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रूस किस तरह खड़ा कर रहा है रोबोटिक ड्रोन का ग्लोबल नेटवर्क

रूस किस तरह खड़ा कर रहा है रोबोटिक ड्रोन का ग्लोबल नेटवर्क

यह ड्रोन स्वाचलित है और इसका विपरीत मौसम पर भी असर नहीं होता. (प्रतीकात्मक तस्वीर).  (प्रतीकात्मक तस्वीर)

यह ड्रोन स्वाचलित है और इसका विपरीत मौसम पर भी असर नहीं होता. (प्रतीकात्मक तस्वीर). (प्रतीकात्मक तस्वीर)

रूस (Russia) आधुनिक तकनीकों का प्रयोग कर पूरी दुनिया में रोबोटिक ड्रोन (Robotic Drones) का एक नेटवर्क तैयार कर रहा है.

नई दिल्ली: बिना इंसान की सेना और उसमें बिना पायलट के उड़ने वाले जहाज लंबे समय से बड़े शक्तिशाली देशों का सपना रहा है. इस दिशा में काफी काम हो रहा है. ड्रोन (Drones) के नाम से जाने वाले बिना पायलट के छोटे हवाई जहाज और सेना की मदद के लिए रोबोट्स (Robots) काफी पहले से ही सेनाओं में शामिल किए जा चुके हैं. कई देश अपनी सेना की बहुत प्रक्रियाओं का ऑटोमाइजेशन Automization) कर चुके हैं और उससे और बढ़ाने में लगे हैं. वहीं रूस (Russia) भी पूरी दुनिया में अपने ड्रोन का एक नेटवर्क तैयार करने में जुटा हुआ है.

बेदस्तूर जारी हैं सेना के मशीनीकरण के शोध
सेना का इस तरह से आधुनिकरण को काफी पहले से ही कई आशंकाओं के साथ देखा जा रहा है. एक तरफ महाशक्तियां सेना से इंसान को हटाने की तैयारी कर रही हैं, तो दूसरी तरफ कई लोगों को यह चिंता सता रही है कि अगर सेना मशीनों के हवाले हो गई तो मशीनी रोबोट्स कैसे तय करेंगे कि किसे मारना है और किसे नहीं. वहीं मशीनों को सेना में शामिल करने वालों की यह भी दलील है कि इससे बेकार में लोग नहीं मारे जाएंगे.

खास और व्यापक नेटवर्क बनाने की तैयारी में रूस
इस बहस के बाद भी सेनाओं में मशीनी उपयोग को लेकर तमाम तरह के शोध और कोशिशें जारी हैं. नईआर्टीफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग तकनीकों से स्वचलित हथियार बन चुके हैं. रशियन सेंट्रल डिजाइन ब्योरो फॉर मैराइन इंजीनियर रूबिन दुनिया भर में ड्रोन का एक नेटवर्क बना रहा है. इसकी खास बात यह है कि यह नेटवर्क जमीन, पानी और हवा हर जगह पर काम करेगा.

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रूसी को जोर सैन्य तकनीक को उन्नत करने पर है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


कई तरह के उपकरणों को नियंत्रित करेगा यह नेटवर्क
इल ब्योरो के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी इगोर विलनिट ने रूसी मीडिया को बतायाकि  ब्योरो के विशेषज्ञों की लंबे समय में एक ऐसा वैश्विक नेटवर्क बनाने की है जिसमें गहराइयों तक जाने वाले जहाज, पानी के अंदर चलने वाले स्वचलित वाहन, ग्लाइडर्स, हल्के उपकरण, बिना इंसान के वाहन (UAVs),संचार साधन और अन्य उपकरण शामिल होंगे. इनका उद्देश्य बड़े पैमाने पर शोध और अन्वेषण करना होगा.

और भी उपयोग होंगे इस नेटवर्क के
इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य रूस के लिए प्रयोग किए जा रहे विभिन्न पनडुब्बियों और सतह पर चलने वाले जहाज, आपूर्ति वाहन आदि में उपयोग में लाए जा रहे रोबोट को एकीकृत करना है. विलनिट का कहना है कि उनके शोधकर्ता युद्ध के हालातों के लिए उपयुक्त यह रोबोट सिस्टम जमीन और पानी दोंनों में चलने वाले वाहनों से संपर्क रख सकेगा और सूचनाओं का आदान प्रदान कर सकेगा. यह नया सिस्टम नेवीगेशन, कम्यूनिकशन के लिए बहुत व्यापक और विस्तृत रूप से उपयोगी होगा.

एकीकृत कमांड केंद्र बनाने का है लक्ष्य
इस सिस्टम के जरिए एकीकृत कमांड केंद्र स्थापित किए जा सकेंगे जो विभिन्न मंचों में समयोचित नियंत्रण कर सकेंगे. हालांकि इस व्यवस्था को सेना का पूरी तरह से मशीनीकरण तो नहीं कहा जा सकता है, कुछ आशंकाएं जरूर हैं जिस नेटवर्क को विकास के अन्य मंचों के साथ कैसे जोड़ा जा सकेगा.

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रूस इन दिनों अपने सैन्य विकास पर बहुत अधिक ध्यान दे रहा है (प्रतीकात्मक तस्वीर)


एक खास पनडुब्बी भी
रूसी नौसेना इस समय पनडुब्बी विकसित कर रही है जो पसीडन नाम के न्यूक्लियर क्षमता वाली अनमैन्ड अंडरवाटर व्हीकल (UUVs) के वाहन की तरह काम कर सकेगी. खाबरोवस्क इस महीने क अंत तक काम शुरू कर सकती है और एक बार में छह पसिडन UUV ले जा सकती है.

अमेरिका भी नहीं है पीछे
अमेरिका  साल 1950 में ही इंसान के द्वारा ऑपरेट किया जा सकने वाला ड्रोन बना चुका है.  इसे अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAV)  कहा जाता है. लेकिन  यूएस वायुसेना अपना क लग ही स्वचलित किलर ड्रोन बना रही है. इसके अलावा अमेरिकी नौसेना घोस्ट फ्लीट नाम का एक रोबोटिक जहाज भी बना रही है जिसमें एक भी मानव नहीं होंगे, लेकिन उसे नियंत्रित करने वाले एक सुरक्षित दूरी से उसे युद्धके हालातों में भी बखूबी संचालित कर सकेंगे.

इस तरह की चीजों का विकास दुनिया के अन्यदेश भी कर रहे हैं. लेकिन रूस कीयोजना कुछ बड़ी और ज्यादा व्यापक है. एक तरह से इसमें उसके खुद के पुराने सिस्टम्स को उन्नत करने का भी प्रयास शामिल है.

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Tags: Artificial Intelligence, Research, Russia, Science

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