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भारत-पाकिस्तान टकराव में बहुत खास है इजरायल की भूमिका

News18Hindi
Updated: March 2, 2019, 1:58 PM IST
भारत-पाकिस्तान टकराव में बहुत खास है इजरायल की भूमिका
इजरायल ने भारत को हर तरह की मदद की पेशकश कर रखी है. इजरायल का ये ऑफर बेहद अहम है, क्योंकि ये छोटा सा देश अपनी आर्मी के लिए बेहद मशहूर है. इजरायली आर्मी की ताकत का लोहा अमेरिका भी मानता है.

इजरायल ने भारत को हर तरह की मदद की पेशकश कर रखी है. इजरायल का ये ऑफर बेहद अहम है, क्योंकि ये छोटा सा देश अपनी आर्मी के लिए बेहद मशहूर है. इजरायली आर्मी की ताकत का लोहा अमेरिका भी मानता है.

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भारत और पाकिस्तान के बीच टकराव की स्थिति में भारत को इजरायल से खासा सम‌र्थन मिल रहा है. इससे भारत का पलड़ा भारी है. दरअसल, 14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के काफिले पर हमले के बाद भारत के ओर से पाकिस्तान पर सख्ती बरत रहा है. इसमें कई देशों से इंडिया को समर्थन मिला, लेकिन इजरायल ने भारत को हर तरह की मदद की पेशकश की. इजरायल का ये ऑफर बेहद अहम है, क्योंकि ये छोटा सा देश अपनी आर्मी के लिए बेहद मशहूर है. इजरायली आर्मी की ताकत का लोहा अमेरिका भी मानता है.

लेकिन इजरायल ऐसा क्यों कर रहा है? इसकी वजह भी साफ है. असल में पिछले महीने ही भारतीय वायुसेना की मानवरहित युद्ध क्षमता को और मजबूत बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने 54 इजरायली HAROP ड्रोन की खरीद को मंजूरी दी है. ये किलर ड्रोन दुश्मन के हाई-वैल्यू मिलिट्री टारगेट को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर सकता है. न्यूज एजेंसी एएनआई के सूत्रों के मुताबिक पिछले महीने एक उच्च स्तरीय बैठक में रक्षा मंत्रालय ने इन 54 हमलावर ड्रोन्स की खरीद को मंजूरी दे दी थी. खबरों के मुताबिक ये ड्रोन चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर तैनात किए जाएंगे.

क्या है इजरायली HAROP ड्रोन की खासियत?
आपको बता दें कि ये ड्रोन इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर से लैस होते हैं, जो विस्फोट करने से पहले हाई वैल्यू वाले सैन्य ठिकानों जैसे निगरानी के ठिकाने और रडार स्टेशनों पर निगरानी भी कर सकते हैं. इजराइल के हारोप ड्रोन दुश्मन ठिकानों पर क्रैश होकर उन्हें तबाह कर देते हैं. इनमें इलेक्ट्रो ऑप्टिकल सेंसर भी लगा होता है, जिससे ठिकाने के बारे में भी पता लगाया जा सकता है. मौजूदा समय में वायुसेना के पास ऐसे 110 ड्रोन हैं, जिनका नाम पी-4 रखा गया है.



पीएम मोदी की फाइल फोटो


वैसे सिर्फ वायुसेना ही नहीं, मोदी सरकार ने नौसेना के लिए 111 हेलिकॉप्टर खरीदने का फैसला किया है. ये सभी हेलिकॉप्टर रणनीतिगत साझेदारी (एसपी) मॉडल के तहत खरीदे जाएंगे. आर्मी के लिए भी 72 हजार सिग सॉर असॉल्ट राइफल्स खरीदे जाएंगे. इसके लिए मोदी सरकार ने जर्मनी की कंपनी से करार किया है. यह निर्णय फास्टट्रैक प्रक्रिया के तहत लिया गया है.

सुबह से रात तक कैसे होती है पाकिस्तान में आतंकियों की ट्रेनिंग?

भारत सरकार की ओर से दी जाने वाली इस मंजूरी के बाद इजरायल ने खुले तौर पर मदद की पेशकश कर दी. ऐसे में इजरायल की आर्मी के युद्धों का इतिहास भी एक बड़ा फैक्टर बना. इजरायल की क्षमता से पाकिस्तान वाकिफ है.

