भारत का बड़ा फैसला: मॉस्को में भी खुलेगी इसरो की इकाई, जानिए इसके फायदे

भारत अंतरिक्ष महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है, इस कदम से इसरो द्वारा अंतरिक्ष में जीवन ढूंढने के मिशन को मदद मिलेगी

News18Hindi
Updated: July 31, 2019, 11:24 PM IST
भारत का बड़ा फैसला: मॉस्को में भी खुलेगी इसरो की इकाई, जानिए इसके फायदे
इसरो
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Updated: July 31, 2019, 11:24 PM IST
भारत सरकार ने मॉस्को में इसरो के एक तकनीक संपर्क इकाई स्थापित करने को बुधवार को मंजूरी प्रदान कर दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. इससे पहले अमेरिका, रूस और चीन के पास ही अपने देश के बाहर दूसरे देशों में तकनीक संपर्क इकाई थीं.

इसके बाद इसरो को होने वाले फायदे
सरकारी विज्ञप्ति के मुताबिक इसके माध्यम से इसरो आपस में तालमेल बिठाने में सक्षम हो जाएगा. रूस और पड़ोसी देशों में अंतरिक्ष एजेंसियों और उद्योगों के साथ सहयोग स्थापित करना आसान हो जाएगा. इसके साथ ही इसरो को अपने नेविगेशन मैप को मजबूत करने में मदद मिलेगी. इसरो के गगनयान प्रोग्राम को कुछ प्रमुख तकनीकों के विकास और विशेष सुविधाओं की स्थापना की जरूरत है, जिससे अंतरिक्ष में जीवन ढूंढना आसान हो जाएगा.

गगनयान मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम को कामयाब बनाने के लिए 15 अगस्त, 2022 की समय सीमा को ध्यान में रखते हुए अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ तकनीकी भागीदारी कायम करना अहम है. इस दिशा में रूस के साथ भागीदारी की योजना है, जो कई क्षेत्रों के लिहाज से अहम रहेगी. रूस के बाद आने वाले दिनों में जापान, ऑस्ट्रेलिया समेत कई दूसरे देशों में भी इसरो अपनी तकनीक संपर्क इकाई स्थापित करेगा. इसके बजट के संदर्भ में कहा गया है कि रूस के मॉस्को स्थित इसरो तकनीक संपर्क इकाई पर वेतन, कार्यालय खर्च, किराये, टैक्स और दूसरे खर्चों के मद में औसतन लगभग 1.50 करोड़ रुपये सालाना का खर्च होगा.

इसरो


इसरो के भावी प्रोजेक्ट्स
इसरो की तरफ से 2022 तक गगनयान लेकर कोई भारतीय अंतरिक्ष में जाएगा. इसरो का शुक्र ग्रह के लिए मिशन 2023 में लॉन्‍च होगा. इसके बाद भारत वर्ष 2029 तक अपना स्‍पेस स्‍टेशन स्‍थापित करेगा. माना जा रहा है कि 2025 से 2030 के बीच भारत चांद पर मैन मिशन पर कामयाबी हासिल कर लेगा.
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भारत अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने अगले एक दशक में जिन अंतरिक्ष मिशनों की योजना बनाई है, उनमें कॉस्मिक रेडिएशन के अध्ययन के लिए 2020 में मिशन एक्सपोसैट, 2021 में सूर्य तक पहुंचने के लिए आदित्य L1, 2022 में मार्स ऑर्बिटर मिशन-2, 2024 में चंद्रयान-3 और सोलर सिस्टम के अध्ययन के लिए 2028 में मिशन लॉन्‍च किया जाना शामिल है. इसरो कि सबसे बड़ी बात ये है कि इसके ज्यादातर मिशन का बजट दूसरे स्पेस एजेंसी के मुकाबले काफी कम और किफायती होता है.

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पिछले सालों में इसरो की बड़ी सफलताएं
22 अक्टूबर 2008 को चंद्रयान-1 भेजा गया. 2014 में सफलतापूर्वक मंगल ग्रह पर मंगलयान भेजा. इसरो ने पहली बार में ही मंगलयान सीधे मंगल ग्रह की कक्षा में पहुंचाया. वो भी केवल 450 करोड़ रुपए खर्च में. 2016 में स्वदेश निर्मित स्पेस शटल RLV-TD लांच. जून 2016 को रिकॉर्ड 20 सैटेलाइट का प्रक्षेपण. 2017 में भारी रॉकेट GSLV MK3 लांच, जो अपने साथ 3,136 किलो वजन का कम्युनिकेशन सैटेलाइट जीसैट-19 लेकर गया. 2017 में ही PSLV के जरिए एक साथ 104 सैटेलाइट लांच करके वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया. 2019 में एंटी सैटेलाइट मिसाइल का सफल परीक्षण किया किया था. 2019 में चंद्रयान-2 का सफल प्रक्षेपण.

चंद्रयान-2


इसरो चाहता है कि अंतरिक्ष में महिला को भेजा जाए
डॉ. सिवन कहते हैं कि इसरो चाहता है कि अंतरिक्ष में महिला को भेजा जाए. इसरो के अध्यक्ष डॉ. के सिवन कह चुके हैं कि चयन की प्रक्रिया भारतीय वायु सेना के जरिए होगी. इसके लिए आम आदमी की आवेदन कर सकता है, पर ये देखा जाएगा कि जाने वाला अंतरिक्ष जाने में कितना सक्षम है. मॉस्को में इसरो के एक तकनीक संपर्क इकाई स्थापित होने से इसरो का चांद पर मानव भेजने के मिशन को काफी मदद मिलेगी.

पढ़ें : पग क्यों पहनते हैं सिख? जानें कैसा रहा है पगड़ी का इतिहास
First published: July 31, 2019, 10:39 PM IST
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