ईरान-इजरायल के बीच हो रहा साइबर युद्ध क्यों खतरनाक माना जा रहा है?

ईरान-इजरायल के बीच हो रहा साइबर युद्ध क्यों खतरनाक माना जा रहा है?
इजरायल और ईरान के बीच लगातार साइबर हमले हो रहे हैं- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)

इजरायल और ईरान के बीच लगातार साइबर हमले (cyber attack in Israel and Iran) हो रहे हैं. इजरायल ने ईरान के परमाणु संयंत्र को आग के हवाले कर दिया. वहीं इजरायल का आरोप है कि ईरान ने उनके यहां के जल संयंत्र को हैक कर उसका पानी जहरीला बनाने की कोशिश की.

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कोरोना के कारण दुनिया में आई आर्थिक मंदी के बाद भी चीन अपनी सीमाएं बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. एक के बाद एक वो ऐसे काम कर रहा है, जिससे बहुत से देश बौखलाए हुए हैं. दूसरी ओर ईरान और इजरायल में अलग ही जंग जारी है. वे एक-दूसरे पर साइबर अटैक कर रहे हैं. माना जा रहा है कि अगर कभी तीसरा विश्वयुद्ध हुआ तो सेनाएं आमने-सामने होने की बजाए हैकर्स को रखेंगी, जो किसी कोड से ही दुश्मन देश की सुरक्षा में सेंध लगा दें.

ऐसे शुरू हुआ हमला
हाल ही में इजरायल ने ईरान पर साइबर अटैक किया. एक हमला उसके यूरेनियम संवर्धन केंद्र पर हुआ तो दूसरा मिसाइल बनाने वाले केंद्र पर. ये केंद्र जमीन के भीतर था और अंडरग्राउंड रहते हुए ही काम कर रहा था. इजरायल का कहना है कि ईरान लगातार अपने-आप को ज्यादा परमाणु संपन्न बना रहा है और इसे यहूदियों के खिलाफ इस्तेमाल किया जाएगा. माना जा रहा है कि इस हमले से ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम कई महीने पीछे चला गया है.

कथित तौर पर ईरान ने इजरायल के पानी की सप्लाई को हैक करने की कोशिश की

वैसे ईरान ने ही लड़ाई की पहल की थी


ईरान ने कथित रूप से अप्रैल में इजरायल के पानी सप्लाई सिस्टम को हैक करने की कोशिश की थी. आरोप लगाया गया उसका मकसद सिस्टम हैक करके पानी को जहरीला बनाना था. फाइनेंशियल टाइम्स में आई रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने कथित तौर पर इजरायल की कंप्यूटरिकृत जल प्रणाली को हैक करके उसमें क्लोरीन का स्तर बढ़ाने की कोशिश की. इससे पानी जहरीला हो जाता और बहुत से लोग बीमार यहां तक कि गंभीर रूप से बीमार हो सकते थे. इजरायल की खुफिया एजेंसी का ये भी आरोप है कि ईरानी हैकर पानी का सप्लाई बंद करने की फिराक में थे, ताकि अप्रैल-मई के दौरान बहुत तेज गर्मी और लू में भी हजारों नागरिक बिना पानी के रहें. हालांकि ईरान को वॉटर सप्लाई सिस्टम हैक करने में सफलता नहीं मिली.

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माना जा रहा है कि पानी में क्लोरीन बढ़ाने जैसी कोशिशों से गुस्साए इजरायल ने ईरान के परमाणु संयंत्र पर हमला बोल दिया. वैसे दोनों देशों के बीच साइबर हमले नई बात नहीं, बल्कि ये लगभग एक दशक से चला आ रहा है. साल 2012 में ईरान के हैकर्स ने इजरायल के अधिकारियों के दस्तावेज चुरा लिए थे. तभी से लड़ाई चली आ रही है.

पानी में क्लोरीन बढ़ाने जैसी कोशिशों से गुस्साए इजरायल ने ईरान के परमाणु संयंत्र पर हमला बोल दिया- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


दोनों देशों के बीच क्या है मसला
साल 1979 में हुई ईरानी क्रांति की वजह से वहां कट्टरपंथी नेता सत्ता में आ गए. तब से ही ईरान कह रहा है कि इजरायल ने मुस्लिमों की जमीन पर कब्जा कर रखा है और वो उन्हें वहां से हटाना चाहता है. इसके लिए सीधी जंग की बजाए ईरान उन समूहों को समर्थन देता है जो इजरायल पर वार करें, जैसे हिज्बुल्ला और फलस्तीनी संगठन हमास. इधर इजरायल भी ईरान को उसकी परमाणु शक्ति के कारण खतरे की तरह देखता है. वो मानता है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए वरना वो इजरायल पर इसका इस्तेमाल कर सकता है.

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क्यों है ये युद्ध खतरनाक
ईरान और इजरायल के बीच चल रहे ये साइबर अटैक दुनिया का अगला युद्ध हो सकते हैं. इसी साल वर्ल्ड इकॉनॉमिक फोरम ने अपनी ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट में कहा कि साइबर हमले अब दुनिया पर 10 सबसे बड़े खतरों में से एक हैं. फोरम की ये चिंता बेवजह नहीं. फिलहाल लगभग सारे ही देशों ने अपने यहां हैकर्स की पूरी आर्मी तैनात कर रखी है. वे दुश्मन देशों पर छोटे-मोटे हमले भी करने लगे हैं. ये शुरुआत है. माना जा रहा है कि आगे चलकर इसी तरीके से कुछ कोड्स के सहारे पूरे के पूरे देश को दिवालिया बना दिया जाएगा या उसकी सुरक्षा खत्म कर दी जाएगी.

सेना पर खर्च की बजाए दुश्मन देश को कमजोर करने के लिए साइबर वार छेड़ना कम खर्चीला है (Photo-pixabay)


चीन साइबर अटैक में काफी आगे है. फॉरेन पॉलिसी (Foreign Policy) मैगजीन के अनुसार चीन के पास हैकर्स की फौज (China's hacker army) है, जिसमें लगभग 1 लाख प्रशिक्षित हैकर्स हैं. चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) का मानना है कि सेना पर खर्च की बजाए दुश्मन देश को कमजोर करने के लिए साइबर वार छेड़ना कम खर्चीला है.

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चीन की साइबर आर्मी है खतरनाक
चीन की इस ताकत पर US-China Economic and Security Review Commission की रिपोर्ट भी आ चुकी है. इसमें भी साफ था कि चीन की साइबर आर्मी इस हद तक ताकतवार हो चुकी है कि अगर युद्ध छिड़े तो चीन को ग्राउंड की सेना की उतनी जरूरत नहीं होगी, जितनी मदद हैकिंग से मिल जाएगी. चीन ही क्यों, अमेरिका और यहां तक कि नॉर्थ कोरिया जैसे आर्थिक तौर पर पिछड़े देश में भी साइबर आर्मी बन चुकी है.
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