खूंखार आतंकवादियों को चुन-चुनकर मौत के घाट उतारता है इजरायल
आतंकियों को मौत को सबक सिखाने को लेकर इजरायल का ऑपरेशन 'रैथ ऑफ गॉड' काफी मशहूर है. इजरायल की सेना ने यह ऑपरेशन 5 सितंबर 1972 को आतंकियों के द्वारा की गई एक खौफनाक वारदात के जवाबी कार्रवाई के तौर पर की थी. ओलंपिक खेलों के दौरान फलस्तीनी आतंकवादियों ने जर्मनी के म्यूनिख शहर में 11 इजरायली खिलाड़ियों को बंधक बना लिया था. आतंकियों ने मांग रखी कि इजरायल की जेलों में बंद 234 फलस्तीनियों को रिहा किया जाए.

इजरायल ने जब ऐसा करने से मना किया तो आतंकियों ने दो खिलाड़ियों के शवों को बाहर फेंक कर दवाब बढ़ाने की कोशिश की. लेकिन इजरायल का इरादा नहीं बदला. इजरायल की प्रधानमंत्री गोल्डा मेयर के सख्त तेवर देखकर दुनिया दंग थी. लोगों को लग रहा था कि इजरायल ने अपने खिलाड़ियों को आतंकियों के भरोसे छोड़ दिया है. लेकिन हकीकत ये थी कि इजरायल जर्मनी को इस बात के लिए राजी करने में जुटा था कि वो म्यूनिख में अपने स्पेशल फोर्सेस भेज सके, लेकिन जर्मनी इसके लिए तैयार नहीं हुआ.

युद्ध में भावुक हुए बगैर आतंकियों का संहार करता है इजरायल
बाद में आतंकियों ने कुछ नई मांगें रखीं. इजरायल सरकार ने उन्हें मान लिया और खिलाड़ियों को आतंकियों के कब्जे वाली बस से उतारकर हेलिकॉप्टर में बिठाया गया. इसके कुछ ही सेकेंड बाद इजरायल के शार्प शूटरों ने आतंकियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया. खुद को चारों तरफ से घिरता देख आतंकियों ने निहत्थे खिलाड़ियों पर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं. एक हेलिकॉप्टर को बम से उड़ा दिया गया.

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फिर दूसरे हेलिकॉप्टर में बैठे खिलाड़ियों को भी गोलियों से भून दिया गया. कुछ ही मिनटों में एयरबेस पर मौजूद हर आतंकी मारा गया. साथ ही इजरायल के 9 खिलाड़ी भी आतंकियों की गोलियों के शिकार बन गए. शुरू में टीवी के जरिए ये खबर फैलाई गई कि सिर्फ आतंकी मारे गए हैं, सभी 9 खिलाड़ी सुरक्षित हैं लेकिन अगली सुबह ये साफ हो गया कि इजरायल का कोई भी खिलाड़ी जिंदा नहीं बचा है.

इसके बाद शुरू हुआ इजरायल के बदले का मिशन
बात देश की शान की थी, लिहाजा बदले के लिए प्लान तैयार किया गया. इजरायल ने अपनी खुफिया एजेंसी मोसाद की मदद से उन सभी लोगों के कत्ल की योजना बनाई, जिनका वास्ता ऑपरेशन ब्लैक सेंप्टेंबर से था. इस मिशन को नाम दिया गया 'रैथ ऑफ गॉड' यानी ईश्वर का कहर. म्यूनिख नरसंहार के दो दिन के बाद इजरायली सेना ने सीरिया और लेबनान में मौजूद फलस्तीन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन के 10 ठिकानों पर बमबारी की और करीब 200 आतंकियों और आम नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया. लेकिन इजरायली प्रधानमंत्री गोल्डा मेयर इतने भर से रुकने वाली नहीं थीं. उन्होंने इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद के साथ गुप्त मीटिंग की और उनसे एक ऐसा मिशन चलाने को कहा जिसके तहत दुनिया के अलग-अलग देशों में फैले उन सभी लोगों को जान से मार दिया जाए, जिनका वास्ता ब्लैक सेप्टेंबर से था.

