ISRO के मंगलयान ने बताया, पृथ्वी से जल्दी गुम हो रहा है मंगल का वायुमंडल

मंगलयान (MOM) के मुताबिक एक धूल के तूफान (Dust Strom) की वजह से मंगल का वायुमंडल खत्म हो रहा है.
मंगलयान (MOM) के मुताबिक एक धूल के तूफान (Dust Strom) की वजह से मंगल का वायुमंडल खत्म हो रहा है.

इसरो (ISRO) के मंगलयान (MOM) और नासा के MAVEN के आंकड़ों के अध्ययन से पता चला है कि मंगल (Mars) का वायुमंडल पृथ्वी (Earth) के मुकाबले तेजी से गुम हो रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 23, 2020, 5:23 PM IST
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इस साल अमेरिका (US), चीन (China) और यूएई ने मंगल (Mars) के लिए अपने अभियान भेजे हैं. भारत के इसरो (ISRO) का भेजा मंगल ऑर्बिटर (MOM) भी इस समय काम कर रहा है. इसरो को MOM और नासा (NASA) के ऑर्बिटर (MAVEN) की तस्वीरों और आंकड़ों का अध्ययन से मंगल ग्रह के वायुमंडल (Atmosphere) के बारे में नई बात पता चली है. इस अध्ययन का कहना है कि मंगल अपना वायुमंडल बाहरी अंतरिक्ष (outer space) को पृथ्वी के मुकाबले ज्यादा तेजी से गंवा (losing) रहा है.

इन दो बातों पर निर्भर करता है यह
ऐसा केवल मंगल के साथ ही नहीं है कि वह अपना वायुमंडल बाहरी अंतरिक्ष को गंवा रहा है. बल्कि यह बात दूसरे ग्रहों पर भी उतनी ही ज्यादा लागू होती है. यह नुकसान जिस दर से होता है वह ग्रह के आकार और वायुमंडल के ऊपरी हिस्से का तापमान पर निर्भर करता है. चूंकि मंगल पृथ्वी से छोटा ग्रह है इसलिए वह तेजी से अपना वायुमंडल खो रहा है.
धूल का वैश्विक तूफान
इसरो ने हाल ही में अपनी वेबसाइट में उन वैज्ञानिकों की पड़ताल को पोस्ट किया जिन्होंने इसरो में MOM और नासा MAVEN के भेजे आंकड़ों और तस्वीरों का अध्ययन किया. इन तस्वीरों के आधार पर शोधकर्ताओं ने मंगल पर धूल के वैश्विक तूफान (global dust storm) का अध्ययन किया जो साल 2018 में जून जुलाई के महीने में इस ग्रह पर छा गया था. यह तूफान मंगल ग्रह के मौसमी विशेषताओं में से एक है.



(प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
मंगलयान की तस्वीरों और आंकड़ों ने यह जानकारी दी जिसकी पुष्टि में नासा के MAVEN के आंकड़ा का योगदान रहा.


उम्मीद से ज्यादा समय तक काम कर रहा है MOM
इसरो का MOM 5 नवंबर 2013 को प्रक्षेपित किया गया था और वह 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में स्थापित हो गया था. 450 करोड़ का MOM को छह महीने तक मंगल ग्रह की कक्षा में काम करना था, लेकिन यह अब भी सुचारू रूप से काम कर रहा है और लगातार तस्वीरें भेज रहा है.

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क्या हुआ इस तूफान से
इसरो ने अपने बयान में कहा, “जून 2018 के पहले सप्ताह में एक वैश्विक घूल तूफान आया था जिसे ग्रह को घेरने वाली धूल की घटना कहा जाता है, यह मंगल पर ऊंचा उठना शुरू हुआ और जुलाई के पहले सप्ताह में परिपक्व हो गया. जिससे मंगल का ऊपरी वायमंजल गर्म हो गया. इसकी वजह से मंगल के वायुमंडल का एक हिस्सा तेजी से एक्जोबेस की ऊंचाई (220 कीमी) तक पहुंच गया. यहां पर गर्म गैसें और ऊपर उठ कर बाहरी अंतरिक्ष में चली जाती हैं.

MARs, Bio signatures, MOM
मंगल (Mars) पर जीवन के संकेतों (Bio signatures) की खोज को लेकर वैज्ञानिकों को बहुत उम्मीदें हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


यह मापन किया MOM ने
इस अध्ययन से यह नतीजा निकलता है कि 2018 के वैश्विक धूल तूफान के कारण ही मंगल के वायुमंडल का काफी हिस्सा अंतरिक्ष में खो गया. MOM ने मंगल की शाम के समय 155 किमी की ऊंचाई तक पहुंच कर उसका अवलोकन किया इसरो के मार्स एक्जोस्फियरिक न्यूट्रल कंपोजीशन एनालाइजर (MENCA) उपकरण ने मंगल के थर्मोस्फियर के न्यूट्रल घनत्व का मापन किया जो 100 से 200 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर स्थित है.

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शोधकर्ताओं ने पाता कि मंगल का ऊपरी वायुमंडल इस दौरान विस्तार और तापमान वृद्धि से गुजर रहा था. जैसे धूल का तूफान मंगल पर एक महीने के समय के लिए छाया, वैज्ञानिकों ने पताय कि थर्मोस्फियर का न्यूट्रल घनत्व तेजी से बढ़ गया. इसकी पुष्टी नासा के MEVAN ने भी की,  जो मंगल के थर्मोस्फियर के सुबह की तरफ के इलाके का अवलोकन कर रहा था. इस अध्ययन के नतीजे जर्नल ऑफ जियोफिजिकल रिसर्च प्लैनेट्स में प्रकाशित हुए हैं. इससे इसरो के MOM की क्षमता के साथ बहु उपग्रह मापन के महत्व का भी पता चलता है.
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