क्या रोहित शर्मा इंडियन वन-डे क्रिकेट में बेस्ट ओपनर हैं...

वन-डे क्रिकेट में भारत में जो ओपनर हुए हैं, उनमें सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीरेंद्र सहवाग के नाम आते हैं. कोई कम नहीं है. लेकिन बदलते जमाने, चुनौतियों और अंदाज के लिहाज से बतौर ओपनर रोहित अपनी अलग जगह बना रहे हैं. उनकी बैटिंग डिफेंस और आक्रमण का परफेक्ट कांबिनेशन भी है

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: July 2, 2019, 8:58 PM IST
Sanjay Srivastava
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: July 2, 2019, 8:58 PM IST
रोहित शर्मा ने वर्ल्ड कप क्रिकेट में चौथा शतक लगाकर ये साबित कर दिया है कि वो वन-डे क्रिकेट में भारत के बेस्ट ओपनर हैं. हालांकि इस पर बहस हो सकती है कि क्या वाकई ऐसा है कि हम ये कहें कि रोहित शर्मा से आगे बतौर ओपनर कोई भारतीय बल्लेबाज नहीं है. अगर वन-डे क्रिकेट में भारत के बेहतरीन ओपनर्स की बात करें तो कई नाम और उभरते हैं, जिनमें सौरव गांगुली, सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग जैसे नाम भी हैं.

हम यहां देखने की कोशिश करेंगे कि वाकई रोहित शर्मा इन महान भारतीय बल्लेबाजों से किस तरह अलग हैं. और किस तरह ये उनकी बैटिंग इन महान बल्लेबाजों से कितनी अलग है.

रोहित शर्मा का वन-डे में आगमन 2007 के आसपास हुआ लेकिन वो उनके लिए ऐसा दौर था, जब वो अस्थिर बल्लेबाज थे और सफल नहीं हो रहे थे. कई पारियों में वो एकाध पारियां ही ठीक खेल पाते थे. तब मुंबई के लीजेंड क्रिकेटर बार-बार उनका पक्ष लेकर उनकी तारीफ करते थे. उन्हें लंबी दौड़ का घोड़ा बताया जाता था. साथ ही तकनीक तौर पर दमदार बल्लेबाज कहते थे.

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कब शुरू हुआ सही सफर 
लेकिन उनकी पारियां उस तरह से उनके खेल के साथ न्याय नहीं कर रही थीं. सही मायनों में उनका समय 2013 में चैंपियंस ट्राफी में शुरू हुआ, जहां से वो सफल होकर लौटे. उन्होंने उस टूर्नामेंट में रंग जमा दिया. उसके बाद रोहित ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा. भारत में आईपीएल शरू होने और मुंबई इंडियंस की कप्तानी उनके हाथ में आने के बाद भारतीय क्रिकेट चहेतों के सामने एक नए तरह के रोहित शर्मा सामने आए.

रोहित ने अपना पहला वन-डे वर्ष 2007 में खेला था लेकिन तब उनके खेल में बहुत उतार-चढ़ाव था. आलोचक उन्हें खारिज करते थे लेकिन मुंबई के लीजेंड क्रिकेटर कहते थे कि वो लंबी रेस का घोड़ा हैं.

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पिछले कुछ समय से वह बतौर पर ओपनर भारतीय क्रिकेट टीम के रीढ़ हैं. 213 वन-डे मैचों में 8500 से ज्यादा रन, 26 शतक और 90 के आसपास का स्ट्राइक रेट बताया है कि वो गजब के तूफानी बल्लेबाज हैं लेकिन तकनीक तौर पर खासे मजबूत. मुंबई से भारतीय क्रिकेट में आने वाले बल्लेबाज आमतौर पर तकनीक तौर पर काफी अच्छे होते हैं. उनकी यही बात उन्हें आगे तक ले जाती है.

किस तरह अलग हैं 
रोहित इसलिए अलग हैं क्योंकि तकनीक उन्हें अगर कैसे भी बॉलर्स के खिलाफ पुख्ता खेलने का मौका देती है तो उनकी आक्रमक एप्रोच उन्हें लगातार धुआंधार शाट्स लगाने का हौसला भी देती है. बतौर ओपनर बुकस्टाइल बैटिंग, दमदार तकनीक, जोरदार बचाव और जबदस्त स्ट्रोक्स क्षमता उन्हें भारत के दूसरे ओपनर्स से अलग खड़ा करती है. वर्ल्ड कप में आठ मैचों में चार शतक लगाकर वो ये दिखा चुके हैं. वो बैटिंग में लय है तो व्यावहारिकता और मौके को समझने की ताकत भी. वो शुरू के दस ओवर कुछ और होते हैं तो अगले 10 ओवरों में कुछ और. आमतौर पर अगर वो क्रीज पर हैं तो 25 ओवरों के आसपास अपने शतक तक पहुंच जाते हैं. फिर वहीं से पारी को आगे बढ़ाते हैं. इसी वजह से वो वन-डे में ऐसे ओपनर बल्लेबाज भी हैं, जो दो बार डबल सेंचुरी लगा चुका है.