कुछ दूर तो कोहनी के सहारे ट्रेन चलाकर दुर्गाशंकर लेकर आए लेकिन फिर ट्रेक टूटा होने कि वजह से वहीं रूकना पडा. ट्रेन के इंजन को डेड कर दुर्गाशंकर ने अपनी राइफल ली और पैदल ही भारतीय सीमा की ओर रवाना हो गए. इस बीच दुर्गाशंकर को भारत का एक हेलीकाप्टर रैकी करता हुआ नजर आया, जिसे लैंण्ड कराया गया फिर दुर्गाशंकर उसमें भारतीय सीमा तक पहुंचे.

रैथ ऑफ गॉड ऑपरेशनः मोसाद ने तैयार की लिस्ट
सबसे पहले मोसाद ने ऐसे लोगों की लिस्ट बनाई, जिनका संबंध म्यूनिख हमले से था. इसके बाद ऐसे एजेंट्स तलाशे गए जो गुमनाम रह कर ऑपरेशन रैथ ऑफ गॉड को अंजाम दे सकें. मिशन शुरू होने के कुछ ही महीनों के अंदर मोसाद एजेंट्स ने वेल ज्वेटर और महमूद हमशारी का कत्ल कर सनसनी मचा दी. अब बारी थी अगले निशाने की. यहां भी मोसाद की टीम ने ब्लैक सेप्टेंबर से संबंध रखने के शक में एक शख्स की दिन-रात निगरानी शुरू की. हुसैन अल बशीर नाम का ये शख्स होटल में रहता था, और होटल में वो सिर्फ रात को आता था और दिन शुरू होते ही निकल जाता था. मोसाद की टीम ने उसे खत्म करने के लिए उसके बिस्तर में बम लगाने का प्लान बनाया.

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बम लगाना कोई मुश्किल काम नहीं था, ये काम तो आसानी से हो गया. मुश्किल ये था कि कैसे ये पता किया जाए कि हुसैन अल बशीर बिस्तर पर है तभी धमाका किया जा सकता है. इसके लिए एक मोसाद एजेंट ने बशीर के ठीक बगल वाला कमरा किराए पर ले लिया. वहां की बालकनी से बशीर के कमरे में देखा जा सकता था. रात को जैसे ही बशीर बिस्तर पर सोने के लिए गया. एक धमाके के साथ उसका पूरा कमरा उड़ गया. इजरायल का मानना था कि वो साइप्रस में ब्लैक सेप्टेंबर का प्रमुख था, हालांकि उसकी हत्या के पीछे रूसी खुफिया एजेंसी केजीबी से उसकी नजदीकियां अहम मानी गईं.

इजरायल ने ऐसे बनाया प्लान, नहीं छोड़ा किसी को
फलस्तीनी आतंकियों को हथियार मुहैया कराने के शक में बेरूत के प्रोफेसर बासिल अल कुबैसी को गोली मार दी गई. मोसाद के दो एजेंट्स ने उसे 12 गोलियां मारीं. मोसाद की लिस्ट में शामिल तीन टार्गेट लेबनान में भारी सुरक्षा के बीच रह रहे थे और अभी तक की हत्याओं के तरीकों से उन तक पहुंचना नामुमकिन था. इसलिए उनके लिए विशेष ऑपरेशन शुरू किया गया, जिसका नाम था ऑपरेशन स्प्रिंग ऑफ यूथ. ये ऑपरेशन रैथ ऑफ गॉड का ही एक हिस्सा था.

दरअसल 1971 के युद्ध के दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश करते हुए करीब तीस किलोमीटर तक कब्जा कर लिया था. उस दौरान भारतीय सेना का जब असलहा खत्म होने लगा तो सेना ने पाकिस्तानी सीमा में जवानों को असलहा उपलब्ध कराने का जिम्मा दुर्गाशंकर पालीवाल को मिला था.

ऑपरेशन 'स्प्रिंग ऑफ यूथ'
9 अप्रैल 1973 को इजरायल के कुछ कमांडो लेबनान के समुद्री किनारे पर स्पीडबोट के जरिए पहुंचे. इन कमांडोज को मोसाद एजेंट्स ने कार से टार्गेट के करीब पहुंचाया. कमांडो आम लोगों की पोशाक में थे, और कुछ ने महिलाओं के कपड़े पहन रखे थे. पूरी तैयारी के साथ इजरायली कमांडोज की टीम ने इमारत पर हमला किया. इस ऑपरेशन के दौरान लेबनान के दो पुलिस अफसर, एक इटैलियन नागरिक भी मारा गया.

