क्या आपकी कार पब्लिक प्लेस है? क्या रहा अदालतों का रुख और क्यों?

प्राइवेट कार में भी मास्क लगाना अनिवार्य है.

प्राइवेट कार में भी मास्क लगाना अनिवार्य है.

1999 में केरल हाई कोर्ट (Kerala High Court) ने माना था कि भले ही पब्लिक प्लेस में हो, लेकिन प्राइवेट कार प्राइवेट स्पेस ही होती है, लेकिन इसके 20 साल बाद बहस का रुख तब बदल गया जब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इसके उलट स्थापना की.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 8, 2021, 10:51 AM IST
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क्या आपकी निजी कार पब्लिक प्लेस होती है? यह बहस एकदम नई नहीं है, लेकिन फिर सुर्खियों में इसलिए है क्योंकि दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने बीते बुधवार को एक महत्वपूर्ण रूलिंग देते हुए कहा कि भले ही आप अपनी कार में अकेले ही हों, लेकिन मास्क पहनना अनिवार्य है क्योंकि आपकी कार पब्लिक प्लेस में होती है तो आपको और आपसे दूसरों को Covid-19 का खतरा बना रहता है. अब इस रूलिंग के तीन पहलू हैं, एक निजी कार को पब्लिक स्पेस मानने का क्या तर्क रहा है, निजी वाहन में मास्क पहनने संबंधी गाइडलाइन्स क्या हैं और क्या इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट का भी कोई पक्ष रहा है?

वाहन में अकेले होने पर भी फाइन झेलने वालों की तरफ से याचिकाओं की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की जस्टिस प्रतिभा एम सिंह की सिंगल बेंच ने साफ कहा कि कोरोना के चलते भले ही वाहन में आप अकेले हों या कई लोग हों, मास्क या फेसकवर पहनना अनिवार्य है. आइए यहां से सभी पहलुओं पर गौर करते हैं.

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पहलू 1. क्यों निजी कार है पब्लिक स्पेस?
कोर्ट का सीधा सा तर्क रहा कि अगर आपकी निजी कार भी पब्लिक रोड या स्पेस में है, तो उसे पब्लिक स्पेस ही माना जाएगा. दो साल पहले बिहार के एक केस को लेकर यह मामला चर्चा में आया था, जब कोरोना वायरस का प्रकोप नहीं था. इस केस के बारे में आपको तीसरे पहलू पर चर्चा के दौरान बताएंगे, जहां सुप्रीम कोर्ट ने अहम व्यवस्था दी थी.

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मास्क न पहनने पर जुर्माने हो सकते हैं.


जस्टिस सिंह ने 'पब्लिक प्लेस' की परिभाषा के लिए कहा कि इसे यूनिवर्सली एक परिभाषा में नहीं बांधा जा सकता. मोटर व्हीकल एक्ट, इमोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट, सीसीपी, नारकोटिक्स एक्ट और पब्लिक प्लेस में धूम्रपान निषेध जैसे कई कानूनों में 'पब्लिक प्लेस' की परिभाषा की चर्चा करते हुए जस्टिस सिंह ने कहा कि स्थिति और मामले के हिसाब से ही पब्लिक प्लेस को समझा जा सकता है.

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यही नहीं जस्टिस सिंह ने इस मामले में यह हवाला भी दिया कि 'पब्लिक प्लेस' को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने यही रूलिंग रखी है कि कोई भी पब्लिक प्रॉपर्टी इस परिभाषा में है और वह प्राइवेट प्रॉपर्टी भी जो पब्लिक की पहुंच में हो.

पहलू 2. प्राइवेट कार में मास्क संबंधी ​प्रावधान
हाई कोर्ट के ताज़ा निर्देश के मद्देनज़र खबरों में कहा गया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोर्ट में कहा कि उसने वाहन में अकेले होने पर मास्क पहनने को लेकर अलग से कोई निर्देश जारी नहीं किया. लेकिन, इससे पहले दिल्ली सरकार ऐसे ही एक मामले में साफ तौर पर हाई कोर्ट को बता चुकी थी कि स्पष्ट गाइडलाइन्स रही हैं कि निजी हो या आधिकारिक, किसी भी वाहन में मास्क पहनना कंपलसरी है.

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को​रोना के प्रकोप के दौर में मास्क पहनने की अपील लगातार की जा रही है.


यही नहीं, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने भी 8 अप्रैल 2020 के एक आदेश में स्पष्ट रूप से कहा था कि किसी भी पब्लिक प्लेस में होने पर मास्क पहनना किसी भी व्यक्ति के लिए अनिवार्य है. कुल मिलाकर मास्क को लेकर गाइडलाइन्स काफी स्पष्ट रही हैं, इसे शब्दों के खेल में उलझाना ठीक नहीं है.

पहलू 3. वो दिलचस्प केस, जब सुप्रीम कोर्ट ने कार को माना पब्लिक स्पेस
साल 2016 में बिहार एक्साइज़ संशोधन एक्ट के ज़रिये राज्य को शराबमुक्त कर दिया गया था. इस कानून के मुताबिक राज्य में किसी भी पब्लिक स्पेस में या गैर आधिकारिक जगह पर शराब पीना दंडनीय था. 2019 में सुप्रीम कोर्ट में एक केस के सिलसिले में इसे लेकर जिरह हुई थी. केस इस तरह था कि 25 जून 2016 को झारखंड के गिरीडीह से पटना निजी वाहन से जा रहे सतविंदर सिंह को अल्कोहल का सेवन करने के आरोप में दंड दिया गया था.

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रोचक बात यह थी कि सिंह की कार में कोई अल्कोहल नहीं मिला था. कानून के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति किसी और राज्य से भी शराब के नशे की हालत में राज्य में आता है, तो उसे दंडित किया जा सकता है. लेकिन यह प्रावधान तब कानून में शामिल नहीं था, जब सिंह को दंडित किया गया. इसके खिलाफ पहले हाई कोर्ट और फिर सिंह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे.

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सुप्रीम कोर्ट ने सड़क पर कार को पब्लिक प्लेस कैटेगरी में माना था.


कोर्ट के सामने दो दलीलें विचार के लिए थीं, जो सिंह की तरफ से पेश की गई थीं. एक कि उन्होंने शराबबंदी वाले राज्य बिहार की सीमा में अल्कोहल सेवन नहीं किया था और दूसरी कि उन्होंने प्राइवेट कार में शराब पी थी, पब्लिक स्पेस में नहीं. इन पर सुनवाई करते हुए पहले तर्क को तो कोर्ट ने माना और सिंह से इत्तेफाक जताया, लेकिन दूसरी दलील को खारिज किया.

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तब कोर्ट ने साफ तौर पर कहा था कि यह सही है कि किसी को अधिकार नहीं है कि बगैर इजाज़त प्राइवेट वाहन को अप्रोच करे, लेकिन यह भी ठीक बात है कि पब्लिक रोड पर प्राइवेट वाहन हो तो लोगों के पास उसके संपर्क में आने का मौका रहता ही है इसलिए सड़क पर खड़े या चल रहे प्राइवेट वाहन को पब्लिक स्पेस ही माना जाएगा.
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