रोहित के पास हर तरह के शाट्स तो हैं ही साथ ही वो लगातार चुनौतियों में खुद को साबित भी कर रहे हैं


हर तरह का आक्रमण बेधड़क खेलते हैं
रोहित अगर हर तरह के बॉलर्स को बेधड़क आराम से खेलने की क्षमता रखते हैं- जो तेज से लेकर स्पिनर तक हो सकता है तो नई से पुरानी गेंद तक बराबरी के भाव से पारी को आगे बढ़ा पाते हैं. केवल यही नहीं बल्कि रोहित अपने हर मैच के साथ ये साबित भी कर रहे हैं. उनकी बैटिंग भारतीय पारी को किस तरह मजबूत करती है और आत्मविश्वास को बढ़ाने वाली होती है.

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दूसरे भारतीय ओपनर्स की 
अब आइए दूसरे ओपनर्स की बात करते हैं. भारतीय टेस्ट क्रिकेट का सफर 1932 में शुरू हुआ था, तब भारत ने इंग्लैंड में पहली टेस्ट सीरीज खेली थी. तब से लेकर 60 के दशक के आखिर तक भारत को कोई स्थायित्व देने वाला दमदार ओपनर नहीं मिल पाया था. 60 के दशक या 70 के दशक की शुरुआत में जब सुनील गावस्कर टीम में आए तो उन्होंने ओपनिंग बैटिंग की नई कहानी लिखी, जो अब भी याद की जाती है. टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने जो बैटिंग की, वो आज भी लाजवाब भी है और पैमाना भी.

वन-डे ना सही लेकिन सुनील गावस्कर ने बतौर ओपनर भारतीय क्रिकेट में नई इबारत जरूर लिखी


गावस्कर ने नई इबारत लिखी लेकिन टेस्ट में 
हालांकि गावस्कर ने अपने करियर का बहुत कम हिस्सा वन-डे में खेला. लिहाजा वन-डे में बतौर ओपनर वो उस तरह का योगदान नहीं दे सके, जिसे याद किया जाए. 90 के दशक में भारतीय वन-डे क्रिकेट में दो जबरदस्त ओपनर हुए-सौरव गांगुली और सचिन तेंदुलकर. सही मायनों में वन-डे में ये भारत की बेहतरीन ओपनिंग जोड़ी थी. जिसमें दोनों का अपना अंदाज था और दोनों बहुत पॉवरफुल बल्लेबाज थे.

90 के दशक में सचिन और सौरव वन-डे में जबरदस्त ओपनिंग जोड़ी के रूप में सामने आए. दोनों की अपनी अपनी खासियतें थीं


सचिन और सौरव की ओपनिंग जोड़ी परफेक्ट थी
सचिन और सौरव ने 136 वन-डे मैचों में ओपनिंग पार्टनरशिप की. आपस में 6609 रन बनाए. इसमें 21 शतक निकले. सौरव कुछ आक्रामक थे लेकिन सचिन कूल तरीके से पारी की शुरुआत करते थे और बाद में इसे मजबूती से बढाते थे. इसमें तो कोई शक ही नहीं सचिन तकनीक तौर पर खासे मजबूत थे. इंटरनेशनल क्रिकेट करियर में उनके सौ शतक और 35हजार से ज्यादा रन ये बताते भी हैं कि वो कितने बड़े बल्लेबाज थे.
सौरव और सचिन ने घर और बाहर तरह तरह के बॉलिंग आक्रमण का सामना किया. ये दौर भी था जब क्रिकेट की दुनिया में एक से धाकड़ एक गेंदबाज थे.

सहवाग ओपनर जरूर थे लेकिन अलग स्टाइल के. उनका विकेट पर टिकना विरोधी टीम के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द साबित होता था


सहवाग जब क्रीज पर रुकते थे तो विरोधी टीम के होश उड़ जाते थे 
वीरेंद्र सहवाग भारत के ऐसे अलबेले ओपनर थे, जो जब क्रीज पर पहुंचते थे तो पहली ही गेंद से बॉलर पर हावी होने में विश्वास रखते थे. अगर वो लय में होते थे तो दुनिया के कितने भी धुरंधर बॉलर की धज्जियां उड़ा देते थे. तब उनके बल्ले के सामने हर कोई पानी मांगता था.

सहवाग ने आमतौर पर ओपनर के तौर पर ही अपने करियर का अधिकांश हिस्सा बिताया. उसमें उन्होंने 8273 रन बनाए, जिसमें 15 शतक थे. वो उन भारतीय ओपनर्स में भी थे, जिन्होंने वन-डे में डबल सेंचुरी बनाई. आमतौर पर जब वो चलते थे तब भारतीय टीम बड़े स्कोर खड़े करती थी.

हालांकि ये कहा जाना चाहिए भारत के इन वन-डे क्रिकेट के बेहतरीन ओपनर्स की अपनी अपनी खासियतें हैं. जिनकी तुलना करना ही असंगत होगा. सभी अलग अलग दौर के थे, जिसकी चुनौतियां अलग तरह की थीं. लेकिन ये जरूर कहा जा सकता है कि 90 के दशक और उसके बाद के बरसों में वर्ल्ड क्रिकेट में मौजूदा दौर की तुलना में कहीं ज्यादा घातक और दमदार बॉलर्स थे. हालांकि इन सभी बल्लेबाजों ने बतौर ओपनर जो शानदार प्रदर्शन किया, उसने उन्हें ऊचाइयां भी दीं. पर कहना चाहिए कि रोहित शर्मा एक ऐसे ओपनर हैं जो डिफेंस और आक्रमण का ज्यादा मुकम्मल संस्करण कहे जा सकते हैं.

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First published: July 2, 2019, 8:58 PM IST
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