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इसमें इजरायल का एक कमांडो घायल हो गया. इस ऑपरेशन के फौरन बाद तीन हमले और किए गए. इनमें साइप्रस में जाइद मुचासी को एथेंस के एक होटल रूम में बम से उड़ा दिया गया. वहीं ब्लैक सेप्टेंबर के दो किशोर सदस्य अब्देल हमीन शिबी और अब्देल हादी नाका रोम में कार धमाके में घायल हो गए.

दुनियाभर में चलता रहा इजरायल का ऑपरेशन
मोसाद के एजेंट्स दुनिया में घूम-घूम म्यूनिख क़त्ल-ए-आम के गुनहगारों को मौत बांट रहे थे लेकिन क्या इजरायल के बदले की कहानी थम गई. इंतकाम की आग में धधक रहे इजरायल की सीक्रेट सर्विस एजेंसी मोसाद का खूनी खेल अभी थमा नहीं था क्योंकि उसकी हिट लिस्ट में और लोगों के नाम शुमार थे और जब तक इस हिटलिस्ट से सभी नाम मिटा नहीं दिए जाते तब तक उसके एजेंट्स का मिशन खत्म नहीं हो सकता था लिहाज़ा मोसाद के एजेंट्स एक बार फिर अपने मिशन को अंजाम तक पहुंचाने में जुट गए. अब बारी थी उन लोगों को उनके अंजाम तक पहुंचाने की जो सीधे तौर पर म्यूनिख कत्ल-ए-आम से जुड़े थे और एक बार फिर शुरू हुआ मोसाद का खूनी इंतकाम और अपने इस मिशन के तहत...

  • 28 जून 1973 को ब्लैक सेप्टेंबर से जुड़े मोहम्मद बउदिया को उसकी कार की सीट में बम लगाकर उड़ा दिया.

  • 15 दिसंबर 1979 को दो फलस्तीनी अली सलेम अहमद और इब्राहिम अब्दुल अजीज की साइप्रस में हत्या हो गई.

  • 17 जून 1982 को पीएलओ के दो वरिष्ठ सदस्यों को इटली में अलग-अलग हमलों में मार दिया गया.

  • 23 जुलाई 1982 को पेरिस में पीएलओ के दफ्तर में उप निदेशक फदल दानी को कार बम से उड़ा दिया गया.

    सांकेतिक तस्वीर

  • 21 अगस्त 1983 को पीएलओ का सदस्य ममून मेराइश एथेंस में मार दिया गया.

  • 10 जून 1986 को ग्रीस की राजधानी एथेंस में पीएलओ के डीएफएलपी गुट का महासचिव खालिद अहमद नजल मारा गया.

  • 21 अक्टूबर 1986 को पीएलओ के सदस्य मुंजर अबु गजाला को कार बम से उड़ा दिया गया.

  • 14 फरवरी 1988 को साइप्रस के लीमासोल में कार में धमाका कर फलस्तीन के दो नागरिकों को मार दिया गया.


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इन आंकड़ों को देखने के बाद ये तो साफ हो जाता है कि मोसाद के एजेंट्स दुनिया के अलग-अलग देशों में जाकर करीब 20 साल तक हत्याओं को अंजाम देते रहे. अंत में तीन असफल कोशिशों के बाद मोसाद ने साल 1979 में म्यूनिख कत्ल-ए-आम के मास्टरमाइंड अली हसन सालामेह को भी बम धमाके में मार गिराया. म्यूनिख कत्ल-ए-आम का गुनहगार मारा जा चुका था लेकिन म्यूनिख हमले के 7 साल बाद तक चले मोसाद के ऑपरेशन में उसके एजेंट्स ने 11 में से 9 फलस्तीनियों को मौत के घाट उतार दिया था. हालांकि कहा जाता है कि करीब 20 साल तक चले इस सीक्रेट ऑपरेशन में मोसाद ने कुल 35 फलस्तीनियों को मारा था.

इजरायल की आतंकियों को लेकर इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को देखते हुए ओर खुलेआम भारत की मदद की पेशकश ने भारत का मनोबल काफी बढ़ा दिया है. साथ ही इजरायल से भारत ने अब अपनी वायुसेना के लिए खास किस्म के ड्रोन खरीदने जा रही है.

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First published: March 2, 2019, 12:30 PM IST
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