चंद्रयान-2 के एक साल पूरे, इसरो ने कहा, 7 साल का ईंधन और है इसमें

चंद्रयान-2 के एक साल पूरे, इसरो ने कहा, 7 साल का ईंधन और है इसमें
चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर को चंद्रमा की कक्षा में पहुंचे एक साल पूरे हो गए हैं.

चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) के ऑर्बिटर (Orbiter) को चंद्रमा (Moon) की कक्षा में रहते हुए एक साल का समय हो चुका है. इसरो (ISRO) ने इस बारे में विस्तार से जानकारी दी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 21, 2020, 9:00 PM IST
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भारत (India) का चंद्रमा के लिए दूसरा अंतरिक्ष अभियान चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) ने चंद्रमा की कक्षा का चक्कर लगाते हुए एक साल पूरे कर लिए हैं. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का कहना है कि अभी इस ऑर्बिटर (Orbiter) के सारे उपकरण सही तरह से काम कर रहे हैं और इसमें इतना ईंधन है जिससे यह अगले सात साल और काम कर सकता है.

एक साल पहले चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश
चंद्रयान-2 को पिछले साल 22 जुलाई को प्रक्षेपित किया गया था और इसने चंद्रमा की कक्षा में 20 अगस्त को ही प्रवेश किया था. इसके साथ ही एक विक्रम नाम का लैंडर भी भेजा गया था जिसे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरा जाना था लेकिन वह सही से लैंड नहीं हो सका.

इतने चक्कर लगा चुका है चंद्रमा का
इसरो ने अपने बयान में कहा, “हालांकि इस अभियान में लैंडर की सफल लैंडिंग नहीं हो सकी, आठ वैज्ञानिक उपकरणों से सुसज्जित ऑर्बिटर सफलतापूर्वक चंद्रमा की कक्षा में स्थापित हो गया था. इस ऑर्बिटर ने अब तक चंद्रमा के 4,400 चक्कर लगाए हैं और इसके सभी उपकरण पूरी तरह से सही काम कर रहे हैं.”



कक्षा में बने रहने के लिए कोशिशें
इसरो ने अपने बयान में आगे कहा, “ऑर्बिटर चंद्रमा की पीरियोडिक ऑर्बिट मेंटिनेन्स के साथ 100 +/- 25 किलोमीटर के पोलर ऑर्बिट में कायम रखा गया है. अपनी कक्षा में पहुचने के बाद ऑर्बिट में कायम रखने की 17 कवायदें की गई हैं. वहीं इसके काम करते रहने के लिए सात साल का ईंधन भी इसमें अभी मौजूद है”



पहली बार रोवर उतारने की कोशिश
चंद्रयान-2 अभियान भारत का पहला ऐसा प्रयास था जिसमें चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव में एक रोवर उतारने की प्रक्रिया भी शामिल थी. लेकिन विक्रम नाम का यह लैंडर सही तरह से चंद्रमा की सतह पर नहीं उतर सका.

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कैमरों ने किया इसका अवलोकन
वहीं ऑर्बिटर में हाई रिजोल्यूशन कैमरों ने चंद्रमा का नक्शा बनाने के साथ चंद्रमा के वायुमंडल के बाह्यमंडल का अवलोकन किया है. इन उपकरणों से साल भर तक के आंकड़े इसरो के इंडियन स्पेस साइंस डेटा सेंटर में जमा होते रहे हैं.

कब जारी होंगे आंकड़े
इन आंकडों को इस साल के अंत तक जारी करने की योजना थी जो कि औपाचरिक पियर रिव्यू के बाद होना है. ये आंकड़े साबित करेंगे कि चंद्रयान ऑर्बिटर के उपकरण कितनी कारगरता से काम कर रहे हैं और चंद्रमा के अध्ययन के लिए बहुमूल्य योगदान देंगे.

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इस ऑर्बिटर को 17 बार अपनी कक्षा में बने रहने के प्रयास करने पड़े. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


क्या था इसका उद्देश्य
चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण चंद्रमा के विस्तृत अध्ययन के लिए किया गया था जिसमें चंद्रमा की भूआकृतियां, खनिज, सतह की रासायनिक संरचना, ऊष्मभौतिकीय गुणों और वायुमंडल का अध्ययन शामिल है. इनसे चंद्रमा की उत्पत्ति और विकास के बारे जानकारी मिलेगी.

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चंद्रमा के लिए भारत का पहला मिशन चंद्रयान एक साल 2008 में प्रक्षेपित किया गया था. इसने स्पष्ट संकेत भेजे थे कि चंद्रमा के ध्रुवों पर पानी बर्फ के रूप में प्रचुर मात्रा में मौजूद है.
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