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क्या RO पर लगेगा बैन? जानें, इस पानी के नुकसान

News18Hindi
Updated: November 18, 2019, 2:42 PM IST
क्या RO पर लगेगा बैन? जानें, इस पानी के नुकसान
शुद्ध पानी देने का दावा करने वाले RO पर आंशिक बैन की बात हो रही है

क्या वजह है कि शुद्ध पानी (pure drinking water) देने का दावा करने वाले RO प्यूरिफायर (RO purifier) पर आंशिक बैन की बात हो रही है?

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  • Last Updated: November 18, 2019, 2:42 PM IST
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मई में RO के इस्तेमाल को सीमित करने के लिए नेशनल ग्रीन टिब्यूनल (NGT) ने सरकार से इसपर पॉलिसी बनाने को कहा था. अब कई महीने बाद भी इसपर कोई कार्रवाई न देखकर टिब्यूनल ने संबंधित विभाग (Environment Ministry) को कड़ी फटकार लगाते हुए उसे 31 दिसंबर तक का वक्त दिया है. ऐसा न हो पाने पर विभाग का संबंधित अधिकारी अपनी तनख्वाह नहीं ले सकेगा.

बीते कुछ सालों में आरओ के पानी का चलन तेजी से बढ़ा है. पानी में जरूरत से ज्यादा मात्रा में घुले खनिजों के डर की वजह से लोग धड़ल्ले से वॉटर प्यूरिफायर लगवा रहे हैं. वहीं बीते कुछ महीनों पहले
नेशनल ग्रीन टिब्यूनल ने इसी आरओ को पर्यावरण और यहां तक कि इंसानी सेहत के लिए भी खतरनाक बताते हुए सरकार को आगाह किया.

वो संस्था जो सरकार को फटकार रही है 

बता दें कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल खुद एक सरकारी संस्था है जिसकी स्थापना साल 2010 में पर्यावरण संरक्षण के साथ जंगलों और दूसरे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े मामलों के तुरंत निपटारे के लिए की गई थी. इसी संस्था ने पर्यावरण मंत्रालय को चेताते हुए कहा कि पीने के पानी में टीडीएस की मात्रा 500 मिलीग्राम से कम होने पर आरओ पर बैन लगना चाहिए. यानी जिन जगहों में ये मात्रा मानक से कम है, वहां के लोग आरओ का इस्तेमाल नहीं कर सकते. ये बैन आरओ के उपयोग को सीमित करने के लिए लगाया जा सकता है. संस्था ने जनता को आरओ वाले पानी के नुकसान के बारे में भी सचेत करने को कहा.

नेशनल ग्रीन टिब्यूनल (NGT) ने सरकार से इसपर पॉलिसी बनाने को कहा


आखिर क्या है टीडीएस
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जिस आरओ पानी के अब तक इतने फायदे बताए जा रहे थे, किसलिए अचानक उसपर रोक की बात होने लगी, ये जानने के लिए जानते हैं कि टीडीएस क्या है. टीडीएस (total dissolved solids) का मतलब है पानी में घुले हुए ठोस तत्व. पानी में घुले खनिज को आमतौर पर घुलित ठोस यानी टीडीएस कहा जाता है, जैसे कि कैल्शियम या मैग्नीशियम क्लोराइड, कैल्शियम और मैग्नीशियम सल्फेट ( CaSo4, MgCl). इन खनिजों के कारण ही पानी का स्वाद ज्यादा या कम खारा होता है. इनके अलावा पानी में कई खतरनाक ठोस भी मिले होते हैं जैसे आर्सेनिक, फ्लोराइड और नाइट्रेट. एक तय मात्रा से ज्यादा होने पर ये बेहद खतरनाक हो सकते हैं. WHO किसी देश में जलवायु और कई दूसरे मानकों के आधार पर टीडीएस तय करता है. हालांकि भारत में पीने का पानी इतना दूषित हो गया है कि इसमें टीडीएस का स्तर काफी ज्यादा हो गया है. इसी अशुद्धि पर कंट्रोल के लिए आजकल आरओ चल निकला है.

RO से पानी की बर्बादी
आरओ यानी रिवर्स ऑस्मोसिस के भी अपने नुकसान हैं. जैसे इसके लिए काफी पानी चाहिए होता है. जैसे आमतौर पर आरओ में तीन लीटर पानी छानने के लिए डालें तो एक लीटर साफ पानी आता है और 2 लीटर बर्बाद चला जाता है. इस बचे हुए अशुद्ध पानी को किसी काम में इस्तेमाल लाने की बजाए उसे फेंक दिया जाता है. इससे पानी की तीन गुनी मात्रा बर्बाद होती है. इसका दूसरा एक पक्ष ये भी है कि आजकल देखादेखी में लगभग हर घर में आरओ लगाया जा रहा है. जबकि जिन जगहों पर पानी में टीडीएस 500 एमजी प्रति लीटर से कम है, वहां आरओ पानी की जरूरत नहीं होती. बल्कि उसे जरूरत से ज्यादा छानना सेहत के लिए खराब ही है.

आरओ के बिना वजह इस्तेमाल से सेहत पर गंभीर असर होता है


इस तरह लगेगा बैन
पानी की इसी बर्बादी पर लगाम कसने के लिए ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सरकार से अनुरोध किया कि जिस जगहों पर मानक कम हों, वहां जनता को जागरूक किया जाए और आरओ बंद किया जाए. ट्रिब्यूनल ने सरकार से यह भी कहा है कि देशभर में जहां भी आरओ की अनुमति दी जाए, वहां ये पक्का किया जाए कि लोग 60 प्रतिशत से ज्यादा पानी को दोबारा इस्तेमाल करें. जैसे बागवानी, गाड़ी धोने, बर्तन-कपड़े धोने में. पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को दिए गए इस निर्देश पर अबतक कोई कदम नहीं उठाया गया, इसपर एतराज जताते हुए संबंधित लोगों को 31 दिसंबर तक का वक्त मिला है.

इतना साफ पानी सेहत के लिए नहीं है फायदेमंद
आरओ के बिना वजह इस्तेमाल से सेहत पर गंभीर असर होता है क्योंकि इस दौरान पानी में पाए जाने वाले जरूरी तत्व भी छनकर निकल जाते हैं. मसलन आयरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम और सोडियम जैसे तत्व बाहर चले जाते हैं. ये सभी तत्व सेहत के लिए काफी जरूरी हैं. इन जरूरी तत्वों के छन जाने के बाद पिया जाने वाला पानी सबसे पहले तो पाचन तंत्र खराब करता है. इसके बाद त्वचा की बीमारियां, थकान, अनिद्रा जैसी तकलीफें दिखने लगती हैं. यहां तक कि शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी कम हो जाती है. आरओ पानी में पाए जाने वाले सॉल्ट से क्षारीय खनिज को हटा देता है. इससे पानी एसिडिक हो जाता है और पेट की समस्या पैदा करता है. हैरानी की बात ये भी है कि जिस आरओ को हम वाइरस, बैक्टीरिया हटाने वाला सोचते हैं, वो ये काम करता ही नहीं. दरअसल जर्म्स इतने छोटे होते हैं कि प्यूरिफायर की मेंब्रेन इसे छान नहीं पाती और ये शुद्ध पानी में ही मिले रह जाते हैं.

इन्हीं वजहों को देखते हुए ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कहा है कि कोई भी प्यूरिफायर लेने से पहले उस इलाके में पानी की क्वालिटी जांची जाए. इसके बाद आरओ की अनुमति मिले.

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First published: November 18, 2019, 2:42 PM IST
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