तो क्या आतंकी संगठन ISIS के खात्मे का एलान झूठा था?

तो क्या आतंकी संगठन ISIS के खात्मे का एलान झूठा था?
आईएसआईएस के लड़ाके आज भी कई देशों में फैले हुए हैं (सांकेतिक फोटो)

पिछले साल सीरिया ने दुनियाभर में दहशत फैलाने वाले ISIS के खात्मे की घोषणा (syria announced end of ISIS) की थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 23, 2020, 4:06 PM IST
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हाल ही में दिल्ली के धौलाकुआं से आईएसआईएस (ISIS) के संदिग्ध आतंकी (Suspected Terrorist) अबू यूसुफ़ (Abu Yusuf) गिरफ्तार हुआ है. माना जा रहा है कि वो टेलीग्राम एप के जरिए ISIS के हैंडलर्स से जुड़ा हुआ था और बम बना रहा था. संदिग्ध के घर से मानव बम जैकेट और विस्फोटक भी मिल चुका है. ये सब बातें तब आ रही हैं जब पिछले ही साल सीरिया ने ISIS के खात्मे का एलान किया था. हालांकि तब भी पश्चिमी देशों ने एक घोषणा पर कई डर जताए थे.

सीरिया ने की थी घोषणा
साल 2019 के मार्च में सीरिया की सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज (SDF) ने यह घोषणा की थी कि इस्लामिक स्टेट फॉर इराक एंड सीरिया (ISIS) के चंगुल से उस आखिरी बघौज गांव को भी मुक्त कराया जा चुका. यानी एक तरह से ISIS के खात्मे की बात थी. हालांकि तुरंत ही इसपर अमेरिका समेत कई शक्तिशाली देशों ने आपत्ति जताई थी. यूएस मिलिट्री के केंद्रीय कमांड मुस्तफा बाली ने एक बयान में कहा कि ISIS के पास इतनी क्षमता है कि वह मिडिल ईस्ट ही नहीं इसके बाहर भी आतंकी घटनाओं को अंजाम दे सकता है.

साल 2013 से 2014 के बीच इसने सीरिया में चारों तरफ दहशत फैला रखी थी (सांकेतिक फोटो)

क्या है पश्चिमी देशों का डर


कुछ ऐसी ही सोच दूसरे ताकतवर देशों ने भी दिखाई थी. असल में कई देशों का मानना है कि आईएसआईएस के लड़ाके आज भी कई देशों में फैले हुए हैं. ऐसे में जब उनके संगठनों के खात्मे की घोषणा हो गई है तो वे कई जगहों पर अपने संगठन के विस्तार के लिए दांव-पेंच अपना सकते हैं. यूरोपीय देशों की ओर से कई जगहों पर यह चिंता जताई जा चुकी है कि अगर आईएसआईएस के खात्मे की घोषणा कर दी जाएगी तो इस संगठन को बरती जा रही सख्ती में नरमी आ जाएगी.

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कितना ताकतवर है संगठन
ISIS को दुनिया का सबसे अमीर आतंकी संगठन माना जाता है जिसका बजट 2 अरब डॉलर का है. साल 2013 में बने इस संगठन को में अल कायदा का समर्थन मिला, जो कि खुद एक इस्लामिक चरमपंथी संगठन है. ISIS ने साल 2014 में जब सीरिया और इराक के क्षेत्रों पर कब्जा किया था और खिलाफत की घोषणा की थी, उस वक्त, एक अनुमान के मुताबिक, दुनियाभर से करीब 40,000 लोगों ने इसमें शामिल होने के लिए हथियार उठाए थे. बाद में ISIS और अल कायदा अलग विचारधारा के चलते अलग हो गए.

लगभग 10,000 सदस्य संख्या (सक्रिय) वाले इस संगठन को इसकी क्रूरता के लिए जाना जाता है (सांकेतिक फोटो)


फिलहाल लगभग 10,000 सदस्य संख्या (सक्रिय) वाले इस संगठन को इसकी क्रूरता के लिए जाना जाता है. तेल खदानों पर कब्जा, अपहरण, फिरौती, लड़कियों की खरीद-फरोख्त, नशे का व्यापार जैसे गैरकानूनी कामों से ISIS पैसा कमाता है और आतंकी गतिविधियां चलाता है. ऐसे में कुछ ही सालों के भीतर इसके खत्म होने की बात एकदम गलत लगती है.

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अफ्रीका को बनाया नया ठिकाना
मिडिल ईस्ट में अमेरिकी दखल के बाद इसके पैर उखड़ गए, जिसके बाद से ये संगठन दूसरी जगहों पर अपने पैर फैलाने लगा. फिलहाल संगठन की ताकत जॉर्डन, इजरायल, फिलिस्तीन, लेबनान, कुवैत, साइप्रस, दक्षिणी तुर्की और पाकिस्तान से लेकर भारत तक फैली हुई है. अफ्रीका इसका नया ठिकाना बना हुआ है. बता दें कि वहां सोने की खदानों की भरमार है. चूंकि आतंकी संगठन को अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए खजाने की जरूरत है, लिहाजा वो अब अफ्रीका के बुर्किना फासो तक पहुंच गया है. यहां जंगल भी हैं और सोने की खानें भी.

बुर्किना फासो के अलावा इस्लामिक स्टेट माली और नाइजर में भी सोने की खदानों पर कब्जा कर रहा है (सांकेतिक फोटो)


कर रहे सोने की खदानों पर कब्जा
इस्लामिक चरमपंथियों के लिए ये आम के आम, सोने के दाम की तरह है. दुर्गम इलाके में वे आसानी से छिप सकते हैं. साथ ही खदानों से सोना निकालकर उन्हें बेच रहे हैं. माना जा रहा है कि बुर्किना फासो के अलावा इस्लामिक स्टेट माली और नाइजर में भी सोने की खदानों पर कब्जा कर रहा है, जिसकी लागत 2 अरब डॉलर से भी ज्यादा हो सकती है.

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खदानों से निकाला गया सोना मजदूरों को नहीं मिलता, बल्कि तुरंत ISIS के कब्जे में चला जाता है. वहां से ये पड़ोसी देश Togo पहुंचता है, जो कि सोना तस्करी का गढ़ माना जाता है. टोगो से होते हुए इसे UAE (संयुक्त अरब अमीरात) भेजा जाता है, जहां रिफाइनरी में पिघलाकर इसे सऊदी , तुर्की और स्विट्जरलैंड भेज दिया जाता है. यही सोना भारत भी आता है. इस तरह से सोना बेचकर आतंकी हथियार खरीद रहे हैं, नए सदस्यों की भर्तियां कर रहे हैं और नशे का कारोबार बढ़ा रहे हैं. बता दें कि नशे का कारोबार भी चरमपंथी आतंकी समूहों की कमाई का बड़ा जरिया है.
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