Coronavirus: किसलिए हवाई यात्रा ज्यादा सुरक्षित मानी जा रही है?

Coronavirus: किसलिए हवाई यात्रा ज्यादा सुरक्षित मानी जा रही है?
हवाई जहाज से कानपुर आई युवती में कोरोना का संक्रमण मिला है. (Photo-pixabay)

कोरोना (coronavirus) के बीच आज से घरेलू उड़ान सेवा शुरू (domestic flights resume) हो चुकी है. कहा जा रहा है कि विमान से यात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा सुरक्षित (air travel is safer) है. जानिए, क्या है इसकी वजह.

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फ्लाइट में यात्रा सार्वजनिक परिवहन माध्यमों में सबसे सुरक्षित मानी जा रही है. आज से ही नहीं, बल्कि कई सालों से इसपर स्टडी होती आई है, जिसके नतीजे लगभग समान रहे हैं. यही वजह है कि कोरोना वायरस के संक्रमण से जूझते होने के बाद भी देश में हवाई यात्रा की शुरुआत हो चुकी है. जानिए, किन वजहों से फ्लाइट यात्रा तुलनात्मक तौर पर सेफ मानी जा रही है.

ऐसी बीमारियां जो छींक, खांसी से फैलने वाली वॉटर ड्रॉपलेट्स से फैलती हैं, उनके बारे में World Health Organisation (WHO) ने गाइडलाइन जारी की है. इसकी शुरुआत में बताया जाता है कि बीमारी तभी फैलती है, जब फ्लाइट में सवार होने वाला कोई भी यात्री सर्दी-खांसी से पीड़ित हो. ऐसे में हवा में फैलते वायरस उसके बगल की सीट पर बैठे यात्री को प्रभावित कर सकते हैं. हालांकि ऐसा तभी होता है जब एयरफ्राफ्ट का वेंटिलेशन ठीक तरीके से काम न कर रहा हो. अब ज्यादातर फ्लाइट्स में रिसर्कुलेटिंग सिस्टम काफी अच्छा होता है, जिसके कारण केबिन की हवा 50% तक रिसाइकिल हो जाती है. इससे वायरस के फैलने का डर काफी कम हो जाता है.

फ्लाइट्स में रिसर्कुलेटिंग सिस्टम काफी अच्छा होता है, जिसके कारण केबिन की हवा  रिसाइकिल हो जाती है (Photo-pixabay)




कोविड-19 के बारे में WHO का साफ कहना है कि लोगों के बीच कम से कम एक मीटर की दूरी होनी चाहिए. अब फ्लाइट्स को देखें तो उनमें एक सीट लगभग 45 सेंटीमीटर चौड़ी होती है और तीनों ही सीटें एक दूसरे से सटी हुई होती हैं. यानी बीच की सीट खाली भी छोड़ दी जाए तो भी दो यात्रियों के बीच लगभग 45 सेंटीमीटर की ही दूरी होगी. वहीं 2 मीटर की सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए ऐसे बैठना होगा कि हर 26 सीटों के बीच केवल 4 ही यात्री बैठ सकें. यानी पूरी फ्लाइट में सिर्फ 15% सीट ही भरें.
लंबे समय बाद हवाई यात्रा रिज्यूम होने के कारण फिलहाल ऐसा करना भी मुमकिन नहीं दिख रहा. इसके बाद भी यात्रा को सुरक्षित कहा जा रहा है तो इसके पीछे अमेरिका की वो स्टडी है जो प्रतिशत में खतरे का आकलन करती है. Emory University और Georgia Tech की ये स्टडी साइंस जर्नल PNAS में आई. ये बताती है कि जैसे तमाम एहतियात के बाद भी कोई मरीज फ्लाइट में दाखिल हो गया तो उससे बीमारी कितनी दूर तक और कितने प्रतिशत तक असर कर सकती है.

जैसे मान लें कि 14वें सीट नंबर पर कोई मरीज है तो उसके खांसने-छींकने पर वायरस के फैलने का सबसे ज्यादा खतरा उसके आगे और पीछे की दो-दो सीटों पर होगा. इससे दूर बैठे यात्रियों तक पहुंचते हुए खतरा 1% हो जाएगा. वहीं फ्लाइट क्रू, जो फ्लाइट में यात्रियों की मदद के लिए लगातार घूमते रहते हैं, उन्हें 5% से 20% तक खतरा होता है. वहीं हर मिनट के साथ वायरस के फैलने का खतरा 1.8% रहता है.

विमान से सफर करने वाले यात्रियों के लिए अलग-अलग गाइडलाइन जारी हुई है (Photo-pixabay)


हालांकि स्टडी में कोरोना के बारे में कुछ भी स्पेसिफिक नहीं है. इंडियन एक्सप्रेस से अपनी बातचीत में स्टडी में शामिल एक शोधकर्ता हावर्ड वैस कहते हैं कि कोविड या इंफ्लूएंजा के बारे में कोई पक्का अनुमान नहीं लग सका है. वायरस के संक्रमण पर फ्लोरिडा में हुई एक स्टडी में पाया गया कि बिजनेस क्लास में वायरस फैलने का खतरा इकनॉमी क्लास से कम होता है क्योंकि वहां कम सीटें होती हैं और उनमें दूरी भी ज्यादा रहती है.

क्या मिडिल, विंडो या आइल सीट में भी खतरा कम या ज्यादा होता है? ये सवाल भी बार-बार उठ रहा है. यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न फ्लोरिडा के वैज्ञानिक अशोक श्रीनिवासन के मुताबिक ये हवा के बहाव यानी एयरफ्लो पर निर्भर करता है. अगर केबिन में हवा का बहाव तेज है तो किसी भी सीट पर खतरा हो सकता है. लेकिन हवा संतुलित है तो आइल यानी किनारे की सीट पर बैठे लोगों को ज्यादा खतरा रहता है, जबकि विंडो सीट सबसे सुरक्षित होती है.

आइल यानी किनारे की सीट पर बैठे लोगों को ज्यादा खतरा रहता है, जबकि विंडो सीट सबसे सुरक्षित होती है (Photo-pixabay)


वैसे कोरोना वायरस के मद्देनजर ज्यादातर राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश ने विमान से सफर करने वाले यात्रियों के लिए अलग-अलग गाइडलाइन जारी की है. इनमें से कुछ कॉमन नियमों के तहत फ्लाइट्स पकड़ने के लिए यात्रियों को विमान के समय से दो घंटे पहले एयरपोर्ट पहुंचना होगा. यात्रियों को वेब-चेक-इन कराना होगा क्योंकि हवाईअड्डों पर चेक-इन काउंटर कार्यरत नहीं होंगे. उन्हें घर से अपना बोर्डिंग पास लेकर, उसे सेनिटाइज कर, खुद वेब चेक कर एयरपोर्ट आना होगा. यात्रियों को अपने साथ एक हैंडबैग एवं एक अन्य बैग ले जाने की इजाजत होगी. यात्रियों के सामान को बाहर ही सैनिटाइज किया जाएगा. साथ ही 10-10 की संख्या में लोगों को एयरपोर्ट के अंदर भेजा जाएगा, ताकि भीड़ ना हो. इसके अलावा यात्रियों के पास फेस मास्क, हैंड ग्लव्स और आरोग्य सेतु होना चाहिए, तब फ्लाइट में एंट्री दी जाएगी.

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