दोस्त इजरायल भारत को देगा अत्याधुनिक तकनीक, चीन को किया इनकार

अवाक्स एयरक्राफ्ट के नाम से ये सिस्टम अत्याधुनिक तकनीकों से लैस हैं (Photo-dodlive)

अवाक्स एयरक्राफ्ट के नाम से ये सिस्टम अत्याधुनिक तकनीकों से लैस हैं (Photo-dodlive)

इजरायल ऐसा अर्ली वॉर्निंग सिस्टम दे सकता (Israel will give early warning system technique to India) है जो 312,000 किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन को देख सके.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 1, 2020, 6:42 AM IST
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लद्दाख में चीन से तनाव (India-China border tension)के बीच भारत अपने-आप को सैन्य मोर्चे पर पूरी तरह से तैयार कर रहा है. इसी सिलसिले में वो इजरायल से एक खास तरह का सर्विलांस सिस्टम खरीदने जा रहा है. अवाक्स एयरक्राफ्ट (AWACS aircraft) के नाम से ये सिस्टम अत्याधुनिक तकनीकों से लैस हैं, जो मीलों दूर से चीन की गतिविधियों पर नजर रख सकेंगे. ये वही सिस्टम है, जिसे इजरायल ने चीन को देने से इनकार कर दिया था. जानिए, क्या है इस सिस्टम की खासियत.

इजरायल के अर्ली वॉर्निंग कंट्रोल सिस्‍टम से लैस अवाक्‍स प्‍लेन पूरा नाम Phalcon’s Airborne Warning and Control System (AWACS) है. ये असल में सर्विलांस सिस्टम हैं, जो हवा से ही नीचे दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखते हैं. वैसे इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये लड़ाई के दौरान C2BM यानी कमांड, कंट्रोल और बैटल मैनेजमेंट में मदद करते हैं.

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इसके जरिए एयरक्राफ्ट से लेकर पनडुब्बी को भी सचेत किया जा सकता है कि आगे उनके लिए कहां, क्या खतरा है और उससे कैसे बचा जा सकता है. कुल मिलाकर ये सिस्टम डिफेंसिव यानी रक्षात्मक और ऑफेंसिव यानी आक्रामक दोनों ही तरीकों से काम करता है.
सिस्टम डिफेंसिव यानी रक्षात्मक और ऑफेंसिव यानी आक्रामक दोनों ही तरीकों से काम करता है (Photo-acc.af.mil)


आधुनिक अवाक्स सिस्टम 400 किलोमीटर दूर से समस्या को पहचान लेता है. एक अवाक्स तकनीक वाला एयरक्राफ्ट अगर जमीन से 9000 मीटर की ऊंचाई पर है तो ये लगभग 312,000 स्क्वायर किलोमीटर का एरिया कवर कर सकता है. ये एक लंबी-चौड़ी रेंज है, जो सीमा के आसपास से लेकर दूर-दराज तक किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रख सकती है. इस तरह का पहला सिस्टम साल 1930 में अमेरिका में बना था. इसके बाद से लगातार हर देश अपने लिए किसी न किसी तरह का अवाक्स तैयार करने की कोशिश करता आया है. इजरायल इसमें सबसे आगे खड़े देशों की श्रेणी में है.

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वहां के अवाक्स को इजरायल एरोस्पेस इंडस्ट्रीज और एल्टा इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्रीज ऑफ इजरायल ने मिलकर तैयार किया है. इसका पहला काम सर्विलांस पर फोकस करता है. भारतीय वायु सेना के साथ भी इजरायल मिलकर ये सिस्टम बना रहा है. अब इसी सिस्टम के दो मॉडल भारतीय सेना खरीदने जा रही है. इस बारे में यूरेशियन टाइम्स में एक रिपोर्ट आई है.

रक्षा मंत्रालय इसे लेकर जल्द ही इजरायल के साथ समझौते को अंतिम रूप दे सकता है


इस बारे में येरूशलम के पत्रकार हरिंदर मिश्रा ने बताया कि भारत इजरायल से 2 ऐसे एयरक्राफ्ट लेगा. ये दोनों देशों के बीच उसी करार के तहत शामिल किया गया है, जिसके तहत युद्ध के साजोसामान के निर्माण से लेकर खरीदी भी शामिल है. बता दें कि फिलहाल इजरायल भारतीय सेना के लिए हथियारों का टॉप सप्‍लायर है. बीबीसी से बात करते हुए पत्रकार मिश्रा ने बताया कि इजरायल हालातों को देखते हुए जल्दी से जल्दी इस डील के लिए पुश कर रहा है. ये डील 2 बिलियन डॉलर की है.

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उम्मीद की जा रही है कि भारतीय रक्षा मंत्रालय इसे लेकर जल्द ही इजरायल के साथ समझौते को अंतिम रूप दे सकता है.

यहीं ये जानना भी दिलचस्प है कि इजरायल पहले चीन को भी अवाक्स देने वाला था लेकिन अमेरिका ने इसपर टोक दिया. यूरेशियन टाइम्स के मुताबिक लगभग दो दशक पहले ही अमेरिका ने इजरायल को चीन को इस एयरक्राफ्ट की सप्लाई करने से मना किया था. चीन तब तेजी से अपनी अर्थव्यवस्था मजबूत कर रहा था, साथ ही वो सैन्य मोर्चों पर भी मजबूती बढ़ा रहा था.

भारत ने साल 2019 में पाकिस्तान से तनाव के बीच इस सर्विलांस सिस्टम की जरूरत महसूस की


चूंकि चीन का रवैया हमेशा से ही विस्तारवादी रहा है, यही देखते हुए अमेरिका ने चीन को ये एयरक्राफ्ट मुहैया कराने से इजरायल को मना किया. खासकर ताइवान मुद्दे पर अमेरिका और चीन में तनाव हमेशा से रहा. ये भी एक वजह रही कि अमेरिका चीन को सर्विलांस की तकनीक मुहैया न होने देने की बात करता रहा.

सबसे पहले भारत ने साल 2019 में पाकिस्तान से तनाव के बीच इस सर्विलांस सिस्टम की जरूरत महसूस की. पाकिस्तान के बालाकोट में भारत की एयर स्ट्राइक के बात पाक सेना ने भी ऐसी कोशिश की थी लेकिन कामयाब नहीं हो सका. हालांकि इसके बाद ही भारत के रक्षा मंत्रालय ने अर्ली वॉर्निंग सिस्‍टम के लिए इजरायल से बात की.

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बता दें कि भारतीय वायुसेना पहले से ही तीन फाल्कन अवाक्स को ऑपरेट करती है. इन्हें वायुसेना में 2009 से लेकर 2011 के बीच शामिल किया गया था. अब जिन दो अवाक्स को इजरायल से खरीदने की बातचीत चल रही है वे पहले के तीन फाल्कन की तुलना में अधिक ताकतवर होंगे. इनसे लंबी दूरी तक कई प्रकार के फ्लाइंग ऑब्जेक्ट्स पर नजर रखी जा सकेगी. इजरायल के फाल्कन अवाक्स को रूस की इल्यूसिन-76 हैवी लिफ्ट एयरक्राफ्ट के ऊपर लगाया जाएगा.
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