसके बाद इजरायल भी भड़क गया. तब से दोनों के बीच संबंध कभी सामान्य नहीं हो सके.



खाड़ी देश एक के बाद एक इजरायल से दोस्ती कर रहे हैं- सांकेतिक फोटो (pixabay)

फिलिस्तीन का मुद्दा तनाव की बड़ी वजह है. इमरान ने साफ कह दिया है कि जब तक फिलिस्तानियों को उनका देश वापस नहीं मिल जाता, वे पाकिस्तान को मान्यता नहीं देंगे. इजरायल और फिलस्तीन की तनातनी दुनिया भर में वैसे ही जानी जाती है जैसे भारत-पाकिस्तान संबंध. 1948 में विभाजन के बाद इजराइल और फिलिस्तीन दो देश बने थे. इजराइल और फिलिस्‍तीन में अब भी दुश्‍मनी जिस बात पर है वो गाजा क्षेत्र है. दोनों ही मुल्‍क गाजा क्षेत्र पर अपना-अपना दावा करते रहे हैं.

ये भी पढ़ें: JNU में विवेकानंद की प्रतिमा को लेकर क्यों मचता रहा है बवाल?  

इजराइल और फिलिस्‍तीन के बीच झगड़े की असली जड़ है पश्चिम एशिया का वह इलाका जहां यहूदी अपना हक जातते थे, यह वह इलाका था जहां सदियों पहले यहूदी धर्म का जन्म हुआ था. यही वो जमीन थी जहां ईसाई धर्म का जन्म हुआ. बाद में इस्लाम के उदय से जुड़ा इतिहास भी यहीं लिखा गया. यहूदियों के दावे वाले इसी इलाके में मध्यकाल में अरब फिलिस्तीनियों की आबादी बस चुकी थी. 1922 से ये इलाका ब्रिटिश हुकूमत के कब्जे में था. फिर भी यहूदियों और फिलिस्तीनियों के बीच, यहां दबदबे को लेकर गृहयुद्ध जारी था.

ये तो हुए पाकिस्तान का पक्ष, लेकिन इजरायल भी पाकिस्तान को मान्यता नहीं दे रहा क्योंकि पाकिस्तान धार्मिक आधार पर फिलिस्तीन को मान्यता देता है.

यूएई, मिस्त्र, जॉर्डन और बहरीन यहूदी देश इजरायल के सपोर्सांट में आ चुके हैं- सांकेतिक फोटो (pixabay)


दोनों देशों की दुश्मनी के बीच इसी साल मिडिल ईस्ट में काफी बदलाव हुए. एक के बाद एक लगातार अरब देश इजरायल से दोस्ती कर रहे हैं. इसमें यूएई, मिस्त्र, जॉर्डन और बहरीन हैं. माना जा रहा है कि लगभग 9 अरब देश इजरायल से मित्रता चाहते हैं. यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक खुद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि बहरीन और यूएई के बाद कई और देश कतार में हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक इसमें कई बड़े देश भी शामिल होंगे.

ये भी पढ़ें: क्या कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के लिए NASA में संस्कृत भाषा अपनाई जा रही है?   

कुल मिलाकर अमेरिका और भारत समेत लगभग सारी बड़ी ताकतें इजरायल के पक्ष में हैं. ऐसे में भी पाकिस्तान ने संकेत दिया कि वो अपनी कूटनीति में कोई बदलाव नहीं करने जा रहा. वैसे पाकिस्तान के इस अड़ियल रवैये के पीछे चीन का भी हाथ हो सकता है, जो गरीबी से जूझ रहे इस देश में बड़ा आर्थिक निवेश कर चुका है. चीन अमेरिका से दुश्मनी निभाते हुए ईरान से दोस्ती कर चुका है. ईरान मिडिल ईस्ट में इजरायल के कट्टर दुश्मन के तौर पर देखा जाता है, जो इस यहूदी मुल्क के खिलाफ आएदिन कुछ न कुछ कहता है. ऐसे में ये भी हो सकता है कि पाकिस्तान चीन के निवेश और ईरान के साथ के फेर में चाहकर भी इजरायल को मान्यता न दे सके.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज