क्या नेताजी सुभाष चंद्र बोस वाकई हवाई हादसे में बचकर सोवियत संघ में पहुंचे थे

तमाम गवाह, बातें और किताबें लगातार ये भी कहती रही हैं कि नेताजी का विमान उस दिन ताइवान दुर्घटनाग्रस्त हुआ ही नहीं था, बल्कि वो सारी बात तत्कालीन हालात में फैलाई गईं ताकि सुभाष सुरक्षित तरीके से जापान से निकल सकें

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: July 25, 2019, 9:03 PM IST
Sanjay Srivastava
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: July 25, 2019, 9:03 PM IST
लोकसभा में केंद्र सरकार ने फिर कहा है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के रूस में रहने से संबंधित दस्तावेज वहां की सरकार के पास मौजूद नहीं हैं. इसके बाद बीजेपी नेता और नेताजी के पोते सीके बोस ने दावा किया है कि 18 अगस्त 1945 को विमान दुर्घटना के बाद नेताजी बोस के साथ क्या हुआ, इसके बारे में जापान को जानकारी है.

इन बातों के बाद ये सवाल फिर उठने लगा है कि क्या ताइवान में हुए विमान हादसे के बाद नेताजी सुभाष बोस जिंदा बच गए थे या फिर कोई विमान हादसा हुआ ही नहीं था. या मान लिया जाए कि हादसा हुआ था और उसमें नेताजी का निधन हो गया था.

सुभाष चंद्र बोस के निधन के हालात की जांच के लिए देश में तीन जांच आयोग का गठन हो चुका है. इसमें से दो आयोग इस नतीजे पर पहुंचे कि नेताजी का निधन हवाई हादसे में 18 अगस्त 1945 में हुआ था. तीसरे मुखर्जी आयोग का निष्कर्ष था कि जिस दिन ताइवान में ताइहोकू में नेताजी के विमान के दुर्घटना की बात कही गई थी, उस दिन तो वहां  कोई ऐसा हादसा नहीं हुआ था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2014 में जब सत्ता में आए तो वो नेताजी के परिवार से मिले. परिवार को भरोसा दिया गया कि नेताजी से संबंधित सभी गुप्त दस्तावेजों और फाइलों को जारी कर दिया जाएगा. ऐसा हुआ भी. लेकिन उन फाइलों में ऐसा कुछ नहीं निकला, जिससे नेताजी के मामले पर कोई रोशनी पड़ती या उनके रहस्य पर से पर्दा उठा पाता.

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एक बड़ा तबका ये मानता आया है कि नेताजी ने विमान दुर्घटना की बात दरअसल अंग्रेजों की आंखों में धूल झोंकने के लिए की थी. असल में इसके बहाने वह पहले मंचूरिया पहुंचे. वहां उन्होंने रूसी फौजों के सामने आत्मसमर्पण किया. फिर सोवियत संघ में प्रवेश किया.

कई लोगों ने समय समय पर दावा किया है कि उन्होंने नेताजी को रूस में देखा है

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भारतीय सांसद ने क्या गवाही दी थी
50 के दशक में मास्को स्थित भारतीय दूतावास में डॉक्टर सत्य नारायण सिन्हा अधिकारी थे. बाद में वो बिहार से कई बार सांसद बने. उन्होंने खोसला जांच कमीशन के सामने शपथ लेकर बताया कि उन्हें बर्लिन से जनरल स्टीवर्ट और मेजर वारेन के सैन्य अभियान के जरिए 1947 में नोट्स हासिल हुए थे, जिसमें कहा गया था कि बोस मरे नहीं बल्कि रूसियों की कैद में यातना भुगत रहे हैं.

वर्ष 1991 में सोवियत संघ के पतन के थोड़े समय बाद ही भारतीय सरकार ने रूसी फेडरेशन से पूछा था कि क्या नेताजी ने रूस में प्रवेश किया था या उन्होंने वहां शरण ली थी. 1992 में रूस से इसका जवाब मिला, नहीं हमारे पास भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष के रूस में होने के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

रूस ने हमेशा कहा कि उनके पास कोई जानकारी नहीं है
तीन साल बाद भारत ने दोबारा रूस को पत्र लिया, पता चला है कि रूस के पास कुछ पुराने दस्तावेज ऐसे हैं, जिससे नेताजी के बारे में रोशनी पड़ सकती है, कृपया 1945 में नेताजी के सोवियत संघ में प्रवेश करने या रुकने के बारे में सभी दस्तावेजों को ढंग से खंगाल लें. रूस ने वही जवाब दोहराया, जो उसने पहले दिया था.

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क्या था जाने-माने कॉलमिस्ट का दावा
वर्ष 2015 में संडे गार्जियन में जाने माने कॉलमिस्ट और पत्रकार माधव नालापत ने दावा किया कि सुभाष चंद्र बोस का विमान मंचूरिया एयरबेस पर सुरक्षित उतरा. वहां से सोवियत फौजें उन्हें मास्को ले गईं. उन्होंने लिखा कि नेताजी के परिवार की जासूसी भी इसीलिए कराई जा रही थी कि भारत सरकार को लग रहा था कि बोस के परिवार के उनके जीवित होने के संबंध जानकारियां हैं या शायद परिवार ये जान सकता है कि दरअसल नेताजी के साथ हुआ क्या था.

जाने माने कॉलमिस्ट ने संडे गार्जियन में लिखा कि नेताजी का विमान उस दिन दुर्घटनाग्रस्त नहीं हुआ था बल्कि सुरक्षित मंचुरिया में उतरा था. वहां से फिर नेताजी को सोवियत संघ ले जाया गया.


माधव ने लिखा कि भारत और रूस के स्रोत व्यक्तिगत तौर पर ये मानते हैं कि जानकारियों को इसलिए छिपाया गया, क्योंकि कुछ उच्चाधिकारियों और राजनीतिज्ञों की छवि को बचाए रखना था. इसीलिए ब्रिटेन और सोवियत सरकारों ने उसी अनुसार काम किया. बोस की स्थिति का स्तालिन ने अपने तरीके से हल निकाला था.

क्या था ताइवानी अधिकारियों का कहना 
जब मुखर्जी आयोग इस मामले की जांच कर रहे थे तब ताइवानी अधिकारियों ने उनसे कहा कि उनके पास जो पुख्ता जानकारी है, उसके अनुसार उनके एयरपोर्ट पर उस दौरान किसी विमान की दुर्घटना का कोई रिकार्ड नहीं है. बल्कि इसके बदले उनका कहना है कि इस विमान के प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि विमान साधारण तरीके से उड़ा. इसे मंचूरिया जाना था, जो उस समय सोवियत सेनाओं के कब्जे में था.

नालापत के अनुसार, इस बात की रिपोर्ट्स हैं कि सोवियत संघ में भारत के तत्कालीन राजदूत डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की नेताजी सुभाष की मास्को के करीब एक जेल में मुलाकात हुई थी, लेकिन राधाकृष्णन ने ताजिंदगी इन रिपोर्ट पर कभी कोई टिप्पणी नहीं की. इसी तरह नेताजी के निकटतम सहयोगी लेफ्टिनेंट कर्नल हबीबुर्रहमान और उनकी विधवा एमिलि ने भी हमेशा इससे इनकार किया.

रामकृष्ण मिशन के प्रमुख की बातों ने मचाया था तहलका
तहलका वर्ष 2013 में तब फिर मचा, जब मास्को में रामकृष्ण मिशन के प्रमुख रहे स्वामी ज्योतिरानंद ने एक दावा किया. उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया को साक्षात्कार में दावा किया कि जब विजयलक्ष्मी पंडित सोवियत संघ में भारत की पहली राजदूत बनकर आईं तो उन्हें जेल में सुभाष चंद्र बोस को देखने का मौका दिया गया. उन्हें सुभाष की कोठरी के बगल वाली कोठरी में एक छेद के जरिए बोस को दिखाया गया. उन्होंने बोस को बहुत बीमार, बेचैन और मानसिक तौर पर बीमार पाया.

मास्को में रामकृष्ण मिशन मठ के प्रमुख रहे ज्योतिरानंद ने कहा कि रूस में उनसे कई लोगों ने बताया था कि नेताजी वहां आए थे


रामकृष्ण मिशन के साधु ने कहा कि बोस के 1945 के बाद वहां होने के दस्तावेज रहस्यमयी ढंग से गायब कर दिए गए. इन दस्तावेजों के बिना मुखर्जी कमीशन की जांच पर भी असर पड़ा. उन्होंने कहा कि ये दस्तावेज पहले रूस के अभिलेखागार विभाग में थे. कुछ शोधकर्ताओं ने इसे देखा भी था. जब मुखर्जी कमीशन वहां दस्तावेजों की जांच के लिए पहुंचा तो वो गायब कर दिए गए. उन्होंने वहां से हटा दिया गया.

इस मामले में शोध कर रहे एक रूसी शोधकर्ता को मास्को में मुखर्जी कमीशन के सामने पेश होना था. माना जा रहा था कि उसके पास रूस में नेताजी के होने के मजबूत साक्ष्य थे लेकिन उसने कमीशन के सामने आने से इन्कार कर दिया. स्वामी का कहना था कि शोधकर्ता उम्रदराज स्कॉलर थे और लंबे समय से नेताजी पर शोध कर रहे थे. इस बारे में उन्होंने मास्को के एक अखबार में सबसे पहले एक लेख भी लिखा था.

नेताजी ही पर शोध करने वाली रूस की  एक शोधकर्ता लिलियाना माल्कोवा बेलूर मठ आईं. वह भी स्वामी ज्योतिरानंद की बातों से सहमत दिखीं. हालांकि स्वामी ज्योतिरानंद की बातों से रामकृष्ण मिशन ने किनारा कर लिया. मिशन ने कहा कि ये उनके व्यक्तिगत दृष्टिकोण हैं, जिससे मिशन का कोई लेना देना नहीं है.

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रूस गए थे नेताजी और वहीं उनका निधन हो गया
जाधवपुर विश्वविद्यालय में रूसी भाषा की प्रोफेसर पूरबी राय उन लोगों में थीं, जो रूस जाकर वहां के अभिलेखागार में अपना शोध कर चुकी थीं. 28 अक्टूबर 2015 को उन्होंने एक और जानकारी फेसबुक टाइमलाइन पर पोस्ट की. उन्होंने इसमें मिलेनियम पोस्ट अखबार से बातचीत में कहा कि वह आश्वस्त हैं कि सुभाष निश्चित रूप से रूस पहुंचे थे और शायद वहीं उनका निधन हुआ. इसका विस्तार से जिक्र उन्होंने अपनी किताब द सर्च ऑफ नेताजी : न्यू फाइंडिंग्स में किया. उनके इस भरोसे को रूसी इंस्टीट्यूट ऑफ ओरिएंटल स्टडीज के सहयोगी जनरल अलेक्जेंडर कोलेशनिकोव को भी बल दिया.

कोलेशनिकोव ने उनसे कहा कि उन्होंने अगस्त 1947 में पोलित ब्यूरो मीटिंग की एक फाइल देखी थी, ये मीटिंग वोरोशिलोव, मिकोयान, मोलोतोव और दूसरे रूसी नेताओं ने ये चर्चा की थी कि बोस को सोवियत संघ में रहने की इजाजत दी जाए या नहीं.

रूस में रेलवे का काम देखने गए एक यहूदी इंजीनियर ने एक भारतीय दोस्त को बताया कि वो पहली बार नेताजी से जर्मनी में मिला था. इसके बाद वो उनसे 1947 में साइबेरिया के गुलाग में मिला.


यहूदी इंजीनियर ने कहा-मैं उनसे साइबेरिया में मिला था
सोवियत संघ में रहने वाले एक जर्मन यहूदी इंजीनियर बीए जेरोविच ने भी नेताजी को सोवियत संघ में देखने का दावा किया. वो वहां रेल पटरियां बिछाने का काम देख रहे थे. उन्होंने अपने एक भारतीय परिचित को बताया कि वह नेताजी से बर्लिन में मिल चुके थे. इसके बाद 1947 में उनकी साइबेरिया के पास यूरोल पहाड़ों के पास बनी रेलवे लाइन के करीब बने गुलाग में बोस से मुलाकात हुई.

इस तरह के बहुत से मामले हैं, जिसमें लोग ये कहते रहे हैं कि उन्होंने नेताजी को रूस में देखा था. इस पर कई किताबें लिखी गईं. कई इशारा करने वाले दस्तावेज दिये गए. लेकिन ये बात सही है कि इस संबंध में कोई पुख्ता साक्ष्य कभी सामने नहीं आया. लेकिन सुभाष चंद्र बोस के जिंदा रहने का मिथक कई दशकों तक जिंदा रहा. सच्चाई क्या है किसी को नहीं मालूम. खासकर मुखर्जी आयोग ने इस निष्कर्ष ने मामले को और उलझा दिया कि नेताजी का निधन 18 अगस्त 1945 के दिन ताइवान के ताइहोकू हवाई अड्डे पर नहीं हुआ था, क्योंकि उस दिन वहां कोई विमान दुर्घटनाग्रस्त नहीं हुआ था.

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First published: July 25, 2019, 9:03 PM IST
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